
पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के क्षेत्र में भारत एक नया इतिहास रचने जा रहा है। ‘नमो ग्रीन रेल’ के नाम से मशहूर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सोमवार को जींद से सोनीपत के बीच ट्रायल रन के लिए रवाना हुई। यह ट्रेन डीजल या बिजली पर निर्भर नहीं है, बल्कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलती है, जो केवल पानी का वाष्प और गर्मी उत्सर्जित करती है। शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली इस ट्रेन के संचालन से भारतीय रेलवे डीजल इंजनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
ट्रायल के तहत आगामी दिनों में यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाएगी। 89 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर वर्तमान डीएमयू ट्रेनें 2 घंटे लेती हैं, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन 110-140 किमी/घंटा की रफ्तार से सफर को 1 घंटे से कम में पूरा करेगी। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित इस ट्रेन की क्षमता 2,638 यात्रियों की है, जिसमें 1,200 हॉर्सपावर का इंजन फिट है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, रविवार को रन की योजना थी, लेकिन इंजन में हाइड्रोजन गैस न भर पाने से इसे टाल दिया गया। अब पूरी सतर्कता के साथ सोमवार का ट्रायल सफल रहा।
विस्तृत ट्रायल इतिहास और चुनौतियां
पिछले महीनों में रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की लखनऊ टीम ने 25 से 28 फरवरी तक जींद-सोनीपत रूट पर रनिंग ट्रायल किया। पहले दिन 25 फरवरी को सुबह 8:25 बजे ट्रेन सोनीपत की ओर रवाना हुई। पांडू पिंडारा तक डीजल इंजन से ले जाया गया, फिर ललित खेड़ा तक हाइड्रोजन मोड में 60-70 किमी/घंटा स्पीड से दो चक्कर लगाए। गोहाना से मुहाना तक वापसी डीजल पर हुई। दूसरे दिन 26 फरवरी को जींद-सोनीपत जाते समय 60 किमी/घंटा, वापसी में 85 किमी/घंटा रफ्तार रही। 27 फरवरी को बिना पानी कैन के ट्रायल किया गया, जबकि 28 को सभी टेस्ट पूरे कर RDSO टीम लौट गई।
ट्रेन को मेंटेनेंस के लिए दिल्ली के शकूरबस्ती कोचिंग डिपो भेजा गया था, जहां से शनिवार को यह जींद लौटी। जर्मनी की टीयूवी-एसयूडी ने थर्ड पार्टी सिक्योरिटी ऑडिट किया, ताकि सुरक्षा मानक सुनिश्चित हों। स्पेनिश कंपनी ग्रीन H2 और RDSO के सहयोग से विकसित यह प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया का प्रतीक है। ट्रेन की लागत 89-120 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईंधन व्यवस्था और तकनीकी खासियतें
जींद में 1 मेगावाट PEM इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट रोज 430 किलो हाइड्रोजन उत्पादित करेगा। 3,000 किलो स्टोरेज, कंप्रेसर और दो डिस्पेंसर से तेज रिफ्यूलिंग संभव होगी। यह तकनीक जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद भारत को दुनिया का पांचवां देश बनाती है। वित्त वर्ष 2023-24 में 2,800 करोड़ के बजट से 35 ऐसी ट्रेनें चलाने की योजना है।
रेलवे उद्घाटन से पहले ट्रायल पर जोर दे रहा है। स्टेशनों में गोहाना, पांडू पिंडारा, भंभेवा, मोहाना आदि शामिल हैं। इससे यात्रियों को तेज, सस्ता और प्रदूषण-मुक्त सफर मिलेगा। हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने पीएम मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की मिसाल है।









