
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के ग्लैमर और धमाल में कई टीमें ऐसी भी रहीं, जो चमकती हुई दिखीं, यादें छोड़ीं, लेकिन आज लीग के उसी आसमान में दम तोड़ चुकी हैं। कुछ टीमों ने खिताब जीतकर भी IPL की किताब से नाम मिटा लिया, तो किसी को अनुबंध उल्लंघन, वित्तीय विवाद या ताकतवर बैन बन कर बाहर का रास्ता दिखा दिए गए। आज IPL के इतिहास में डेक्कन चार्जर्स, कोच्चि टस्कर्स केरला, पुणे वॉरियर्स इंडिया, गुजरात लायंस और राइजिंग पुणे सुपरजायंट उन्हीं फ्रेंचाइज़ी हैं, जिन्होंने लीग में अपनी पहचान बनाई, लेकिन वापसी की कोई उम्मीद नहीं रही।
डेक्कन चार्जर्स
हैदराबाद की यह टीम 2008 में IPL की आठ मूल फ्रेंचाइज़ी में से एक थी। पहले सीज़न में आखिरी स्थान पर रहने वाली डेक्कन चार्जर्स ने अगले ही साल 2009 में एडम गिलक्रिस्ट की धमाकेदार कप्तानी में IPL का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। रोहित शर्मा, एंड्रयू साइमंड्स और विरेंदर सहवाग जैसे दिग्गजों के सहारे टीम ने लीग में अपनी छाप छोड़ी।
लेकिन फ्रेंचाइज़ी के मालिक डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स वित्तीय संकट से जूझ रहे थे, खिलाड़ियों का वेतन देने में असमर्थ थे और 2012 में जरूरी बैंक गारंटी नहीं दे पाए। इसी वजह से BCCI ने इस फ्रेंचाइज़ी को समाप्त (Terminate) कर दिया और बाद में इसी पूल में सनराइजर्स हैदराबाद की जगह बनाई।
कोच्चि टस्कर्स
केरल के कोच्चि से आई यह टीम 2011 में IPL में नई फ्रेंचाइज़ी के रूप में शामिल हुई। वीवीएस लक्ष्मण और महेला जयवर्धने जैसे अंतरराष्ट्रीय सितारों के होते हुए भी टीम का सफर सिर्फ एक सीज़न (2011) तक ही सीमित रहा। मालिकों के बीच आपसी विवाद, वार्षिक बैंक गारंटी राशि का भुगतान न कर पाना और अनुबंध उल्लंघन के आरोपों के चलते BCCI ने 2011 के बाद ही कोच्चि टस्कर्स को बर्खास्त कर दिया। बाद में अदालत तक गई यह लड़ाई, लेकिन टीम की IPL में वापसी की कोई संभावना नहीं बनी।
पुणे वॉरियर्स
सहारा समूह के स्वामित्व वाली पुणे वॉरियर्स इंडिया 2011 में IPL में शामिल हुई थी। यह उस समय की सबसे महंगी फ्रेंचाइज़ी में से एक थी, जिसने युवराज सिंह, रवींद्र जडेजा और अन्य दिग्गजों पर करोड़ों रुपये लगाए।
लेकिन उम्मीदों के विपरीत टीम हर सीज़न में टेबल के नीचे ही रही। जबकि सहारा ग्रुप और BCCI के बीच फ्रेंचाइज़ी फीस और मैचों की संख्या को लेकर गहरा विवाद छिड़ गया। 2013 में सहारा ने टीम को वापस (Withdraw) ले लिया और बाद में BCCI ने इसे आधिकारिक रूप से लीग से हटा दिया।
गुजरात लायंस
2016 में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के दो साल के बैन के दौरान IPL ने दो नई टीमें लाई थीं – एक थी गुजरात लायंस। भोजपुरी उद्योग समूह की इस फ्रेंचाइज़ी को सुरेश रैना की कप्तानी में जल्द ही पहचान मिली।
2016 के पहले ही सीज़न में लायंस ने पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रहते हुए अपनी जगह बनाई और 2017 तक प्लेऑफ़ तक पहुंची। लेकिन यह टीम अस्थायी अनुबंध पर थी, जिसका करार केवल 2016–2017 के लिए था। 2018 में CSK और RR की वापसी के साथ BCCI ने गुजरात लायंस को आधिकारिक तौर पर विघटित कर दिया।
राइजिंग पुणे सुपरजायंट
उसी अस्थायी स्लॉट पर बनी दूसरी टीम राइजिंग पुणे सुपरजायंट (RPS) थी, जो पुणे वॉरियर्स के बाद शहर को नई पहचान देने वाली फ्रेंचाइज़ी मानी जाती थी। IPL 2016 में इस टीम की शुरुआत EW डे सिल्वा और बाद में स्टीव स्मिथ की कप्तानी में हुई।
इतिहास के लिए यह टीम इसलिए यादगार है क्योंकि 2017 में वह फाइनल तक पहुंची और मुंबई इंडियंस से सिर्फ 1 रन से हार गई। यह प्रतिस्पर्धा आज भी IPL के सबसे रोमांचक फाइनल के रूप में याद की जाती है। लेकिन RPS भी 2 साल के अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट पर थी। 2017 सीज़न के बाद कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होते ही BCCI ने टीम को लीग से हटा दिया, और इसमें दोबारा स्लॉट देने की कोई योजना नहीं बनी।
क्यों अब नहीं होगी वापसी?
ये सभी 5 टीमें या तो वित्तीय संकट, फ्रेंचाइज़ी विवाद, या अस्थायी अनुबंध की वजह से IPL से बाहर हुईं। BCCI अब टीमों की संख्या को नियंत्रित रखना चाहता है और नई टीमें जोड़ने पर भी पहले से निश्चित रणनीति के अनुसार कदम उठाता है। ऐसे में इन गायब टीमों में से किसी की री‑एंट्री की संभावना शून्य के करीब है। ये टीमें आज इतिहास के पन्नों में दब चुकी हैं, लेकिन उनके खिलाड़ी, वो फाइनल, और उनके दिग्गज कप्तान अभी भी IPL की यादगारों में जिंदा हैं।









