
गर्मी की दस्तक ने रसोई के बजट को हिला दिया है। मार्च 2026 में ही नींबू के दाम ₹200 प्रति किलो के पार पहुंच चुके हैं, जबकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि मई तक यह ₹300 तक जा सकता है। बढ़ती मांग, कम उत्पादन और परिवहन खर्च इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। आम आदमी से लेकर रोजेदारों तक सब परेशान हैं, क्योंकि शिकंजी, सलाद और इफ्तार का अहम हिस्सा अब ‘लग्जरी’ बन गया है।
दामों में उछाल के प्रमुख कारण
गर्मी बढ़ते ही नींबू की डिमांड कई गुना उछल जाती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन ने फसल को प्रभावित किया है। किसानों के मुताबिक, जनवरी-फरवरी में कुओं और बोरवेलों का सूखना पेड़ों को कमजोर कर 50-60% पैदावार घटा दिया। बेमौसम बारिश, हीटवेव और कम आपूर्ति ने बाजार को तंग कर दिया। थोक व्यापारियों का कहना है कि गुजरात और आंध्र प्रदेश की मंडियों में आवक 20% बढ़ी भी है, लेकिन रिटेल में ट्रांसपोर्ट लागत जोड़ने से भाव आसमान छू रहे। जनवरी में ₹100/किलो के आसपास रहे दाम अब दोगुने से ज्यादा हो चुके।
राजस्थान के करौली और सीकर जैसे क्षेत्रों में सूखा प्रमुख समस्या है। व्यापारी लवकुश सैनी ने बताया, “अचार सीजन में भी ₹100 था, अब रमजान-गर्मी से मांग चरम पर है।” विशेषज्ञों के अनुसार, डीजल-पेट्रोल महंगाई ने परिवहन को महंगा कर दिया, जो थोक से रिटेल तक 20-30% मार्जिन बढ़ा रहा है।
मंडी भाव: एक नजर
विभिन्न मंडियों के ताजा भाव इस प्रकार हैं:
| मंडी/क्षेत्र | थोक भाव (₹/किलो) | खुदरा भाव (₹/किलो) |
|---|
| मंडी/क्षेत्र | थोक भाव (₹/किलो) | खुदरा भाव (₹/किलो) |
|---|---|---|
| बीड (महाराष्ट्र) | 5-7 | 7-10 |
| एनसीआर/नोएडा | 150-180 | 200-250 |
| करौली (राजस्थान) | 160-180 | 200-220 |
| सीकर (राजस्थान) | 160 | 200 |
| तेनाली APMC (AP) | 90-112 | 200-250 |
| अहमदाबाद | 50-100 | 200-250 |
| जोधपुर/भोपालगढ़ | – | 200 |
ये भाव 10-17 मार्च 2026 के हैं। अगले हफ्तों में नई फसल न आने तक राहत मुश्किल।
उपभोक्ताओं पर गहरा असर
रमजान के पवित्र महीने में इफ्तार के शरबत और सलाद से नींबू गायब होता नजर आ रहा। रोजेदारों का कहना है, “पहले रोजाना इस्तेमाल होता था, अब बजट बिगड़ गया।” गृहिणियां शिकंजी छोड़ अन्य विकल्प तलाश रही हैं। छोटे व्यापारी और स्ट्रीट वेंडर भी प्रभावित, क्योंकि ₹1250 के 5 किलो नींबू अब ₹2500 तक बिक रहे। मेरठ जैसे उत्तर प्रदेश शहरों में भी यही हाल, जहां गर्मी से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ा है।
भविष्य की चुनौतियां व उपाय
व्यापारियों का मानना है कि अप्रैल-मई में तापमान 41°C पार करने पर दाम ₹300/किलो तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, गुंटूर और जमालपुर मंडियों से नई सप्लाई राहत दे सकती है। सरकार को जल संरक्षण और किसान सहायता पर ध्यान देना चाहिए। उपभोक्ताओं को सलाह: समय रहते स्टॉक करें, सस्ते विकल्प जैसे छाछ अपनाएं। यह महंगाई एक बार फिर बता रही है कि जलवायु परिवर्तन और बाजार असंतुलन कैसे आम जेब काट रहे। नई फसल तक धैर्य ही एकमात्र सहारा।









