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सड़क हादसे में किसी की जान बचाई तो सरकार देगी ₹25,000 का इनाम! जानें क्या है ‘गुड सेमेरिटन’ योजना का नया नियम

सड़क हादसे में घायल को 'गोल्डन आवर' के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले 'राह-वीर' को सरकार देगी ₹25,000 इनाम और प्रशस्ति पत्र। कानूनी डर खत्म- न गवाही जरूरी, न रुकना। साल में 5 बार मिलेगा सम्मान, शीर्ष 10 को ₹1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार।

By Pinki Negi

rah veer yojana get rs 25000 cash reward for saving lives in road accidents

सड़क दुर्घटना के मामलों में अक्सर देखा जाता है कि लोग घायल व्यक्ति की मदद करने में संकोच करते हैं। लोग मदद करने आगे आना तो चाहते हैं, लेकिन पुलिस और कानूनी चिंताओं के कारण ऐसा कर नहीं पाते। लेकिन अब यह डर खत्म हो गया है। केंद्र सरकार की ‘राह-वीर योजना’ के तहत अगर आप सड़क हादसे में किसी की जान बचाने के लिए आगे आते हैं, तो सरकार न केवल आपको सम्मानित करेगी, बल्कि ₹25,000 का नकद इनाम भी देगी।

कौन कहलाता है ‘राह-वीर’?

सड़क दुर्घटना के दौरान जो लोग साहस दिखाते हुए किसी घायल अजनबी को उठाकर उसे निकटतम अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर ले जाते हैं, उन्हें ‘राह-वीर’ कहा जाता है। इस योजना के तहत, जो भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के पहले 60 मिनट) के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करता है, उसे ₹25,000 का पुरस्कार और प्रशंसा पत्र दिया जाता है।

सरकार का कहना है कि बहादुरी के ऐसे कार्यों को दोहराने पर साल में पांच बार तक यह सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर हर साल चुने गए शीर्ष 10 राह-वीरों को ₹1 लाख का विशेष पुरस्कार भी दिया जाएगा।

राह-वीरों को नहीं आएगी कोई परेशानी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने स्पष्ट किया है कि राह-वीरों को किसी भी तरह की कानूनी चिंताएं करने की जरूरत नहीं होगी:

  • एक बार मरीज को अस्पताल में भर्ती कर देते हैं, तो राह-वीर को वहां रुकने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
  • घायल को अस्पताल पहुंचाने के साथ यह जरूरी नहीं कि राह-वीर इलाज का खर्च उठाएं।
  • राह-वीर को एफआईआर दर्ज करवाने या गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। गवाह बनना उनकी व्यक्तिगत पसंद होगी।
  • अगर राह-वीर गुमनाम रहना पसंद करते हैं, तो पर्सनल डिटेल्स देना जरूरी नहीं है।
  • किसी भी राह-वीर को हिरासत में लिए जाने की अनुमति नहीं होगी

मंत्रालय ने ट्विटर पर स्पष्ट किया: “अगर आप राह-वीर बनकर मदद करते हैं, तो मरीज के एडमिशन के बाद तुरंत चले जाने के लिए स्वतंत्र हैं। कोई आपको रोक नहीं सकता। बिना डर के मदद करें- कानून आपकी सुरक्षा करता है”

‘गोल्डन आवर’ क्या होता है?

कानून के अनुसार, गंभीर चोट लगने के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए इसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। यह चिकित्सा सहायता के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण समय होता है। इस अवधि के दौरान तुरंत सहायता मिले तो आजीवन विकलांगता, आघात और अनगिनत मौतों को रोका जा सकता है। भारत में हर साल 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं, जिनमें से कई समय पर इलाज न मिलने से मर जाते हैं।

कौन बन सकता है राह-वीर?

केंद्र के अनुसार, राह-वीर बनने के लिए किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए विशेष उपकरणों की भी जरूरत नहीं है। किसी घायल की मदद करने की इच्छा और साहस से ही व्यक्ति राह-वीर बन सकता है।​​ यह योजना वर्तमान में 31 मार्च 2026 तक लागू है और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में लागू की जा चुकी है।

कैसे प्राप्त करें इनाम?

इस स्कीम में किसी खास क्राइटेरिया तय नहीं किया गया है। कोई भी नागरिक जो गंभीर घायल को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाएगा, वह इनाम का हकदार होगा। एक हादसे में कई लोग मदद करें, तब भी एक घटना के लिए अधिकतम ₹25,000 ही दिए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशंसा पत्र भी मिलेगा। यह योजना आत्मविश्वास, भरोसा और एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है जहां सड़क पर दूसरों की सहायता करना एक साझा जिम्मेदारी और राष्ट्र के लिए गर्व होता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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