
संसद के उच्च सदन राज्यसभा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर अहम चर्चा हुई। वरिष्ठ शिक्षकों पर टीईटी पास करने की अनिवार्यता से बढ़ रहे दबाव का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। भाजपा सांसद धनंजय भीमराव महादिक ने मांग की कि 20-25 साल से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट दी जाए।
टीईटी परीक्षा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है, लेकिन लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए यह बोझ बन गया है। महादिक ने कहा कि दशकों पुरानी सेवा वाले शिक्षक अब परीक्षा की चिंता में जुटे हैं, जबकि उनका अनुभव ही उनकी योग्यता है। उन्होंने सदन में जोर देकर कहा कि यह नियम अनावश्यक मानसिक तनाव पैदा कर रहा है।
अनुभवी शिक्षकों पर बढ़ रहा मानसिक दबाव
सांसद ने स्पष्ट किया कि 20-25 वर्ष सेवा पूरी कर चुके लाखों शिक्षक नौकरी की असुरक्षा से जूझ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले ने स्थिति और जटिल कर दी, जिसमें प्रमोशन और सेवानिवृत्ति के लिए भी टीईटी जरूरी ठहराया गया। इससे पुराने शिक्षकों में भय का माहौल है। महादिक ने सरकार से विशेष प्रावधान बनाने की अपील की, ताकि अनुभव को मान्यता मिले। केंद्र ने राज्यों से 2011 पूर्व नियुक्त शिक्षकों का डेटा मांगा है, जिसमें यूपी के 1.86 लाख, एमपी के 3 लाख शामिल हैं।
संसद में पहले भी उठ चुका विवाद
राज्यसभा में यह पहली बार नहीं है। दिसंबर 2025 में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी और भाजपा की सीमा द्विवेदी ने भी टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग की। लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट फैसले पर हंगामा हुआ। शिक्षक संगठन जैसे सर्व शिक्षक संघ संसद घेराव की योजना बना रहे हैं। एमपी, छत्तीसगढ़ में ज्ञापन सौंपे गए। कोर्ट ने 5 साल से कम सेवा वालों को छूट दी, लेकिन प्रमोशन पर अड़िग रहा।
केंद्र सरकार का संभावित कदम
शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से रिपोर्ट तलब की है। इससे 12 लाख शिक्षकों को राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीई एक्ट में संशोधन संभव है। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी और माया नारोलिया ने छावनी सुविधाओं व एमएसएमई चुनौतियों पर भी चर्चा की, लेकिन टीईटी मुद्दा प्रमुख रहा।
शिक्षकों की उम्मीदें और आगे की राह
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अनुभव परीक्षा से ऊपर है। यदि छूट मिली तो लाखों को मानसिक शांति मिलेगी। सरकार का फैसला जल्द अपेक्षित है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बिना अनुभवी शिक्षकों को हतोत्साहित किए। (शब्द संख्या: ५८२)









