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दुनिया का सबसे कठिन ड्राइविंग टेस्ट! यहां छोटी सी चूक और लाइसेंस का सपना खत्म, जानें नियम

लाइसेंस पाना पहाड़ तोड़ने जैसा। ऑटोस्कोला में 30 घंटे थ्योरी + 35 घंटे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, सिर्फ 3 गलतियां की छूट। उसके बाद मेडिकल-साइको टेस्ट। 90 हजार का खर्च! फिनलैंड-जर्मनी भी सख्त, लेकिन क्रोएशिया टॉप पर। सड़क सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत जरूरी।

By Pinki Negi

दुनिया का सबसे कठिन ड्राइविंग टेस्ट! यहां छोटी सी चूक और लाइसेंस का सपना खत्म, जानें नियम

दुनिया भर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना एक रूटीन प्रक्रिया माना जाता है, जहां थोड़ी सी ट्रेनिंग और टेस्ट के बाद लोग सड़कों पर अपनी गाड़ी दौड़ा लेते हैं। लेकिन कुछ देश ऐसे हैं जहां यह सपना पूरा करना बेहद मुश्किल हो जाता है। फिनलैंड, जर्मनी, सिंगापुर, चीन और क्रोएशिया जैसे देशों में सख्त नियमों की वजह से छोटी सी चूक लाइसेंस का सफर हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।

इन देशों में न सिर्फ घंटों की ट्रेनिंग जरूरी है, बल्कि थ्योरी, प्रैक्टिकल, मेडिकल और यहां तक कि साइकोलॉजिकल टेस्ट भी पास करने पड़ते हैं। खासकर क्रोएशिया को दुनिया का सबसे कठिन ड्राइविंग टेस्ट वाला देश माना जाता है, जहां पूरी प्रक्रिया पहाड़ तोड़ने जितनी जटिल है।

क्रोएशिया: ऑटोस्कोला से शुरू होती है चुनौती

क्रोएशिया में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सीधे टेस्ट नहीं देते। सबसे पहले उम्मीदवार को ऑथराइज्ड ‘ऑटोस्कोला’ ड्राइविंग स्कूल में एडमिशन लेना अनिवार्य है। यह कोई आधिकारिक परीक्षा नहीं, बल्कि व्यापक ट्रेनिंग कोर्स है जो टेस्ट से पहले पूरा करना पड़ता है। स्कूल में एडमिशन के बाद उम्मीदवार को ट्रैफिक नियमों, रोड सेफ्टी और ड्राइवर की कानूनी जिम्मेदारियों पर गहन ज्ञान दिया जाता है। यह ट्रेनिंग बिना पूरी किए आगे बढ़ना असंभव है, जो प्रक्रिया को और लंबा खींच देती है।

थ्योरी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का कठिन कोर्स

ऑटोस्कोला में कम से कम 30 घंटे के थियोरेटिकल क्लासरूम लेसन अनिवार्य हैं। यहां ट्रैफिक रूल्स से लेकर आपातकालीन स्थितियों तक सब सिखाया जाता है। इसके साथ ही 35 घंटे की प्रैक्टिकल ड्राइविंग ट्रेनिंग भी पूरी करनी पड़ती है, जिसमें विभिन्न सड़कों, मौसम और ट्रैफिक पर काबू पाना सिखाया जाता है। प्रैक्टिकल टेस्ट बेहद सख्त होता है – उम्मीदवार को सिर्फ तीन छोटी गलतियां करने की छूट है। चौथी गलती होते ही फेल! यह टेस्ट शहर की तंग गलियों से लेकर हाईवे तक कवर करता है, जहां जरा सी लापरवाही महंगी पड़ जाती है।

मेडिकल और साइकोलॉजिकल जांच की अतिरिक्त परत

ड्राइविंग टेस्ट पास करने के बाद भी राहत नहीं मिलती। क्रोएशिया में मेडिकल और साइकोलॉजिकल असेसमेंट पास करना जरूरी है। डॉक्टर शारीरिक फिटनेस जांचते हैं, जबकि साइकोलॉजिस्ट मानसिक स्वास्थ्य, रिएक्शन टाइम और स्ट्रेस हैंडलिंग का टेस्ट लेते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि ड्राइवर न सिर्फ कुशल हो, बल्कि मानसिक रूप से सड़क पर सुरक्षित रहे। पूरी प्रक्रिया में लगभग 90 हजार रुपये (लगभग 1000 यूरो) का खर्च आता है, जो कुछ महीने तक चल सकती है।

अन्य देशों की सख्ती से तुलना

क्रोएशिया के अलावा फिनलैंड में 100 सवालों का थ्योरी टेस्ट सिर्फ 5% गलती की अनुमति देता है, साथ ही आइस रोड पर ड्राइविंग टेस्ट होता है। जर्मनी में 14 क्लासेस, फर्स्ट एड और एथिक्स ट्रेनिंग के बाद 30 सवालों का टेस्ट (10% गलती तक) और 50% से ज्यादा फेल रेट है। सिंगापुर में प्रैक्टिकल सर्किट-रोड टेस्ट में 70% पहली बार फेल हो जाते हैं, जबकि चीन के 1000+ थ्योरी सवाल दिमाग घुमा देते हैं। नॉर्वे में बर्फीले तूफान और रात के टेस्ट आम हैं। इन देशों में फेल होने पर दोबारा पूरी ट्रेनिंग दोहरानी पड़ती है।

क्यों इतनी सख्ती? सड़क सुरक्षा का मकसद

ये देश सड़क हादसों को कम करने के लिए ऐसी कठिनाई अपनाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सख्त लाइसेंसिंग से दुर्घटनाएं 30-40% तक घट सकती हैं। भारत जैसे देशों में जहां लाइसेंस आसानी से मिल जाता है, वहां हादसे ज्यादा होते हैं। क्रोएशिया का मॉडल अन्य देशों के लिए प्रेरणा है, जो सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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