
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। चीन ने इस समस्या का अनोखा समाधान पेश किया है – ‘एनर्जी टैंक’ नामक मोबाइल चार्जिंग रोबोट। यह स्वचालित रोबोट पार्किंग स्पॉट में खुद पहुंचकर EV को फुल चार्ज कर देता है, जिससे फिक्स्ड स्टेशन की टेंशन खत्म हो जाती है।
यह तकनीक Eraergy कंपनी द्वारा विकसित की गई है और हाल ही में नानिंग के Linliqiao Jiayuan जैसे पुराने रिहायशी इलाकों में तैनात हुई है। यहां 400 से ज्यादा EV वाले कॉम्प्लेक्स में पार्किंग और ग्रिड कैपेसिटी सीमित होने से चार्जिंग मुश्किल थी। अब स्मार्टफोन ऐप से रोबोट को कॉल करें, और यह 1.5 मीटर ऊंचा ‘मोबाइल पावर बैंक’ खुद गाड़ी तक आ जाता है।
रोबोट की तकनीकी खासियतें
एनर्जी टैंक तीन मॉडल्स में उपलब्ध है: 30 kWh, 100 kWh और 200 kWh बैटरी कैपेसिटी वाले। अधिकतम 120 kW डिस्चार्ज पावर के साथ यह फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है। 10% चार्ज वाली EV को 40-60 मिनट में इस्तेमाल लायक बना देता है। इसमें बैटरी स्टोरेज, ड्राइवेबल चेसिस और इंटेलिजेंट कंट्रोल सॉफ्टवेयर इंटीग्रेटेड है, जो कार का पोर्ट ढूंढकर प्लग कनेक्ट कर देता है।
कंपनी के अनुसार, रोबोट ऐप से बुलाने पर पार्किंग में नेविगेट करता है, चार्जिंग पूरी होने पर बेस स्टेशन लौटता है। यह पुराने बिल्डिंग्स के लिए परफेक्ट है, जहां वायरिंग अपग्रेड महंगा पड़ता। वीडियो डेमो में दिखाया गया कि रोबोट बिना किसी हस्तक्षेप के काम करता है।
कैसे बदल रही है EV चार्जिंग की तस्वीर?
पारंपरिक चार्जिंग में ड्राइवर को स्टेशन ढूंढना पड़ता है, लाइन लगानी पड़ती है। एनर्जी टैंक इस ‘कार ढूंढे चार्जर’ वाली समस्या को उलट देता है – चार्जर कार तक आता है। फायदे साफ हैं:
- फिक्स्ड स्टेशन की लागत बचत।
- पार्किंग स्पेस का ऑप्टिमम उपयोग।
- रेंज एंग्जायटी कम।
- होटल, हाईवे सर्विस एरिया और लॉजिस्टिक्स जैसे SF Express में तैनाती।
बीजिंग में 150 पार्किंग साइट्स पर 1,000 रोबोट लगाने की योजना है। छत पर चलने वाले वैरिएंट्स (LiAuto, CGXi) भी आ रहे हैं, जो एक साथ 8+ कारें चार्ज कर सकेंगे।
भारत के लिए सबक
भारत में EV बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन 2026 तक सिर्फ 1.3 लाख पब्लिक चार्जर्स हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में जगह की कमी है। एनर्जी टैंक जैसी तकनीक अपार्टमेंट्स, मॉल्स और ऑफिस पार्किंग्स के लिए गेम-चेंजर हो सकती है। सरकार की FAME-III स्कीम में ऐसे इनोवेशन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, बैटरी रिसाइक्लिंग और साइबर सिक्योरिटी चुनौतियां रहेंगी।
वैश्विक प्रभाव
यह चाइनीज इनोवेशन EV इंडस्ट्री को गति देगा। यूरोप और अमेरिका में भी इसी तरह के प्रोजेक्ट्स टेस्ट हो रहे। आने वाले समय में स्मार्ट सिटी में रोबोटिक चार्जिंग स्टैंडर्ड बन सकती है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मास एडॉप्शन दिलाएगी।









