
भारत सरकार सोशल मीडिया को साइबर क्राइम की नर्सरी से बदलकर सुरक्षित मंच बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी में है। संसदीय समिति की ताजा सिफारिशों के बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, एक्स, ऑनलाइन गेमिंग और डेटिंग ऐप्स पर KYC (नो योर कस्टमर) अनिवार्य करने का प्रस्ताव जोर पकड़ रहा है। बिना आधार, वोटर आईडी या अन्य वैध प्रूफ के अकाउंट चलेगा नहीं- यह बदलाव डिजिटल दुनिया में ‘अनजान’ अपराधियों की कमर तोड़ सकता है।
यह सिफारिश 23 मार्च को संसद की स्थायी समिति ने पेश की, जो साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन उत्पीड़न और फेक न्यूज पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखती है। समिति का कहना है कि फर्जी प्रोफाइल्स से महिलाओं के खिलाफ स्टॉकिंग, निजी तस्वीरें शेयरिंग और पहचान चोरी जैसे अपराध बढ़ रहे हैं। KYC से हर यूजर की असली पहचान जुड़ेगी, जिससे प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ेगी और कानूनी कार्रवाई तेज होगी। बैंक या सिमकार्ड की तरह अब सोशल मीडिया अकाउंट बनाना भी ID प्रूफ पर निर्भर होगा।
बढ़ते साइबर क्राइम ने खड़ी की चिंता
पिछले साल साइबर अपराधों में 63% इजाफा दर्ज किया गया, जिसमें सोशल मीडिया फेक अकाउंट्स का बड़ा हाथ था। दिल्ली-NCR में ही सैकड़ों महिलाओं ने फर्जी प्रोफाइल्स से हैरेसमेंट की शिकायत की। समिति ने रिपोर्ट में कहा कि बिना सत्यापन के प्लेटफॉर्म्स अपराधियों को ढाल देते हैं। KYC लागू होने से फ्रॉड में कमी आएगी, क्योंकि आरोपी को ट्रैक करना आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह IT रूल्स 2021 का सख्त विस्तार होगा, जो पहले से ग्रिवांस ऑफिसर और कंटेंट मॉडरेशन मांगता है।
महिलाओं-बच्चों पर फोकस, उम्र सत्यापन जरूरी
प्रस्ताव महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर केंद्रित है। डेटिंग ऐप्स पर फेक यूजर्स से धोखाधड़ी और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों का शोषण आम हो गया है। KYC से उम्र वेरिफिकेशन संभव होगा, जिससे 18 साल से कम उम्र वालों को फिल्टर किया जा सकेगा। कई राज्य पहले ही उम्र सीमा पर काम कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय KYC इसे मजबूत बनाएगा।
प्राइवेसी vs सुरक्षा: चुनौतियां
हालांकि, यह कदम प्राइवेसी बहस छेड़ेगा। यूजर्स डेटा लीक और सरकारी निगरानी से चिंतित हैं। सरकार को डिजिटल फॉरेंसिक और डेटा प्रोटेक्शन कानूनों से संतुलन बनाना होगा। अभी यह सिफारिश चरण में है- कानून बनने में महीनों लग सकते हैं। फिलहाल यूजर्स 2FA, मजबूत पासवर्ड अपनाएं। मोदी सरकार के इस ‘डिजिटल चक्रव्यूह’ से इंटरनेट ज्यादा जिम्मेदार बनेगा, लेकिन सफलता प्राइवेसी संतुलन पर निर्भर करेगी। अपडेट्स के लिए MeitY और PIB पर नजर रखें।









