
भारत का हेल्थकेयर सेक्टर आने वाले दशक में अभूतपूर्व विस्तार करने वाला है, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के सुनहरे अवसर पैदा होंगे। प्रैक्सिस ग्लोबल एलायंस और NATHEALTH की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, देश का स्वास्थ्य सेवा बाजार 2030 तक करीब 700 अरब डॉलर (लगभग 66 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। फिलहाल वित्त वर्ष 2026 में इसका आकार करीब 300 अरब डॉलर आंका गया है, यानी अगले चार वर्षों में सेक्टर दोगुना होने जा रहा है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फंडिंग का ढांचा अभी भी बिखरा हुआ और कमजोर है। भारत में इलाज का बड़ा खर्च आज भी आम लोगों को अपनी जेब से उठाना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। देश में कुल स्वास्थ्य खर्च का करीब 44% हिस्सा ‘आउट-ऑफ-पॉकेट’ यानी लोगों को खुद देना पड़ता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। साथ ही करीब 43 करोड़ लोग अभी भी किसी प्रभावी हेल्थ इंश्योरेंस कवर से बाहर हैं, जिससे इलाज और महंगा पड़ता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की भयानक कमी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 1,000 लोगों पर सिर्फ 0.9 डॉक्टर और 1.6 अस्पताल बेड उपलब्ध हैं, जबकि वैश्विक औसत कहीं अधिक है। 2035 तक देश को करीब 10 लाख नए डॉक्टर और 14.5 लाख अतिरिक्त बेड की जरूरत होगी, ताकि बढ़ती आबादी और मरीजों की जरूरतें पूरी की जा सकें। इस विशाल कमी को पूरा करने के लिए हेल्थ सेक्टर को मजबूत बनाने हेतु 2035 तक 200 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की जरूरत होगी।
खुशखबरी यह है कि इस निवेश से रोजगार के लाखों द्वार खुलेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, हर 10 लाख डॉलर के निवेश से 23 से 27 नए रोजगार पैदा हो सकते हैं। इस हिसाब से 200 अरब डॉलर के निवेश से सीधे-परोक्ष रूप से करोड़ों नौकरियां सृजित होंगी।
PPP मॉडल: खेल बदलने वाला समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अनिवार्य है। मेटापोलिस हेल्थकेयर की संस्थापक अमीरा शाह ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का हेल्थ सिस्टम मजबूत होगा। इसके लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।
PPP मॉडल के तहत सरकार जमीन, नीतिगत समर्थन और लाइसेंस देगी, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, तकनीक और प्रबंधन लाएगा। इसके तहत नए मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों का उन्नयन, डायग्नोस्टिक सेंटर, टेलीमेडिसिन हब और ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुलेंगे। केंद्र सरकार ने वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के तहत वित्तीय प्रोत्साहन भी शुरू किए हैं ताकि निजी खिलाड़ी आगे आएं।
युवाओं के लिए कौन-से अवसर?
PPP मॉडल से सिर्फ डॉक्टर और नर्स ही नहीं, बल्कि व्यापक श्रेणी में रोजगार मिलेंगे। केयरगिवर्स और केयरटेकर्स की भारी मांग होगी, खासकर बुजुर्ग देखभाल के लिए। इसके अलावा नर्सिंग असिस्टेंट, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर, हॉस्पिटल मैनेजमेंट विशेषज्ञ, हेल्थ IT प्रोफेशनल, टेलीमेडिसिन ऑपरेटर, हेल्थ डेटा एनालिस्ट और फार्मा सप्लाई चेन स्टाफ की भी बड़ी भर्तियां होंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में युवाओं से केयरगिवर बनने की अपील की है, क्योंकि भारत में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और ‘केयर इकोनॉमी’ भविष्य का बड़ा सेक्टर होगी।
राज्यवार पहलें शुरू
कई राज्यों ने PPP मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों धार, बेतूल, कटनी और पन्ना में PPP मेडिकल कॉलेजों की नींव रखी है। उत्तर प्रदेश 75 जिलों में PPP के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बना रहा है। पश्चिम बंगाल ने निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी अस्पताल उपयोग के लिए आमंत्रण दिया है।
कुल मिलाकर, भारत का हेल्थ सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे मजबूत बनाने के लिए बेहतर फंडिंग, इंश्योरेंस कवरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश की जरूरत है। युवाओं के लिए यह सुनहरा अवसर है- बशर्ते वे सही स्किल और सर्टिफिकेशन के साथ तैयार रहें।









