
फरवरी 2026 की MPC मीटिंग में RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा, यानी न नई कटौती, न बढ़ोतरी। इससे होम लोन से जुड़ी ज्यादातर फ्लोटिंग रेट EMIs फिलहाल के स्तर पर ही बनी रहेंगी। 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद अब RBI ने महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन के लिए न्यूट्रल स्टांस लिया है। इसका सीधा मतलब है कि निकट भविष्य में EMI में तेज उछाल का डर काफी हद तक टल गया है, जबकि आगे की किसी भी संभावित कट का फायदा तुरंत पास‑ऑन हो सकता है।
1 जनवरी 2026 से ज़ीरो प्री‑पेमेंट/फोरक्लोज़र चार्ज
RBI की “Pre‑payment Charges Directions, 2025” के तहत 1 जनवरी 2026 के बाद स्वीकृत या रिन्यू हुए फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्री‑पेमेंट और फोरक्लोज़र चार्ज खत्म कर दिए गए हैं (इंडिविजुअल, नॉन‑बिज़नेस लोन पर लागू)। इसका फायदा यह है कि यदि आपके पास बोनस, इंसेन्टिव, SIP मैच्योरिटी या दूसरी आय से अतिरिक्त पैसा आता है, तो आप बिना किसी पेनल्टी के लोन पहले चुका सकते हैं।
इससे पूरे लोन पीरियड में ब्याज का बोझ लाखों तक कम किया जा सकता है, खासकर 20–30 साल की लंबी अवधि वाले लोन में। फिक्स्ड रेट या बिज़नेस‑परपज़ लोन पर यह छूट ऑटोमैटिक नहीं है; वहाँ बैंक अब भी चार्ज लगा सकते हैं, बशर्ते क्लियरली डिस्क्लोज़ किया गया हो।
EBLR/RLLR रेट एडजस्टमेंट
रेपो रेट 5.25% पर आने के बाद SBI, PNB, बैंक ऑफ इंडिया, HDFC Bank जैसे बड़े बैंकों ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क‑लिंक्ड रेट्स (EBLR/RLLR) और होम लोन कार्ड रेट्स को रिवाइज़ किया है। उदाहरण के लिए, यदि किसी उधारकर्ता की ब्याज दर 8.75% से घटकर 8.50% हो जाती है तो 50 लाख के 20 साल के लोन पर EMI में लगभग 795 रुपये प्रति माह तक की बचत संभव है; साल भर में यह लगभग 9,500–10,000 रुपये की जेब में अतिरिक्त राहत बन जाती है।
कई बैंकों की शुरुआती होम लोन रेट अब लगभग 7.10–7.90% की रेंज में बताई जा रही है, हालांकि वास्तविक दर क्रेडिट स्कोर, प्रॉपर्टी और प्रोफाइल के आधार पर तय होती है।
रिकवरी, पारदर्शिता और डॉक्यूमेंटेशन पर सख्ती
RBI ने रिकवरी प्रैक्टिसेज पर भी नकेल कसी है ताकि एजेंट रात‑रात या बार‑बार कॉल करके मानसिक दबाव न बना सकें। अब रिकवरी एजेंट को केवल निर्धारित समय स्लॉट में ही उधारकर्ता से संपर्क करने की अनुमति है और डराने‑धमकाने जैसी हरकतों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही बैंकों को लोन एग्रीमेंट की कॉपी, ब्याज दर की पूरी ब्रेकअप, “रेपो + स्प्रेड” की डिटेल और EMI का पूरा अमॉर्टाइज़ेशन शेड्यूल देना अनिवार्य किया गया है। इससे ग्राहकों के लिए यह समझना आसान होगा कि उनकी EMI कैसे बन रही है और ब्याज कब, कैसे घट रहा है।
LTV, अफोर्डेबल हाउसिंग और बजट 2026 की उम्मीद
होम लोन के लिए LTV (Loan‑to‑Value) नॉर्म्स के तहत 30 लाख रुपये तक के सस्ते घरों पर 90% तक फाइनेंस की अनुमति है, जबकि 30–75 लाख पर यह 80% और 75 लाख से ऊपर 75% LTV सीमा लागू रहती है। इससे पहली बार घर खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लिए डाउन‑पेमेंट का बोझ अपेक्षाकृत कम रहता है।
बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में टैक्स डिडक्शन और सब्सिडी जैसी घोषणाएँ हो सकती हैं, जिससे प्रभावी ब्याज दर और नेट EMI पर अप्रत्यक्ष राहत मिल सकती है। यदि ऐसी टैक्स राहत मिलती है, तो EMI भले न बदले, लेकिन टैक्स के बाद आपकी पॉकेट से जाने वाली “इफेक्टिव EMI” घट सकती है।









