
देश की जीवनरेखा कही जाने वाली भारतीय रेलवे आम आदमी के लिए सस्ती यात्रा का प्रतीक बनी हुई है। संसद में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा खुलासा किया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में यात्रियों के टिकटों पर कुल 60,239 करोड़ रुपये की मोटी सब्सिडी दी गई। अगर किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपये है, तो यात्री से औसतन सिर्फ 57 रुपये ही वसूले जाते हैं। बाकी 43 रुपये सीधे सरकार की जेब से आते हैं, जो 43 प्रतिशत की भारी छूट का एहसास कराता है।
यह आंकड़ा लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में सामने आया। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सब्सिडी हर यात्री को मिलती है, चाहे वह सामान्य श्रेणी का हो या प्रीमियम ट्रेन का। रेलवे की आमदनी का बड़ा हिस्सा माल ढुलाई से आता है, जो पैसेंजर सेवाओं की लागत को पूरा करने में सहायक होता है। लेकिन सरकार अतिरिक्त बोझ उठाकर यात्रा को किफायती बनाए रखती है। पिछले वर्षों में यह सब्सिडी 55-46 प्रतिशत के बीच रही, मगर 2024-25 में 43 प्रतिशत पर स्थिर हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति गरीब और मध्यम वर्ग को जोड़ने का मजबूत जरिया है।
विशेष श्रेणियों को अतिरिक्त रियायतें
सामान्य सब्सिडी के अलावा, रेलवे कुछ कमजोर वर्गों को खास छूट देती है। चार श्रेणियों के दिव्यांगजनों, 11 प्रकार के गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों और आठ श्रेणियों के छात्रों को टिकट में अलग से छूट मिलती है। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए निचली बर्थ की विशेष व्यवस्था है। स्लीपर तथा एसी कोचों में कुछ बर्थ इन्हीं के लिए आरक्षित रखी जाती हैं। टिकट पर मूल किराया, आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट चार्ज और जीएसटी सब पारदर्शी तरीके से दिखाया जाता है। मंत्रालय स्पष्ट करता है कि किराया कोई व्यापारिक रहस्य नहीं, बल्कि पूरी तरह सार्वजनिक है।
रेल किराया तय करने में कई कारक काम करते हैं। सेवा की वास्तविक लागत, हवाई जहाज या बस जैसे अन्य साधनों से प्रतिस्पर्धा और आम लोगों की चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। इससे रेलवे न केवल सस्ती रहती है, बल्कि 80 लाख दैनिक यात्रियों को सुविधा भी देती है। हाल ही में पैसेंजर ट्रेनों में 50 प्रतिशत किराया कटौती की खबरें भी आईं, जो दैनिक कम्यूटर्स को राहत पहुंचा रही हैं।
वंदे भारत का किराया मॉडल
आधुनिक वंदे भारत ट्रेनों का किराया भी किलोमीटर आधारित है। तीसरी एसी श्रेणी में प्रति किलोमीटर 2.40 रुपये लगते हैं। उदाहरणस्वरूप, 1000 किलोमीटर की यात्रा पर बेस किराया लगभग 2400 रुपये होगा, जिस पर जीएसटी जुड़ेगा। यह मॉडल लागत रिकवरी और सुविधा का संतुलन बनाता है, मगर सब्सिडी का लाभ यहां भी पहुंचता है। सरकार ने 2024-25 में रेलवे के लिए 2.52 लाख करोड़ रुपये की सकल बजटीय सहायता दी, जो पूंजीगत व्यय को बढ़ावा दे रही है।
चुनौतियां और भविष्य
सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है, जो 60,000 करोड़ के पार पहुंच गया। माल ढुलाई राजस्व पर निर्भरता के बावजूद, ओवरलोडिंग और रखरखाव खर्च चुनौती हैं। फिर भी, अमृत भारत स्टेशन योजना से 1300 स्टेशन नवीनीकृत हो रहे हैं। भविष्य में वंदे भारत जैसी ट्रेनें बढ़ेंगी, जो सब्सिडी को टिकाऊ बनाएंगी। आम यात्री के लिए यह ‘सस्ता गणित’ जारी रहेगा, जो भारत की समावेशी विकास यात्रा का प्रतीक है।









