
अगर आपको लगता है कि इस साल की गर्मी पिछले साल से कम होगी, तो यह भ्रम है। मार्च का महीना समाप्त होने से पहले ही सूरज की तपिश ने कई राज्यों में पारा 40 डिग्री पार कर दिया है। विश्व मौसम संगठन (WMO) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा चेतावनी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है।
2026 को इतिहास का सबसे गर्म साल बनने का खतरा मंडरा रहा है, और इसके पीछे प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा ‘सुपर अल-नीनो’ जिम्मेदार है। 13 मार्च को जारी रिपोर्ट के अनुसार, जून से यह मौसमी घटना सक्रिय हो सकती है, जो गर्मी, लू और सूखे का प्रचंड रूप लाएगी। किसानों से लेकर शहरी निवासियों तक, सभी की जिंदगी प्रभावित होगी।
‘सुपर अल-नीनो’ की भयावहता क्या है?
सामान्य अल-नीनो प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक रहने वाली स्थिति है, जो वैश्विक मौसम को बाधित करती है। लेकिन ‘सुपर अल-नीनो’ तब होता है जब यह वृद्धि 2-2.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है, जैसा 1982-83 और 1997-98 में देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (BoM) के अनुसार, जून-अगस्त 2026 में अल-नीनो की संभावना 62% है, जो सितंबर तक 80% हो सकती है। इससे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में तापमान 48-50 डिग्री सेल्सियस छू सकता है। ग्लोबल वार्मिंग ने इस खतरे को दोगुना कर दिया है, क्योंकि पृथ्वी का औसत तापमान पहले से ही ऊंचा है।
भारत पर संभावित प्रभाव
इस सुपर अल-नीनो से मार्च-अप्रैल से ही लू की लहरें शुरू हो सकती हैं। दिल्ली, UP, बिहार जैसे राज्यों में ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव से रातें भी गर्म रहेंगी। IMD के पूर्वानुमानों के मुताबिक, गर्मी के दिन 20-30% बढ़ सकते हैं। मानसून पर सबसे बड़ा असर पड़ेगा- पिछले अल-नीनो वर्षों (जैसे 2023) में 10-15% कम बारिश हुई थी, जिससे खरीफ फसलें बर्बाद हुईं। धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। नतीजा? खाद्यान्न महंगाई, ग्रामीण आय में कमी और जल संकट।
जलाशयों का स्तर गिरेगा, बिजली मांग रिकॉर्ड 20% बढ़ सकती है। स्वास्थ्य जोखिम भी चरम पर – लू से हर साल 2000 से अधिक मौतें होती हैं, जो अब दोगुनी हो सकती हैं। ECMWF मॉडल ने चेताया है कि पॉजिटिव IOD (भारतीय महासागर डायपोल) कुछ राहत दे सकता है, लेकिन मई तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।
वैज्ञानिक चिंतित, सरकार की नींद उड़ी
वैज्ञानिक परेशान हैं क्योंकि जलवायु परिवर्तन ने अल-नीनो को ‘सुपर’ बना दिया है। WMO की रिपोर्ट कहती है कि 2026 वैश्विक तापमान रिकॉर्ड तोड़ेगा। भारत में NDTV और नवभारत टाइम्स जैसी रिपोर्ट्स ने किसान संगठनों को सतर्क कर दिया है। सरकार को अभी से हीट एक्शन प्लान सक्रिय करने की सलाह दी जा रही है। NDMA ने राज्यों को अलर्ट जारी किया है।
तैयारी के उपाय
- किसानों के लिए: ड्रिप इरिगेशन अपनाएं, छोटी अवधि वाली फसलें लगाएं। सरकारी योजनाएं जैसे PMFBY का लाभ लें।
- शहरी निवासी: पानी बचाएं, दोपहर 12-4 बजे बाहर न निकलें। AC की बजाय पंखे और छायादार जगहें इस्तेमाल करें।
- सरकार: जल संरक्षण, बिजली ग्रिड मजबूत करें। मौसम ऐप्स पर नजर रखें।
यह सुपर अल-नीनो केवल मौसम का संकट नहीं, बल्कि आर्थिक और स्वास्थ्य आपदा है। समय रहते तैयारी से नुकसान कम किया जा सकता है। क्या हम तैयार हैं? सवाल वही है।









