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IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन पर सरकार का यू-टर्न! अब फिर से शुरू होगी पूरी प्रक्रिया, जानें क्या है असली वजह

सरकार ने IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करने का फैसला लिया है। पिछले हफ्ते मिली वित्तीय बोलियां रिजर्व प्राइस से काफी कम थीं, जिससे डील रोक दी गई थी। अब इसे विनिवेश से जुड़े मंत्री समूह में रखकर नई राह तय की जाएगी।

By Pinki Negi

IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन पर सरकार का यू-टर्न! अब फिर से शुरू होगी पूरी प्रक्रिया, जानें क्या है असली वजह

केंद्र सरकार ने IDBI बैंक के रणनीतिक निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन) की पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का मन बना लिया है। पिछले हफ्ते मिली वित्तीय बोलियों के आंकड़े सरकार द्वारा तय किए गए रिजर्व प्राइस से काफी कम रहे, जिसके बाद यह प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। अब सूत्रों के मुताबिक, इस मामले को विनिवेश से जुड़ी एक अहम मंत्री समूह (EGoM) की बैठक में रखा जाएगा, जहां इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। शुरुआती चर्चाओं में यही राय बनती दिख रही है कि प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर आगे बढ़ना चाहिए।

पांच साल की लंबी प्रक्रिया

लगभग पांच साल से सरकार IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटी है। इस दौरान बार–बार वित्तीय बोलियां आईं, लेकिन या तो कीमतें कम रहीं या डील बनने में देरी हुई। अब सरकार पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा करेगी, खासकर उस तंत्र की, जिसके आधार पर IDBI बैंक के लिए रिजर्व प्राइस तय किया गया था। जानकारों का कहना है कि सीमित सार्वजनिक हिस्सेदारी वाले बैंकों के लिए सिर्फ शेयर बाजार की कीमत के आधार पर रिजर्व प्राइस तय करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे बाजार में हेरफेर और अस्थिरता का खतरा बना रहता है।

रिजर्व प्राइस और उतार–चढ़ाव

फिलहाल सरकार के पास IDBI बैंक में 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि एलआईसी के पास 49.24 फीसदी हिस्सा है। बाकी लगभग 5 फीसदी हिस्सा आम निवेशकों के पास है। पिछली बार वित्तीय बोलियां रद्द होने के बाद से बैंक के शेयर की कीमत में करीब 19 फीसदी की गिरावट आई है। मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह 74.28 रुपये पर बंद हुआ, जो 52 हफ्तों के निचले स्तर 72 रुपये के करीब है। इस उतार–चढ़ाव के बीच शेयरधारकों का भरोसा भी डगमगाया है।

बोलीदाताओं और नई राह

प्राइवेटाइजेशन प्रक्रिया में अब तक प्रेम वत्सा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल और अमीरात के एमिरेट्स एनबीडी जैसे बड़े नामों ने वित्तीय बोलियां दर्ज की थीं। हालांकि, ये बोलियां सरकार के रिजर्व प्राइस से नीचे रहीं, जिससे डील आगे नहीं बढ़ पाई। अब नई समीक्षा के बाद यह संभावना है कि रिजर्व प्राइस में ढील या फिर नए तंत्र पर मंथन किया जाएगा, ताकि आगे आने वाली बोलियां अधिक उत्तेजक और डील योग्य हों।

पुराने बोलीदाताओं को राहत

सरकार इस बात पर भी गौर कर रही है कि अगर पुराने बोलीदाता इस बार फिर से डील में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें एजेंसियों और रेगुलेटर से दोबारा मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रक्रिया में देरी कम होगी और डील जल्दी आगे बढ़ सकती है। हालांकि, नए बोलीदाताओं के लिए नियमों के अनुसार दोबारा दस्तावेजों की जांच होगी। साथ ही, इस बात को स्पष्ट किया गया है कि IDBI बैंक को किसी दूसरे सरकारी बैंक में मिलाने की कोई योजना नहीं है।

RBI मंजूरी और छोटे निवेशकों का अधिकार

इस बार भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो पिछली बार थी। सफल बोलीदाता को RBI के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मापदंडों पर खरा उतरना होगा, जिसके बाद ही उसे अंतिम मंजूरी मिलेगी। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) सहित अन्य नियामकों और सांविधिक संस्थानों से भी अनुमति लेनी होगी। सफल बिडर के लिए यह भी जरूरी होगा कि वह बैंक के छोटे निवेशकों को ओपन ऑफर के जरिए अपने शेयर बेचने का विकल्प दे। इस तरह सरकार ने न केवल रिजर्व प्राइस पर दोबारा विचार किया है, बल्कि पूरी डील की पारदर्शिता और छोटे निवेशकों के हितों को भी प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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