
इटली की लग्जरी कार निर्माता लैंबॉर्गिनी को प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा। कंपनी के चेयरमैन स्टीफन विंकेलमैन ने स्पष्ट किया कि यह डील फिलहाल केवल पेट्रोल/डीजल आधारित इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) कारों पर टैरिफ छूट देती है, जबकि लैंबॉर्गिनी की पूरी नई रेंज प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल्स पर आधारित है। इस पेंच के कारण भारत में इन सुपरकारों की ऊंची कीमतें यथावत रहेंगी, जो ग्राहकों के लिए चुनौती बनेगी।
FTA में क्यों अटका लैंबॉर्गिनी का लाभ?
भारत-ईयू FTA का मुख्य उद्देश्य आयात शुल्क को धीरे-धीरे शून्य करना है, जिससे लग्जरी कारों जैसे BMW, मर्सिडीज और पorsche सस्ती हो सकें। लेकिन इसमें एक बड़ी शर्त जोड़ी गई है – यह छूट सिर्फ ICE वाहनों तक सीमित रहेगी। प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बाहर रखा गया, जो पर्यावरणीय लक्ष्यों के बावजूद एक विडंबना है।
विंकेलमैन ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि उनकी कंपनी 2024 से ही हाइब्रिड तकनीक पर शिफ्ट हो चुकी है। नतीजा? भारत में Urus SE, Temerario और Revuelto जैसे मॉडल्स पर 100-170% तक का कस्टम्स ड्यूटी बरकरार रहेगा।
भारत में लैंबॉर्गिनी की प्रमुख कारें प्रभावित
भारत लैंबॉर्गिनी के लिए एशिया का तेजी से बढ़ता बाजार है, जहां कंपनी सालाना 100 से अधिक यूनिट्स बेचती है। लोकप्रिय मॉडल्स में शामिल हैं:
- Urus SE: PHEV SUV, कीमत करीब 4.2 करोड़ रुपये।
- Temerario: नया PHEV सुपरकार, 800+ hp पावर।
- Revuelto: V12 PHEV हाइपरकार, 1,000 hp से ज्यादा।
ये कारें करोड़ों के दायरे में आती हैं, और FTA से टैक्स राहत न मिलने से ग्राहक वर्ग- ज्यादातर युवा उद्यमी और HNIs- पर बोझ बढ़ेगा। उदाहरणस्वरूप, Urus SE पर करीब 2 करोड़ रुपये का ड्यूटी लगता है, जो अब भी वही रहेगा।
भविष्य की उम्मीदें: बदलाव की गुंजाइश
फिर भी, लैंबॉर्गिनी निराश नहीं है। विंकेलमैन ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में प्लग-इन हाइब्रिड को शामिल किया जाएगा।” कंपनी भारत में स्थिर ग्रोथ की भविष्यवाणी कर रही है, खासकर लंबी अवधि में। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, नीतिगत स्थिरता और युवा खरीदारों की बढ़ती रुचि इसे मजबूत बाजार बनाएगी। लैंबॉर्गिनी जल्दबाजी से बचते हुए धीरे-धीरे मौजूदगी बढ़ाएगी, जैसे नए शोरूम और सर्विस सेंटर्स के जरिए।
ग्लोबल परफॉर्मेंस: मजबूत बनी ब्रांड वैल्यू
2025 में लैंबॉर्गिनी ने वैश्विक स्तर पर 10,747 कारें डिलीवर कीं, जो लगातार तीसरा साल 10,000+ यूनिट्स का आंकड़ा पार कर गया। रेवेन्यू रिकॉर्ड 34,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचा, जिसमें हाइब्रिड मॉडल्स का बड़ा हाथ रहा। यह मजबूती भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए प्रेरणा है।
भारतीय बाजार: बड़ा अवसर बरकरार
FTA का झटका लगने के बावजूद लैंबॉर्गिनी भारत को “भविष्य का बड़ा बाजार” मान रही है। नई पीढ़ी की डिमांड, बेहतर सड़कें और आर्थिक विकास इसे सपोर्ट करेंगे। कुल मिलाकर, यह डील पर्यावरण-अनुकूल शिफ्ट और व्यापार नीतियों के बीच टकराव को उजागर करती है। लैंबॉर्गिनी की रणनीति साफ है- धैर्य से ग्रोथ, भविष्य के बदलाव पर नजर।









