
भारतीय रेलवे ने करोड़ों यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और टिकट बुकिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए इतिहास में होने वाले सबसे बड़े बदलावों की घोषणा की है। 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत टिकट कैंसिलेशन और बोर्डिंग स्टेशन बदलने की प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनर्लेखित कर दिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये बदलाव सीधे तौर पर टिकट दलालों पर लगाम लगाने और वास्तविक यात्रियों को कंफर्म टिकट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किए गए हैं।
बोर्डिंग स्टेशन बदलने में बड़ी राहत
पिछले वर्षों में यात्रियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि एक बार चार्ट बन जाने के बाद बोर्डिंग पॉइंट बदलना नामुकिन हो जाता था। लेकिन नए नियमों के तहत अब यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से महज 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे ।
पहले की व्यवस्था में बोर्डिंग पॉइंट बदलने की सुविथा केवल पहला रिजर्वेशन चार्ट बनने से पहले तक ही सीमित थी। यह बदलाव विशेष रूप से उन बड़े शहरों के यात्रियों के लिए क्रांतिकारी साबित होगा जहाँ एक से अधिक प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जैसे कि दिल्ली (आनंद विहार, हुजूर साहिब निज़ामुद्दीन, नई दिल्ली), मुंबई (सेंट्रल, डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर स्टेवली), और कोलकाता (हावड़ा, सियालदह)। अब यात्री last-minute अपनी स्थिति के अनुसार तय कर सकेंगे कि उन्हें किस स्टेशन से ट्रेन पकड़नी है, बिना टिकट रद्द किए।
कैंसिलेशन और रिफंड का नया नियम
नए सिस्टम का सबसे बड़ा और संवेदनशील हिस्सा टिकट कैंसिलेशन नीति है। अब रिफंड की राशि केवल “कैंसिल कब किया” इस बात पर निर्भर करेगी, न कि पुरानी फिक्स्ड दरों पर। रेलवे ने चार स्पष्ट समय-खंड तय किए हैं:
- 72 घंटे से ज्यादा पहले: यात्रा से 72 घंटे से अधिक समय पहले टिकट रद्द करने पर यात्री को अधिकतम रिफंड मिलेगा। इस स्थिति में केवल एक नमूना फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज ही कटेगा, जो कि बहुत कम होगा ।
- 72 से 24 घंटे पहले: यदि यात्री 24 से 72 घंटे के बीच टिकट रद्द करता है, तो किराये का 25 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाएगा। इसे “सामान्य अवधि” कहा गया है ।
- 24 से 8 घंटे पहले: लेट कैंसिलेशन माने जाने वाले इस खंड में, ट्रेन छूटने से 24 घंटे से 8 घंटे के बीच टिकट रद्द कराने पर किराये का 50 प्रतिशत कटेगा ।
- 8 घंटे से कम: सबसे कठिन नियम यहीं लागू होगा। यदि ट्रेन प्रস্থान से 8 घंटे से भी कम समय बचा है, तो कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। इसे “बंद विंडो” कहा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य speculative बुकिंग को रोकना है ।
रेल मंत्री का स्पष्ट संकेत
इन नियमों को सख्त करने के पीछे रेल मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी और दलाली को रोकना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एक जांच के हवाले से बताया कि टिकट दलाल अक्सर एक्स्ट्रा टिकट बुक कर लेते थे और ग्राहक न मिलने पर ट्रेन छूटने से ठीक पहले (जैसे 1-2 घंटे पहले) उन्हें कैंसिल कर मोटा रिफंड डकार जाते थे। इससे असली यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं मिल पाते थे ।
नए सख्त रिफंड नियमों, खासकर 8-घंटे की “बंद विंडो” से, इस तरह की धोखाधड़ी पर सीधा लगाम लगेगी। दलाल अब last-minute टिकट कैंसिल नहीं कर पाएंगे, जिससे रिफंड सिस्टम का दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी ।
पुराने नियमों से कैसे अलग है नई व्यवस्था?
इससे पहले, कंफर्म टिकट कैंसिल करने के नियम 48 घंटे की समय सीमा पर आधारित थे। पहले 12 से 48 घंटे के बीच 25 प्रतिशत और 4 से 12 घंटे के बीच 50 प्रतिशत कटौती होती थी। साथ ही, पुराने नियमों में ट्रेन छूटने से 4 घंटे पहले तक ही टीडीआर (TDR) भरने या कैंसिल करने पर रिफंड का प्रावधान था ।
नई व्यवस्था में समय की सीमाओं को और बढ़ा दिया गया है (72 घंटे तक) ताकि रिफंड सिस्टम को अधिक सुव्यवस्थित और न्यायसंगत बनाया जा सके। हालांकि, यदि ट्रेन खुद कैंसिल हो जाती है या तीन घंटे से ज्यादा देरी होती है, तो पूरे रिफंड के नियम पहले की तरह ही जारी रहेंगे और इन पर कोई कटौती नहीं होगी ।









