
नया वित्त वर्ष शुरू होने मात्र कुछ हफ्तों बाद 1 अप्रैल 2026 से भारत का टैक्स ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। सरकार ने दशकों पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ को अलविदा कहते हुए ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ को लागू करने का ऐलान किया है। यह नया कानून करीब 700 जटिल धाराओं को घटाकर मात्र 333 कर सरलीकृत कर रहा है, जिससे आईटीआर फाइलिंग डिजिटल और आसान हो जाएगी।
नौकरीपेशा, निवेशक और व्यापारी – सभी की जेब पर इन बदलावों का सीधा असर पड़ेगा। अगर समय रहते प्लानिंग न की, तो टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। आइए, स्किल्ड रिपोर्टर की नजर से समझें इन 7 प्रमुख बदलावों को विस्तार से।
शेयर बायबैक पर निवेशकों को नया टैक्स बोझ
सबसे बड़ा धमाका शेयर बायबैक नियमों में है। अभी कंपनियां खुद शेयर वापस खरीदने पर टैक्स देती थीं, लेकिन अब यह ‘कैपिटल गेन’ माना जाएगा। शेयरधारकों को अपनी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ेगा- 5% से 30% तक। मिडिल क्लास निवेशकों के लिए यह झटका है, क्योंकि छोटे मुनाफे पर भी टैक्स कटेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियां बायबैक कम करेंगी, लेकिन लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स को फायदा हो सकता है।
STT बढ़ा, ट्रेडर्स की लागत दोगुनी
शेयर बाजार के दीवानों के लिए बुरी खबर! फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाकर ऑप्शंस बिक्री पर 0.1% और फ्यूचर्स पर 0.02% कर दिया गया। रिटेल ट्रेडर्स, जो रोज ट्रेडिंग से कमाते हैं, उनकी लागत 20-30% तक बढ़ जाएगी। बाजार विश्लेषक मानते हैं कि इससे छोटे निवेशक बाहर हो सकते हैं, जबकि बड़े प्लेयर्स पर असर कम पड़ेगा। कुल मिलाकर, ट्रेडिंग मुनाफा घटेगा।
विदेश यात्रा पर TCS में बड़ी राहत
अच्छी खबर विदेश जाने वालों के लिए! लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा या मेडिकल के लिए ₹7 लाख से ज्यादा रकम भेजने पर TCS 5% से घटकर 2% हो गया। स्टूडेंट्स और मरीजों को अब विदेशी पढ़ाई या इलाज सस्ता पड़ेगा। हालांकि, अन्य खर्चों जैसे घूमने-फिरने पर पुरानी दरें लागू रहेंगी। यह बदलाव मिडिल क्लास परिवारों के लिए वरदान है।
TDS सरलीकरण से कैश फ्लो बढ़ेगा
TDS नियमों को आसान बनाया गया। केंद्र-राज्य बॉन्ड्स के ब्याज पर TDS पारदर्शी होगा, ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए दर 1% से 0.1% घटी। छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को अब ज्यादा नकदी हाथ में मिलेगी, जिससे बिजनेस ग्रोथ तेज होगी। नॉन-फाइलर्स पर हाई TDS का प्रावधान भी हटा, लेकिन आईटीआर समय पर फाइल करना जरूरी।
विदेशी संपत्ति खुलासे पर नरमी
विदेशी एसेट्स (जैसे ESOP शेयर) की जानकारी न देने पर ₹20 लाख तक की संपत्ति पर भारी जुर्माना नहीं लगेगा। NRIs और छोटे निवेशकों को राहत, लेकिन बड़ी संपत्तियों पर सख्ती बरकरार। यह डिजिटल ट्रैकिंग को बढ़ावा देगा।
न्यू रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन आकर्षक
नई टैक्स रिजीम डिफॉल्ट बनेगी। ₹4 लाख तक जीरो टैक्स, ₹12 लाख तक सेक्शन 87A छूट। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर मिडिल क्लास को ₹12.75 लाख तक राहत। पुरानी रिजीम चुनने वालों को 80C जैसे डिडक्शन मिलेंगे, लेकिन नई ज्यादा फायदेमंद। स्लैब: ₹4-8L पर 5%, ₹24L से ऊपर 30%।
चैरिटी ट्रस्ट्स पर डिजिटल सख्ती
चैरिटेबल संस्थाओं का पंजीकरण डिजिटल और सख्त। टैक्स छूट के लिए ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, टैक्स चोरी रुकेगी। डोनर्स को फायदा, लेकिन फर्जी ट्रस्ट्स बंद। ये बदलाव मिडिल क्लास को सशक्त बनाएंगे, लेकिन निवेश रिव्यू जरूरी। टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें और PAN-Aadhaar लिंक रखें। नया साल, नई शुरुआत!









