
उत्तर प्रदेश में तेज होती गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप ने शहरी विकास की परिभाषा ही बदलने का वक्त ला दिया है। योगी सरकार के निर्देश पर तैयार हो रहे सिटी हीट एक्शन प्लान (सीएचएपी) के तहत अब मकान निर्माण के साथ पौधरोपण अनिवार्य हो गया है। आगरा डेवलपमेंट अथॉरिटी (एडीए) और अलीगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (एडीए) ने भवन नक्शा पास कराने की नई शर्तें लागू की हैं, जिसमें भूखंड के आकार के आधार पर पौधे लगाना जरूरी है। यह कदम शहरी तापमान को नियंत्रित करने और ग्रीन कवर बढ़ाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
सिटी हीट एक्शन प्लान
प्रदेश सरकार ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को देखते हुए 11 शहरों- गोरखपुर, अलीगढ़, बरेली, फिरोजाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मथुरा समेत अन्य – में सीएचएपी लागू करने का फैसला लिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के मार्गदर्शन में 18 विभाग मिलकर अल्पकालीन, मध्यकालीन व दीर्घकालीन रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। 20 मार्च 2026 तक सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। एडीए ने प्रस्ताव में आवासीय भूखंडों पर पौधे लगाने का सख्त प्रावधान किया है- 200 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर 1 पौधा, 200-300 वर्ग मीटर पर 2, 301-500 पर 4 और 500 से अधिक पर कम से कम 5 पौधे। हर अतिरिक्त 100 वर्ग मीटर पर एक और पौधा जोड़ा जाएगा।
औद्योगिक भूखंडों में प्रति 80 वर्ग मीटर पर एक पौधा, जबकि वाणिज्यिक में प्रति 100 वर्ग मीटर पर अनिवार्य। पार्कों, खेल मैदानों व खुले क्षेत्रों में 20% हरियाली सुरक्षित रहेगी, प्रति हेक्टेयर 125 पौधे लगेंगे। नक्शा स्वीकृति के लिए फोटो, जीपीएस लोकेशन और रखरखाव का शपथ पत्र जमा करना पड़ेगा। निर्माण पूरा होने पर ही आधिपत्य प्रमाण पत्र मिलेगा।
सोलर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग
बड़े प्लॉट्स (500 वर्ग मीटर से अधिक) पर सोलर पैनल अनिवार्य होंगे। होटल, लॉज व अपार्टमेंट्स में सोलर वॉटर हीटिंग सिस्टम लगेगा। 300 वर्ग मीटर से ऊपर के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग जरूरी, जो भूजल स्तर बनाए रखेगा। 10 एकड़ से बड़े आवासीय लेआउट में 1% क्षेत्र पर जलाशय बनेंगे। कूल रूफ, ग्रीन रूफ व कूलिंग शेड्स को बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम सड़क किनारे हरित पट्टियां विकसित करेगा, पंचायती राज विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण करेगा।
चुनौतियां और प्रभाव
आगरा में 2024 में 48.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ, जो शहरी हीट आइलैंड प्रभाव से और खतरनाक था। स्लम क्षेत्र सबसे प्रभावित। यह प्लान स्वास्थ्य जोखिम कम करने, जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। हालांकि, कार्यान्वयन में देरी की आशंका है- जैसे एनजीटी ने आगरा के प्रदूषण प्लान पर नाराजगी जताई। बिलासपुर जैसे शहरों में पुराने नियमों का उल्लंघन देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संस्थानों की मदद से निगरानी मजबूत हो।
सचेत ऐप: समय पर चेतावनी
लू से बचाव के लिए ‘सचेत’ ऐप और इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग पोर्टल से मौसम अलर्ट सीधे लोगों तक पहुंचेंगे। प्रशिक्षण सत्र भी होंगे। बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश जारी। यह प्लान न सिर्फ गर्मी से जंग है, बल्कि सतत विकास की नई मिसाल। यदि सख्ती बरती गई, तो शहर हरे-भरे बनकर तापमान 2-3 डिग्री कम कर सकेंगे।









