
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने चीन की कथित सोलर पैनल साजिश को निशाना बनाते हुए एक बड़ा ट्रेड वॉर छेड़ दिया है। फरवरी 2026 में 126% काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने के बाद मार्च 2026 में यूएसटीआर ने ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 301 के तहत दो जांचें शुरू कीं। पहली 16 देशों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर, दूसरी 60 देशों पर जबरन श्रम से बनी वस्तुओं पर। भारत दोनों में नामित है, और जीटीआरआई रिपोर्ट के मुताबिक चीन का ‘सोलर ट्रैप’ अब भारतीय कंपनियों को लपेट रहा है।
ट्रंप का चीन पर सीधा धावा
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी बताने के बाद सेक्शन 122 से 10% अस्थायी टैरिफ लगाया। अब यूएसटीआर जांचों से लीवरेज बना रहा है, ताकि व्यापार वार्ताओं में दबाव डाले। जीटीआरआई के अनुसार, वाशिंगटन चीन की सब्सिडी वाली सप्लाई चेन को तोड़ना चाहता है, जिसमें भारत ट्रांसशिपमेंट हब बन गया। अदानी ग्रुप की मुंद्रा सोलर जैसी फर्में गैर-सहयोग के कारण मुख्य निशाना बनीं। यह सर्जिकल स्ट्राइक अमेरिकी सोलर उद्योग को बचाने का प्रयास है।
‘सोलर ट्रैप’ का जाल और भारत की निर्भरता
चीन सस्ते सोलर पैनल डंपिंग से वैश्विक बाजार हथिया रहा है, जिसे ट्रंप ‘ट्रैप’ कहते हैं। भारत सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल में चीनी पॉलीसिलिकॉन, सेल्स, केबल, यार्न व शिनजियांग कपास पर निर्भर है। शिनजियांग में जबरन श्रम के आरोप इन चेन पर लगे हैं। अमेरिका अब इनपुट्स की ट्रेसेबिलिटी मांगेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों पर कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ेगा। यूएस भारत का प्रमुख सोलर बाजार था (1.6 अरब डॉलर), लेकिन 126% ड्यूटी से निर्यात रुक सकता है। वारी एनर्जी, विक्रम सोलर जैसे शेयर 3-7% लुढ़के।
भारतीय कंपनियां रडार पर
अदानी के अलावा सोलेक्स, सात्विक ग्रीन व एमएसएमई निर्यातक प्रभावित। ITC जांच में भारत को चीन का हब बताया गया। जीटीआरआई चेताता है कि बॉन्डेड लेबर एक्ट 1976 से भारत बचा रहा, लेकिन चीनी इनपुट्स से फंस सकता है। घरेलू बाजार में चीन आयात 76% गिरा, लेकिन निर्यात झटका बड़ा। कंपनियों को वर्किंग कैपिटल की किल्लत हो रही है।
भारत पर व्यापक असर
सोलर निर्यात ठप होने से राजस्व हानि, लेकिन घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट। भारत ने खुद चीन सोलर सेल्स पर 23-30% एंटी-डंपिंग ड्यूटी सुझाई। पीएलआई स्कीम से क्षमता बढ़ रही; नमो भारत कॉरिडोर 60% सोलर पर चलेगा। चुनौतियां: ग्लोबल चेन बिगड़ेगी, लेकिन ईयू मार्केट्स का मौका। इलेक्ट्रॉनिक्स-टेक्सटाइल में भी ट्रेसिंग बोझ। लंबे समय में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
भारत की रणनीति
भारत को चीन निर्भरता कम करनी होगी – वियतनाम, ताइवान या घरेलू स्रोत अपनाएं। सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी मजबूत करें, अमेरिका को प्रमाण दें। मेक इन इंडिया व सोलर मिशन को गति दें। जीटीआरआई की घंटी साफ: चीन चेन से दूरी या यूएस बाजार खो दें। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ से ट्रेड वॉर तेज, लेकिन भारत सोलर हब बन सकता है। निर्यातक सतर्क हों, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।









