
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने अवैध प्रवासियों के लिए अनोखा ऑफर लॉन्च किया है- मुफ्त फ्लाइट टिकट के साथ 2600 डॉलर (करीब 2.4 लाख रुपये) का एग्जिट बोनस। यह ‘प्रोजेक्ट होमकमिंग’ नामक सेल्फ-डिपोर्टेशन स्कीम का हिस्सा है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सख्त इमीग्रेशन नीति का प्रतीक बन गया है। खासकर भारतीयों को टारगेट करने वाले इस कैंपेन में ताजमहल की तस्वीर का इस्तेमाल विवादों में घिर गया है।
ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2025 में सत्ता संभालते ही अवैध अप्रवासियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया। अनुमान है कि अमेरिका में 7.25 लाख भारतीय बिना वैध कागजात के रह रहे हैं। DHS का CBP होम ऐप इस योजना का केंद्र है- रजिस्टर करें, स्वेच्छा से देश छोड़ें, और फ्री यात्रा व नकद इनाम पाएं। योजना मई 2025 से सक्रिय है और अब तक 22 लाख से ज्यादा लोगों ने इसका लाभ उठाया। लेकिन सवाल वही है: ट्रंप सरकार इतना ‘पानी की तरह पैसा’ क्यों बहा रही है?
रणनीति: जबरन डिपोर्टेशन से बचत
जबरन डिपोर्टेशन का खर्च प्रति व्यक्ति 18,000 डॉलर से ज्यादा है- जेल, कानूनी लड़ाई, उड़ान सब मिलाकर। वहीं, सेल्फ-डिपोर्ट पर सिर्फ 5,100 डॉलर लगते हैं, यानी 13,000 डॉलर की बचत। स्वैच्छिक प्रस्थान चुनने वालों को ICE की गिरफ्त से छूट मिलती है, जुर्माने माफ होते हैं, और वे सम्मानजनक विदाई पाते हैं। गैर-भागीदारी पर स्थायी प्रतिबंध व सख्त कार्रवाई का डर। भारत के अलावा चीन व कोलंबिया के लैंडमार्क्स वाली पोस्टर्स भी जारी की गईं।
ताजमहल पोस्टर पर बवाल
DHS ने X पर ताजमहल के पोस्टर के साथ लिखा: “फ्री फ्लाइट होम और 2600 USD एग्जिट बोनस पाएं।” इसे भारतीय समुदाय ने ‘अपमानजनक’ बताया- 14 अरब भारतीयों का प्रतीक इस तरह इस्तेमाल? सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। ट्रंप की एंटी-इमीग्रेशन लहर H-1B वीजा धारकों तक फैल रही है, जहां नफरत की घटनाएं बढ़ी हैं।
भारतीयों पर असर
2026 में 2790 से ज्यादा भारतीय डिपोर्ट हो चुके। योजना प्रोत्साहन देती है, लेकिन भविष्य में 5-10 साल का अमेरिका प्रवेश प्रतिबंध जोखिम है। लाभार्थी पुनर्वास खर्च के लिए पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं। भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
यह स्कीम ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हथियार है- सस्ते में लाखों अवैध प्रवासियों को हटाना। लेकिन सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी विवाद बढ़ा रही। क्या यह ‘लालच’ कामयाब होगा? आंकड़े तो यही कहते हैं।









