
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राशन कार्ड (नीला कार्ड) की पात्रता शर्तों में क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है। अब चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी सस्ते अनाज का लाभ ले सकेंगे। 11 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए पुरानी सख्त परिभाषाओं को उदार बना दिया गया, जिससे लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। यह कदम राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता को लुभाने वाली बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
नीले राशन कार्ड के नए मानदंड
पहले नीले राशन कार्ड के लिए सालाना आय 1.80 लाख रुपये से अधिक होने, चार पहिया वाहन, एयर कंडीशनर, 100 गज से बड़ा प्लॉट, 2.5 एकड़ उपजाऊ जमीन या आयकर दाखिल करने वालों को अयोग्य ठहराया जाता था। लेकिन नई नीति में आय सीमा को 8 लाख रुपये तक बढ़ा दिया गया है। वाहन, जमीन, एसी और आयकर जैसी बाधाएं पूरी तरह हटा ली गईं। केवल सरकारी कर्मचारी ही अपात्र रहेंगे। सरकार का लक्ष्य 10 लाख नए कार्ड जारी करना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) फॉर्मूले पर आधारित होंगे।
बदलाव की पृष्ठभूमि और महत्व
यह बदलाव 2026-27 के बजट घोषणा का हिस्सा है, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को भी कवर करने का वादा किया था। सितंबर 2025 में सख्त नियम लागू होने से कई परिवार बाहर हो गए थे, लेकिन अब ढील से मध्यम वर्ग को फायदा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पंजाब का खाद्य सुरक्षा कानून राष्ट्रीय स्तर पर सबसे उदार हो गया है। केंद्र सरकार के 11 लाख अपात्र लाभार्थियों के कार्ड कटने के निर्देशों के बीच यह राज्य स्तर पर बड़ी राहत है।
‘मेरी रसोई’ योजना का विस्तार
मान सरकार की फ्लैगशिप ‘मेरी रसोई योजना’ को अब नए कार्डधारकों के साथ जोड़ा गया है। 22 फरवरी 2026 को लॉन्च हुई इस योजना से 40 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। तिमाही आधार पर वितरण होगा: 2 किलो चीनी, 2 किलो दाल, 1 लीटर सरसों तेल और 200 ग्राम हल्दी मुफ्त मिलेगी। पुरानी गेहूं वितरण योजना भी जारी रहेगी। सबसे खास बात, ‘घर-घर राशन’ मॉडल से डिपो पर भीड़ नहीं लगेगी। डोरस्टेप डिलीवरी से महिलाओं और बुजुर्गों को सुविधा मिलेगी।
योजना का विस्तृत लाभ और वितरण
योजना का विस्तार तिमाही राशन किट के रूप में होगा, जिसमें मूंग-चना दाल, नमक और तेल शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, पहली किस्त मार्च-अप्रैल में वितरित हो चुकी है। यह कदम पंजाब को देश का पहला राज्य बना सकता है, जहां मध्यम वर्ग को इतना व्यापक खाद्य सब्सिडी मिले। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी जुमला बताया, लेकिन आम आदमी पार्टी इसे सामाजिक न्याय की जीत मान रही है।






