
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने देशभर के 650 से अधिक नवोदय विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को कक्षा-6 के प्रवेश से वंचित रखने पर केंद्र सरकार से कड़ा सवाल किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने 17 मार्च को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, नवोदय विद्यालय समिति (NVS) और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा। अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। यह मामला सिर्फ एक छात्र का नहीं, बल्कि लाखों EWS परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा है।
याचिका का आधार
यह याचिका जबलपुर के सिहोरा निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके पिता धीरज तिवारी ने दायर की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नवोदय विद्यालयों का मूल उद्देश्य ग्रामीण और कमजोर वर्ग के होनहार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। लेकिन वर्तमान प्रवेश नियमों में EWS श्रेणी को शामिल नहीं किया गया, जिससे यह वर्ग पूरी तरह बाहर रह गया। वर्तमान में NVS में SC/ST के लिए 15-27%, OBC के लिए 27%, ग्रामीण छात्रों के लिए 67%, लड़कियों के लिए 33% और दिव्यांगों के लिए आरक्षण है, पर EWS के लिए कोई प्रावधान नहीं।
संवैधानिक तर्क
याचिका में संवैधानिक आधार मजबूत बताया गया। 2019 के संविधान के 103वें संशोधन से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया, जो सामान्य वर्ग के EWS को शिक्षा संस्थानों में 10% आरक्षण का अधिकार देता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि शिक्षा मंत्रालय के अधीन केंद्रीय विद्यालय (KVS) में EWS छात्रों को यह लाभ मिलता है, लेकिन उसी मंत्रालय के नवोदय विद्यालयों में ऐसा भेदभाव क्यों? यह असमानता संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
छात्रों पर प्रभाव
देशभर के नवोदय विद्यालयों में करीब 2.9 लाख छात्र पढ़ते हैं। याचिका में कहा गया कि 2019 से अब तक हजारों EWS छात्र इस मुफ्त आवासीय शिक्षा से वंचित रहे। एक हालिया कोर्ट फैसले का हवाला देते हुए वकील ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बताया। “यह सिर्फ नव्या का केस नहीं, लाखों गरीब लेकिन मेधावी बच्चों का सवाल है। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे,” उन्होंने कहा।
भविष्य की संभावनाएं
नवोदय समिति की 2026-27 सत्र की अधिसूचना में भी EWS का जिक्र नहीं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत 25% गरीब बच्चों के लिए सीटें आरक्षित हैं, लेकिन NVS इससे अलग माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट ने सकारात्मक फैसला दिया तो 657 नवोदय स्कूलों में हजारों सीटें खुल सकती हैं।
केंद्र सरकार का जवाब तय करेगा कि क्या EWS को नवोदय का द्वार खुलेगा। यह फैसला सामाजिक न्याय की नई बहस छेड़ सकता है। फिलहाल, EWS परिवार उम्मीद बांधे हैं कि न्याय मिलेगा और उनके बच्चे भी नवोदय की सीढ़ी चढ़ सकेंगे।









