
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च‑क्वार्टर‑end के नकदी‑दबाव को दूर करने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। शुक्रवार, 20 मार्च को तीन‑दिवसीय परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) नीलामी के ज़रिए बैंकिंग सिस्टम में 25,101 करोड़ रुपये की अल्पकालिक नकदी डाली गई और साथ ही 23 मार्च को एक‑दिनेय VRR नीलामी में 1 लाख करोड़ रुपये की तरलता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी वापसी 24 मार्च को होगी ।
20 मार्च की नीलामी
आरबीआई ने 75,000 करोड़ रुपये की तीन‑दिन की VRR नीलामी की घोषणा की थी, लेकिन अग्रिम टैक्स भुगतान और अन्य कारणों से बैंकों में नकदी तेज़ी से घट गई, जिसके चलते अंतिम आवंटन 25,101 करोड़ रहा। नीलामी में 5.26% की कट‑ऑफ और भारित‑औसत दर लगी, जो मौजूदा रेपो रेट (5.50%) से थोड़ा नीचे है और यह दर्शाता है कि बैंकों ने सस्ती फंडिंग के लिए तेज़ी से बोली लगाई।
इससे पहले, 17 मार्च को आरबीआई ने सात‑दिन की VRR नीलामी के माध्यम से 48,014 करोड़ रुपये की नकदी डाली थी, जिससे मार्च 16 तक सिस्टम‑लिक्विडिटी 75,483.63 करोड़ के सरप्लस से घटकर 19 मार्च तक केवल 16,875.36 करोड़ के अतिरिक्त स्तर पर आ गई।
23 मार्च: 1 लाख करोड़ की “ओवरनाइट” बूस्टर
केंद्रीय बैंक ने घोषणा की कि 23 मार्च सुबह 9:30‑10:00 बजे Between 9:30 am and 10:00 am एक दिन की VRR नीलामी होगी, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये तक की नकदी बैंकों को मिलेगी और इन निधियों की वापसी अगले दिन, 24 मार्च को होगी । यह कदम बैंकिंग प्रणाली की मजबूत स्थिति और मौजूदा तरलता‑स्थिरता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि अंतिम सप्ताह के कर‑भुगतान, सार्वजनिक खर्च और quarter‑end बैलेंस‑शीट दबाव के दौरान भी मनी‑मार्केट ब्याज दरों में अस्थिरता न आए।
VRR कैसे काम करता है?
परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) नीलामी पारंपरिक फिक्स्ड‑रेपो से अधिक लचीली है:
- बैंक खुद तय करते हैं कि उन्हें कितनी नकदी चाहिए और वे किस ब्याज दर पर लेने को तैयार हैं।
- जिस दर पर कुल बोली गई राशि मिलती है, वही कट‑ऑफ दर बनती है और सभी सफल बोलीदाताओं को उसी दर पर फंड मिलते हैं।
- इससे आरबीआई को तरलता को सूक्ष्म‑स्तर पर संतुलित करने और बाजार‑दरों को रेपो रेट के करीब रखने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों की राय और बाजार पर प्रभाव
- तरलता‑अधिशेष: फिलहाल ~16,875 करोड़ का सरप्लस बचा है, जो quarter‑end तक पुनः तंग हो सकता है; इसलिए 1‑लाkh‑करोड़ वाली ओवरनाइट सपोर्ट ज़रूरी है।
- ब्याज‑दरें: VRR से ऑवरनाइट रेपो दरें 5.25‑5.30% के दायरे में स्थिर रहेंगी, जिससे MCLR और बाज़ार‑आधारित लोन दरों पर तुरंत बड़ी चंगेरी नहीं होगी, लेकिन अस्थिरता कम होगी।
- शेयर‑बाज़ार व FD: अल्पकालिक फंडिंग सस्ती मिलने से फंड‑फ्लो में सुधार और छोटी अवधि के FD दरों में स्थिरता देखी जा सकती है।
भविष्य की रूप‑रेखा
आरबीआई नियमित VRR नीलामियां जारी रखेगा, खास कर मार्च‑अंत और अप्रैल‑शुरुआत में जब कर‑भुगतान और बजट‑व्यय के कारण नकदी की मांग बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 2‑3 सप्ताह में ऐसे ओवरनाइट और 3‑दिन के VRR मार्फत अतिरिक्त नकदी की आपूर्ति से बैंकिंग सिस्टम की तरलता मजबूत बनी रहेगी और मौद्रिक नीति के लक्ष्य- महागाई नियंत्रण + वित्तीय स्थिरता– पूरे होंगे।
संक्षेप में, RBI का 25,101 करोड़ का तुरंत इंजेक्शन और 23 मार्च को 1 लाख करोड़ की एक‑दिनेय नीलामी बैंकिंग सिस्टम की नकदी‑सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक समन्वित, अस्थायी लेकिन प्रभावी उपाय है, जो आम जनता, लोन‑लेने वालों और शेयर‑बाज़ार दोनों के लिए स्थिरता का संकेत देता है।









