
दुनिया की सबसे खुशहाल देशों की ताजा रैंकिंग में फिनलैंड ने लगातार नौवें साल शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 के अनुसार, टॉप-10 में एक भी अमीर या अंग्रेजी बोलने वाला देश जगह नहीं बना सका। नॉर्डिक देशों का दबदबा कायम रहा, जबकि भारत 116वें स्थान पर पहुंचा। पड़ोसी पाकिस्तान (104वां) और नेपाल (99वां) से पीछे रहने के बावजूद भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है।
रिपोर्ट का आधार और फिनलैंड की कामयाबी
गुरुवार को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर ने जारी रिपोर्ट में 147 देशों का मूल्यांकन किया गया। यह रिपोर्ट गैलप वर्ल्ड पोल के डेटा पर आधारित है, जिसमें लोग अपनी जिंदगी को 0 से 10 के स्केल पर रेट करते हैं। फिनलैंड ने 7.764 का औसत स्कोर हासिल किया, जो पिछले साल से 0.375 अंक ज्यादा है।
वहां के लोग सामाजिक समर्थन, कम भ्रष्टाचार, उच्च स्वतंत्रता और प्रकृति से जुड़ाव को अपनी खुशी का राज बताते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2006-2010 के आधार वर्ष से 2023-2025 तक 79 देशों में खुशी का स्तर बढ़ा है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद नॉर्डिक देश अव्वल रहे।
टॉप-10 में नॉर्डिक दबदबा
रैंकिंग में फिनलैंड पहले, आइसलैंड दूसरे (7.540), डेनमार्क तीसरे (7.539), कोस्टा रिका चौथे (7.439), स्वीडन पांचवें, नॉर्वे छठे, नीदरलैंड्स सातवें, इजरायल आठवें (7.187), लक्जमबर्ग नौवें और स्विट्जरलैंड दसवें स्थान पर हैं। खास बात यह है कि कोस्टा रिका 2023 में 23वें से उछलकर चौथे नंबर पर आया। इजरायल युद्धग्रस्त होने के बावजूद टॉप-10 में काबिज रहा। अमेरिका और कनाडा जैसे अमीर देशों की रैंकिंग घटी, क्योंकि युवाओं में सोशल मीडिया का नकारात्मक असर बढ़ा।
सबसे निचले पायदान पर युद्धग्रस्त देश
नीचे के पायदान पर अफगानिस्तान (147वां), सिएरा लियोन और मलावी जैसे गरीबी व युद्ध प्रभावित देश हैं। रिपोर्ट छह पैमानों- जीडीपी प्रति व्यक्ति, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा- पर आधारित है।
भारत-पड़ोसियों की स्थिति
भारत का स्कोर 4.536 रहा, जो 2024 के 126वें, 2025 के 118वें से बेहतर है। लेकिन पड़ोसियों से पिछड़ना चिंता का विषय है। पाकिस्तान 104वें (स्कोर 4.868), नेपाल 99वें, श्रीलंका 99वें, बांग्लादेश 127वें और अफगानिस्तान 147वें स्थान पर हैं। चीन 65वें पर बेहतर। भारत असमानता (92), सामाजिक समर्थन (123) और जीडीपी (89) में कमजोर रहा, लेकिन स्वतंत्रता (61) और भ्रष्टाचार धारणा (64) में ठीक।
भारत के लिए सबक और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आर्थिक विकास के बावजूद सामाजिक असमानता, बेरोजगारी और शहरी तनाव खुशी को प्रभावित कर रहे हैं। युवाओं में मेंटल हेल्थ समस्याएं बढ़ी हैं। रिपोर्ट सुझाव देती है कि सामाजिक समर्थन मजबूत करने से सुधार संभव है। नॉर्डिक देशों की सफलता से सीख लेते हुए भारत को सामाजिक कल्याण योजनाओं, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर फोकस बढ़ाना होगा। यह रिपोर्ट न सिर्फ रैंकिंग है, बल्कि नीति-निर्माताओं के लिए आईना भी।









