
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पावन बेला में गुड़ी पड़वा का त्योहार हर साल हिंदू समाज को नई ऊर्जा से भर देता है। महाराष्ट्र, गुजरात और कोंकणी समुदायों में मराठी नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार 19 मार्च को विशेष संयोग लेकर आ रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च सुबह 6:52 बजे शुरू होकर 20 मार्च सुबह 4:52 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 19 मार्च को ही गुड़िया फहराई जाएगी, जब विक्रम संवत 2083 (रुद्र संवत) और मराठी शक संवत 1948 की शुरुआत होगी।
यह दुर्लभ संयोग बुधवार को चैत्र नवरात्रि के आरंभ के साथ जुड़ रहा है, जो व्यापार, बुद्धि और नई शुरुआतों के लिए शुभ माना जा रहा। प्राचीन कथाओं में शालिवाहन शक के संस्थापक राजा शालिवाहन की शत्रुओं पर विजय इसी दिन हुई थी, जिसकी याद में बांस पर रेशमी वस्त्र, नीम पत्ती, फूलों और चावल की पुतली से सजी गुड़ी सूर्य दिशा में फहराई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़ी पूजा से घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का वास होता है। इस बार बुध ग्रह का प्रभाव व्यापारियों के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
पूजा की सरल विधि और शुभ मुहूर्त
सुबह जल्दी उठकर तिल या सुगंधित तेल से अभ्यंग स्नान करें, घर की सफाई व रंगोली बनाएं। नए वस्त्र धारण कर मुख्य द्वार या बालकनी पर गुड़ी स्थापित करें, उसकी पूजा-आरती करें। नीम पत्ते और गुड़ का प्रसाद ग्रहण करें, ब्राह्मण को दान दें। शाम को गुड़ी उतारकर शुद्ध स्थान पर रखें। 19 मार्च के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं: सूर्योदय सुबह 6:26 बजे, चंद्रोदय शाम 6:58 बजे। ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 4:58 से 5:38 तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:53 तक, विजय मुहूर्त 2:29 से 3:18 तक, तथा सायाह्न संध्या 6:31 से 7:43 तक। इनमें पूजा करना सर्वोत्तम रहेगा।
परंपराओं का संगम
तेल स्नान से शुरू होकर पूरन पोली, शरिकंद जैसे पारंपरिक व्यंजनों का सेवन किया जाता है। नई नौकरी, व्यवसाय या वाहन खरीदी का शुभ अवसर माना जाता है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ यह पर्व सृष्टि रचना और कृषि समृद्धि का प्रतीक है। हालांकि, कुछ लोग 20 मार्च की तिथि से भ्रमित हो रहे हैं, लेकिन पंचांग उदया तिथि पर जोर देता है।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि यह संयोग नवरात्रि की माता दुर्गा पूजा से जुड़कर आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करेगा। महाराष्ट्र में उमंग भरे बाजार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और गुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस गुड़ी पड़वा पर सभी को सुख-समृद्धि की बधाई!









