
घर बैठे अच्छा पैसा कमाने की चाहत रखने वालों के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक शानदार मौका खोला है। अब तक किसी सरकारी वेबसाइट को हैक करना अपराध माना जाता था, लेकिन UIDAI ने इसे पलट दिया है। एथिकल हैकर्स अब आधार के डिजिटल सिस्टम में कमियां ढूंढकर न केवल देश की साइबर सुरक्षा मजबूत कर सकते हैं, बल्कि भारी इनाम भी कमा सकते हैं। 11 मार्च 2026 को प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने घोषणा की कि UIDAI ने अपना पहला संरचित बग बाउंटी प्रोग्राम लॉन्च कर दिया है।
बग बाउंटी प्रोग्राम क्या है और कैसे काम करेगा?
यह प्रोग्राम साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को UIDAI के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कमजोरियां खोजने की चुनौती देता है। एथिकल हैकर्स इन सिस्टम्स को टेस्ट करेंगे और अगर वे वास्तविक सिक्योरिटी गैप्स ढूंढते हैं, तो जिम्मेदारी से रिपोर्ट करने पर इनाम मिलेगा। UIDAI का मानना है कि स्वतंत्र रिसर्चर्स वे छोटी-मोटी खामियां पकड़ सकते हैं, जो सामान्य ऑडिट में छूट जाती हैं।
यह पहल आधार इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई है, जहां 140 करोड़ से ज्यादा आधार कार्ड धारकों का डेटा सुरक्षित रहना जरूरी है। प्रोग्राम को मैनेज करने के लिए UIDAI ने साइबर सिक्योरिटी फर्म ComOlho IT Private Limited के साथ पार्टनरशिप की है।
किन प्लेटफॉर्म्स पर होगी टेस्टिंग?
चुनिंदा एक्सपर्ट्स निम्नलिखित UIDAI डिजिटल एसेट्स की जांच करेंगे:
- UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट (uidai.gov.in)
- myAadhaar पोर्टल
- Secure QR Code एप्लीकेशन
ये प्लेटफॉर्म करोड़ों यूजर्स के e-KYC, अपडेट और डाउनलोड के लिए महत्वपूर्ण हैं। टेस्टिंग में Critical, High, Medium और Low रिस्क कैटेगरी की वल्नरेबिलिटीज ढूंढनी होंगी। उदाहरणस्वरूप, Critical गैप जैसे डेटा लीक या अनऑथराइज्ड एक्सेस हो सकता है, जबकि Low सामान्य कोडिंग इश्यू।
इनाम की राशि कैसे तय होगी?
रिपोर्ट के अनुसार, इनाम खोजी गई कमजोरी की गंभीरता पर निर्भर करेगा। चार श्रेणियां हैं:
- Critical: सबसे ज्यादा रिवॉर्ड, जैसे लाखों रुपये (विवरण UIDAI सर्कुलर में)
- High: महत्वपूर्ण गैप्स के लिए आकर्षक रकम
- Medium: मध्यम जोखिम पर संतोषजनक इनाम
- Low: छोटी कमियों पर भी प्रोत्साहन राशि
सटीक अमाउंट UIDAI द्वारा तय किया जाएगा, लेकिन वैश्विक स्टैंडर्ड्स के मुताबिक Critical के लिए 10 लाख तक हो सकता है। यह प्रोग्राम UIDAI की निरंतर सुरक्षा अपग्रेड की मिसाल है।
क्या आम लोग भी शामिल हो सकते हैं?
खास बात: यह प्रोग्राम फिलहाल आम जनता के लिए नहीं खुला। UIDAI ने शुरुआती चरण के लिए देश के 20 अनुभवी सिक्योरिटी रिसर्चर्स और एथिकल हैकर्स का पैनल चुना है। चयन उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड, साइबर एक्सपीरियंस और योग्यता पर आधारित है। भविष्य में इसे विस्तार मिल सकता है, लेकिन अभी प्रोफेशनल्स तक सीमित।
नियम-शर्तें: सख्त अनुशासन जरूरी
भाग लेने वालों को ये नियम मानने होंगे:
- खामियां सीधे UIDAI या ComOlho को रिपोर्ट करें, कहीं और नहीं।
- सार्वजनिक डिस्क्लोजर या गलत इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई।
- केवल अनुमत प्लेटफॉर्म्स पर टेस्टिंग।
- कोई अवैध एक्सेस या डेटा चोरी नहीं।
यह प्रोग्राम IT एक्ट के तहत सुरक्षित रखा गया है, ताकि एथिकल रिसर्च को कानूनी संरक्षण मिले। UIDAI के सीईओ ने कहा, “यह पहल आधार को फ्यूचर-रेडी बनाएगी।” सोशल मीडिया पर वायरल “घर बैठे लाखों जीतो” अफवाहों से सावधान रहें- यह फ्रॉड हो सकता है। असली जानकारी uidai.gov.in से लें।









