
देशभर में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव आ चुका है। मार्च 2026 से एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय OTP (वन टाइम पासवर्ड) या DAC (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) अनिवार्य हो गया है। तेल विपणन कंपनियों ने फर्जी डिलीवरी, कालाबाजारी और बिचौलियों की मनमानी रोकने के लिए यह डिजिटल सिस्टम लागू किया है। बिना OTP बताए अब सिलेंडर नहीं मिलेगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है।
OTP सिस्टम का उद्देश्य और महत्व
गैस सिलेंडर बुकिंग के बाद उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल पर 4-अंकों का OTP भेजा जाता है। डिलीवरी बॉय हैंडहेल्ड डिवाइस में इसे दर्ज करता है, मिलान होने पर ही डिलीवरी कन्फर्म होती है। इसका मुख्य लक्ष्य सही ग्राहक को सिलेंडर पहुंचाना और डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है। पहले शिकायतें आती थीं कि डिलीवरी कागजों में दिखा दी जाती, लेकिन सिलेंडर नहीं पहुंचता। OTP से धोखाधड़ी की संभावना 80% तक कम हो गई है, खासकर सब्सिडी वाले सिलेंडरों के मामले में।
यह सिस्टम 2020 से आंशिक रूप से चल रहा था, लेकिन अब 80% डिलीवरी पर सख्ती है। सही पते पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है और ऑडिट आसान हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पारदर्शिता बढ़ी है, हालांकि नेटवर्क समस्याओं ने शुरुआत में परेशानी पैदा की।
OTP न बताने पर क्या होता है?
अगर ग्राहक OTP देने से मना कर दे या भूल जाए, तो डिलीवरी अधूरी मानी जाती है। सिलेंडर वापस एजेंसी ले जाया जाता है, लेकिन बुकिंग कैंसल नहीं होती। अगली कोशिश में दोबारा OTP आएगा। इससे एजेंसी का स्टॉक रिकॉर्ड अपडेट न होने से नया स्टॉक रुक सकता है, जिससे बाजार में कमी की आशंका है। बिहार और यूपी जैसे राज्यों में पहले ही FIR दर्ज हो चुकी हैं, जहां डिलीवरी बॉय ने नियम तोड़े।
विशेष मामलों में, जैसे फोन बंद होना या नंबर अपडेट न होना, डिलीवरी बॉय ऐप से नंबर सुधार सकता है या 2-3 घंटे बाद OTP ले सकता है। लेकिन सामान्यतः बिना OTP कोई छूट नहीं। इंडियन ऑयल ने तकनीकी कारणों से कुछ जगहों पर अस्थायी छूट दी, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।
उपभोक्ताओं की चुनौतियां और सलाह
कई उपभोक्ता चिंतित हैं कि पुराना मोबाइल नंबर या नेटवर्क इश्यू से परेशानी होगी। लखनऊ जैसे शहरों में डिलीवरी मैसेज आने के बावजूद सिलेंडर न पहुंचने की शिकायतें बढ़ी हैं। दिल्ली में OTP के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर ठगी की घटनाएं भी सामने आईं। ग्राहकों को केवल डिलीवरी बॉय को ही OTP बताना चाहिए, किसी और को नहीं।
सलाह:
- मायजियो, मोज या बीपीसीएल ऐप से मोबाइल नंबर चेक करें।
- बुकिंग से पहले नेटवर्क सुनिश्चित करें।
- समस्या पर एजेंसी से तुरंत संपर्क करें।
भविष्य की संभावनाएं
तेल मंत्रालय का 80% डिजिटल वितरण लक्ष्य कालाबाजारी रोकेगा, लेकिन एजेंसियों के लिए चुनौती है। 25 दिनों की बुकिंग लिमिट और विजिलेंस यूनिट से स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा। कुल मिलाकर, यह डिजिटल इंडिया का हिस्सा है जो उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाता है। हालांकि, ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे आधार सत्यापन की जरूरत है।









