
पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। भारत के पड़ोसी श्रीलंका इस संकट की सबसे बड़ी मार झेल रहा है, जहां ईंधन की भारी किल्लत ने सरकार को कड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। सोमवार को राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसनायके की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद देश में फोर-डे वर्किंग वीक लागू कर दिया गया है। अब हर बुधवार सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी रहेगी, ताकि सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम हो और सीमित ईंधन भंडार लंबे समय तक चलें।
पश्चिम एशिया युद्ध का सीधा असर
मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ते तनाव ने तेल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। श्रीलंका जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह संकट घातक साबित हो रहा है। आवश्यक सेवाओं के आयुक्त जनरल प्रभाथ चंद्रकीर्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह फैसला ईंधन संरक्षण के लिए अस्थायी लेकिन अनिवार्य है। 18 मार्च से बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।” यह कदम 2022 के आर्थिक संकट की याद दिलाता है, जब देश को IMF से राहत मिली थी। लेकिन अब युद्धभय ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
वैश्विक स्तर पर तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, और श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार सीमित हैं। अधिकारियों के मुताबिक, लाखों लीटर ईंधन की बचत होगी, जो स्कूल वैन, सरकारी गाड़ियों और दैनिक परिवहन में खर्च होता। निजी क्षेत्र से भी अपील की गई है कि वे वर्क फ्रॉम होम या समान कटौती अपनाएं।
कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित?
नया नियम मुख्य रूप से शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों पर लागू होगा। स्कूल, विश्वविद्यालय और अदालतें बंद रहेंगी, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह, जल आपूर्ति, बिजली और सीमा शुल्क विभाग अपवाद हैं। इनमें काम सामान्य चलेगा, ताकि जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। संस्था प्रमुखों को चार कामकाजी दिनों में कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर बुलाने का अधिकार दिया गया है।
शिक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। अभिभावक चिंतित हैं कि पढ़ाई का लय टूटेगा, जबकि कर्मचारियों को तीन दिवसीय वीकेंड से राहत मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह मॉडल उत्पादकता बनाए रखते हुए ईंधन बचाएगा।
डिजिटल राशनिंग से कालाबाजारी पर लगाम
ईंधन वितरण को नियंत्रित करने के लिए डिजिटल राशनिंग प्रणाली शुरू हो गई है। हर वाहन मालिक को QR कोड जारी किया जाएगा, जो टू-व्हीलर, कार या बस के आधार पर साप्ताहिक कोटा तय करेगा। इससे पेट्रोल पंपों पर कतारें कम होंगी और कालाबाजारी रुकेगी। यह तकनीक 2022 संकट के सबक से प्रेरित है।
भारत के लिए सबक?
श्रीलंका का यह कदम भारत के नए श्रम कोड्स से अलग है, जहां 1 अप्रैल 2026 से लचीला 4-दिन विकल्प वैकल्पिक है। लेकिन पड़ोसी के संकट से भारत को भी सतर्क रहना होगा। पश्चिम एशिया युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिससे दक्षिण एशिया में ईंधन महंगा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी रिफाइनरी क्षमता बढ़ानी चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया और भविष्य
कर्मचारी उत्साहित हैं, लेकिन छात्र परेशान। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि क्या यह स्थायी मॉडल बने? सरकार ने स्पष्ट किया कि उपाय स्थिति सुधरने तक रहेगा। वैश्विक बाजार में तनाव कम होने पर सामान्यीकरण संभव है। श्रीलंका की यह रणनीति दुनिया के लिए ईंधन संकट से निपटने का नया उदाहरण बन सकती है।









