Tags

भारत में बेरोजगारी पर चौंकाने वाली रिपोर्ट! 40% ग्रेजुएट्स खाली हाथ, सिर्फ इतने लोगों को मिली पक्की नौकरी

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट ने भारत में ग्रेजुएट बेरोजगारी का कड़वा सच उजागर किया। 20-29 वर्ष के 6.3 करोड़ ग्रेजुएट्स में 1.1 करोड़ बेरोजगार। ग्रेजुएशन के एक साल बाद सिर्फ 7% को पक्की नौकरी। 15-25 साल वालों में 40% बेरोजगारी दर। शिक्षा बढ़ी, रोजगार सृजन पिछड़ा।

By Pinki Negi

40 pc graduate unemployment minimal stable job placement within a year report reveals

भारत की युवा पीढ़ी शिक्षा के मोर्चे पर रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन रोजगार बाजार ठिठक गया है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की ताजा रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026′ ने एक कड़वी सच्चाई उजागर की है। 20-29 वर्ष के 6.3 करोड़ ग्रेजुएट्स में से करीब 1.1 करोड़ बेरोजगार हैं। ग्रेजुएशन के एक साल बाद महज 7% को ही पक्की सैलरी वाली नौकरी नसीब होती है। 15-25 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 40% और 25-29 साल वालों में 20% है।

चौंकाने वाले आंकड़े

रिपोर्ट पिछले 40 वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, जो शिक्षा से रोजगार तक की उलझी राह को बयां करती है। 2004 में बेरोजगार युवाओं में ग्रेजुएट्स की हिस्सेदारी 32% थी, जो 2023 तक 67% पहुंच गई। हर साल 50 लाख नए ग्रेजुएट्स बाजार में उतरते हैं, लेकिन नौकरियां सिर्फ 28 लाख बढ़ती हैं। इनमें भी 17 लाख को ही स्थायी रोजगार मिलता है। नतीजा? ग्रेजुएट्स सड़कों पर भटक रहे हैं।

शिक्षा का विस्तार, रोजगार का संकट

शिक्षा का विस्तार laudable है। आजादी के बाद उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ा, लिंग-जाति आधारित बाधाएं घटीं। लेकिन स्कूल से नौकरी तक का सफर अनिश्चित है। युवा पुरुषों की पढ़ाई छोड़ने की दर 2017 के 38% से घटकर 2024 में 34% हुई, मुख्य कारण परिवार की आय में हाथ बंटाना- 2017 में 58% से बढ़कर 2023 में 72%। ग्रेजुएट्स की कमाई गैर-ग्रेजुएट्स से दोगुनी शुरू होती है, लेकिन पुरुषों के वेतन में ग्रोथ रुकी है। सकारात्मक पक्ष: महिलाओं की आय में लैंगिक अंतर कम हुआ।

भविष्य की चेतावनी

रिपोर्ट चेताती है- 2030 के बाद कामकाजी आबादी घटेगी। ग्रेजुएट्स जागरूक हैं, आकांक्षी नौकरियां चाहते हैं, लेकिन बाजार तैयार नहीं। ITI जैसे व्यावसायिक कोर्स बढ़े, फिर भी मांग-आपूर्ति का फासला चौड़ा। सरकार को स्किलिंग, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ाना होगा। विशेषज्ञ रोजा अब्राहम कहती हैं, “शिक्षा बढ़ी, लेकिन रोजगार सृजन पिछड़ गया।” यह संकट आर्थिक विकास को भारी पड़ सकता है।

समाधान के रास्ते

युवा आबादी भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड है, लेकिन बेरोजगारी इसे लायबिलिटी बना रही है। नीति निर्माताओं को तत्काल कदम उठाने होंगे-रोजगार-केंद्रित शिक्षा, उद्योगों से साझेदारी और क्षेत्रीय असंतुलन दूर करना। वरना, ‘पढ़े-लिखे बेरोजगार’ की फौज सामाजिक अस्थिरता ला सकती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें