
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने पिछले एक दशक में भारत को डिजिटल दुनिया का सुपरपावर बना दिया है। लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2015 में शुरू इस पहल ने मोबाइल डेटा की कीमतों में 97% की भारी गिरावट लाकर आम आदमी के लिए इंटरनेट को कौड़ियों के दाम उपलब्ध कराया है। 2014-15 में ₹269-287 प्रति जीबी की दर अब घटकर ₹7.9-9 प्रति जीबी रह गई है, जिससे डिजिटल एक्सेस लोकतांत्रिक हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित यह कार्यक्रम ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स को 25 करोड़ से 103 करोड़ (2024-25 तक) पहुंचाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के 18 मार्च 2026 के बयान में दर्ज उपलब्धियों पर केंद्रित रहा। चार प्रमुख स्तंभ- इंटरनेट एक्सेस बढ़ाना, सस्ता बनाना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना और डिजिटल साक्षरता- ने समावेशी विकास सुनिश्चित किया। परिणामस्वरूप, मोबाइल यूजर्स 92.8 करोड़ से अधिक हो गए, जबकि UPI ट्रांजैक्शन 228 अरब (₹300 खरब मूल्य) तक पहुंचे।
इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांतिकारी उछाल
आधिकारिक आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मोबाइल बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) 7.9 लाख से उछलकर 29.5 लाख हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में 2G/3G/4G कनेक्टिविटी वाले गांव 6.35 लाख तक पहुंचे, जो यूनिवर्सल कवरेज का संकेत है। ऑप्टिकल फाइबर लंबाई मात्र 358 किमी से बढ़कर 6.92 लाख किमी से अधिक हो गई, जिसमें ₹1.39 लाख करोड़ का निवेश शामिल है। BSNL का स्वदेशी 4G नेटवर्क भी ग्रामीण डिजिटलीकरण को गति दे रहा है।
डेटा खपत में भी विस्फोटक वृद्धि हुई। प्रति सब्सक्राइबर मासिक उपयोग 61.66 एमबी से 25.25 जीबी हो गया। रिलायंस जियो जैसी कंपनियों की एंट्री और सरकारी नीतियों ने वैश्विक स्तर पर भारत को सबसे सस्ते डेटा का केंद्र बनाया, जहां अमेरिका जैसे देश पीछे रह गए। इससे ई-कॉमर्स, ऑनलाइन एजुकेशन और डिजिटल पेमेंट्स में boom आया।
आमजन को अपार लाभ
सस्ते इंटरनेट ने जेब पर बोझ कम किया। किसान मौसम अपडेट लेते हैं, छात्र ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं, और छोटे व्यापारी UPI से कारोबार चला रहे हैं। 97 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहक आज डिजिटल इंडिया की सफलता की गवाही दे रहे हैं। हालांकि, खतरे के बादल मंडरा रहे। DoT हर जीबी पर ₹1 टैक्स लगाने का प्रस्ताव ला रहा, जो 2 जीबी/दिन प्लान में ₹60 मासिक बढ़ोतरी लाएगा। इससे सरकारी आय ₹22,900 करोड़ हो सकती है, लेकिन सस्ते इंटरनेट का जादू फीका पड़ सकता है। विशेषज्ञ सतर्क हैं कि यह डिजिटल ग्रोथ को प्रभावित करेगा।
डिजिटल इंडिया ने सपना दिखाया- सबका साथ, सबका विकास। अब सरकार को सतत सस्तेपन पर फोकस करना होगा ताकि 6G महत्वाकांक्षाएं साकार हों। यह डिजिटल दशक की विरासत बनी रहेगी।









