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WhatsApp पर अब बच्चे रहेंगे सेफ! पैरेंट्स के हाथ में होगा कंट्रोल, मार्क जुकरबर्ग का बड़ा तोहफा

व्हाट्सएप ला रहा बच्चों के लिए 'पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स' फीचर! 13 साल से कम उम्र के बच्चों का अकाउंट माता-पिता से लिंक होगा। पैरेंट्स तय करेंगे- कौन मैसेज/कॉल करेगा, किन ग्रुप्स में जॉइन होगा। स्टेटस, चैनल्स, AI ब्लॉक। साइबर सेफ्टी बढ़ेगी, जुकरबर्ग का नया तोहफा। जल्द रोलआउट!

By Pinki Negi

whatsapp new parental control feature under 13

लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली कंपनी ने ‘पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स’ फीचर की घोषणा की है, जो 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है। इस नई सुविधा से माता-पिता अपने बच्चों के व्हाट्सएप अकाउंट पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर सकेंगे, जिससे अनचाहे संपर्कों से बचाव सुनिश्चित होगा।

यह फीचर हाल ही में 11 मार्च 2026 को वॉल स्ट्रीट जर्नल के एक रिपोर्ट में सामने आया, जहां बताया गया कि प्री-टीन उम्र (12 साल से कम) के बच्चों के अकाउंट माता-पिता (18 साल से अधिक उम्र के) द्वारा सेटअप किए जाएंगे। बच्चे का अकाउंट पैरेंट के प्राइमरी अकाउंट से लिंक होगा, लेकिन प्राइवेसी बरकरार रहेगी। एबीपी लाइव और गैजेट्स 360 हिंदी जैसी साइट्स ने जनवरी 2026 से ही इसकी बीटा टेस्टिंग (एंड्रॉयड वर्जन 2.26.1.30) की खबरें चलाईं। भारत जैसे देश में, जहां साइबर सेफ्टी चिंताएं बढ़ रही हैं, यह फीचर मील का पत्थर साबित हो सकता है।

पैरेंट्स को मिलेंगे व्यापक कंट्रोल्स

इस फीचर का मुख्य आकर्षण माता-पिता को दिए जाने वाले नियंत्रण हैं। वे तय कर सकेंगे कि बच्चे को कौन मैसेज या कॉल कर सकता है, कांटेक्ट लिस्ट में कौन शामिल हो सकता है और बच्चा किन ग्रुप्स में जॉइन हो सकता है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इससे अनजान लोगों से बातचीत रुक जाएगी, जो बच्चों के लिए खतरा बन सकती है। इसके अलावा, पैरेंट्स चैट हिस्ट्री मॉनिटर कर सकेंगे, लेकिन एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्राइवेसी को प्रभावित नहीं करेगा।

यह सुविधा व्हाट्सएप की मौजूदा पेरेंटल कंट्रोल पॉलिसी को अपग्रेड करती है। पहले मेटा ने टीन अकाउंट्स पर स्ट्रेंजर मैसेजेस सीमित किए थे, लेकिन अब preteens के लिए अलग सिस्टम है। टेकक्रंच और नवभारत टाइम्स ने बताया कि यह बीटा स्टेज में है और जल्द ग्लोबल रोलआउट होगा, हालांकि फिक्स्ड डेट की पुष्टि नहीं हुई। भारत में हिंदी न्यूज पोर्टल्स ने इसे ‘मां-बाप की हुकूमत’ जैसा बताया, जो पैरेंट्स के लिए राहत की सांस है।

सीमित फीचर्स से बढ़ेगी सेफ्टी

बच्चों के अकाउंट्स में कई एडवांस फीचर्स ब्लॉक रहेंगे। स्टेटस अपडेट, चैनल्स सब्सक्रिप्शन और मेटा एआई इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी। इसका मकसद बच्चों को बेसिक मैसेजिंग तक सीमित रखना है, ताकि वे अनावश्यक कंटेंट से दूर रहें। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, यह वैश्विक रेगुलेशंस जैसे यूके के ऑनलाइन सेफ्टी बिल और भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से प्रेरित है।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

भारत में 50 करोड़ से ज्यादा व्हाट्सएप यूजर्स हैं, जिनमें करोड़ों बच्चे शामिल हैं। साइबर बुलिंग, ग्रूमिंग और फेक न्यूज के खतरे बढ़ रहे हैं। कर्नाटक सरकार के अंडर-16 सोशल मीडिया बैन प्रस्ताव के बीच मेटा ने यह कदम उठाया। जुकरबर्ग ने इसे ‘बड़ा तोहफा’ तो नहीं कहा, लेकिन मेटा के सेफ्टी फोकस का हिस्सा माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फीचर अन्य ऐप्स जैसे इंस्टाग्राम के टीन सुपरविजन को पूरक बनेगा।

भविष्य की संभावनाएं

रोलआउट के बाद iOS और एंड्रॉयड दोनों पर उपलब्ध होगा। फिलहाल डेवलपमेंट फेज में है, लेकिन अप्रैल 2026 तक अपडेट्स की उम्मीद। पैरेंट्स को सेटअप के लिए ऐप में नया सेक्शन मिलेगा। हालांकि, कुछ चिंताएं हैं जैसे प्राइवेसी बैलेंस और टेक-सेवी बच्चों का बायपास। कुल मिलाकर, यह बच्चों को सुरक्षित डिजिटल दुनिया देगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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