
मिडिल ईस्ट में छिड़े ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत $119.50 प्रति बैरल तक उछल गई, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में बाधा के डर से है। G7 देशों के वित्त मंत्री सोमवार को इमरजेंसी बैठक बुला रहे हैं, जहां तेल भंडारों से संयुक्त रिलीज पर चर्चा होगी। यह संकट भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए बड़ा खतरा है। पहले चरण में कच्चा तेल $80-85 तक सीमित था, लेकिन अब $100 पार होने से पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सरकार ने 50 दिनों के रिजर्व स्टॉक का हवाला देकर तत्काल वृद्धि से इनकार किया है।
G7 की इमरजेंसी बैठक और वैश्विक प्रतिक्रिया
G7 के वित्त मंत्री, जिसमें ब्रिटेन की चांसलर रेचल रीव्स शामिल हैं, सोमवार को आर्थिक प्रभाव पर चर्चा करेंगे। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के समन्वय में तेल भंडारों से रिलीज पर विचार होगा। यह 2022 के बाद पहली बार होगा, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऐसा कदम उठाया गया था।
होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते से ठप है। ईरान ने रविवार को अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया, जो हार्डलाइनर्स के नियंत्रण का संकेत है। अमेरिका-इजरायल ने वीकेंड में ईरान के तेल डिपो पर हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। सऊदी अरब ने दो ड्रोन हमलों को नष्ट कर दिया।
तेल कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, बाजार ध्वस्त
एशिया में सोमवार सुबह ब्रेंट $119.50 तक पहुंचा, फिर $107 पर आ गया। WTI $104/बैरल पर कारोबार कर रहा। ब्रिटेन में गैस 171p/थर्म तक उछली। यूरोपीय बाजार गिरे- जर्मनी का DAX और फ्रांस का CAC 40 में 2.5% की गिरावट। लंदन FTSE 100 1.5% नीचे, सिर्फ BP-शेल जैसे तेल दिग्गज चमके। जापान का निक्केई 5.2% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% लुढ़का, जहां 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रुकी। पेटरसन इंस्टीट्यूट के अदनान मजारेई ने कहा, “लोग समझ रहे हैं कि यह जल्द खत्म नहीं होगा।” खाड़ी देशों में उत्पादन रुकने से कीमतें आसमान छू रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान, घरेलू चिंताएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, “ईरान के न्यूक्लियर खतरे के खात्मे के बाद तेल कीमतें तेजी से गिरेंगी। यह सुरक्षा के लिए छोटी कीमत है।” उनके एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा कि इजरायल ही ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा। AAA डेटा से अमेरिका में गैसोलीन $3.32/गैलन तक पहुंचा, 11% बढ़ोतरी।
भारत पर प्रभाव: पेट्रोल-डीजल कब महंगे?
भारत 85% तेल आयात करता है। पहले $82 तक कीमतें थीं, अब $107+ से आयात बिल बढ़ेगा। सरकार ने कहा, रिजर्व से तत्काल दाम नहीं बढ़ेंगे, लेकिन लंबे युद्ध से महंगाई का खतरा। शेयर बाजार पहले ही 7000 अंक गिर चुका। सोना-चांदी महंगे, LPG सप्लाई पर भी संकट।
विशेषज्ञों का मानना है, IEA रिलीज से राहत मिल सकती है, लेकिन युद्ध लंबा खिंच तो उपभोक्ताओं को भारी पड़गा। BBC के लाइव अपडेट्स से पता चलता है, स्थिति बिगड़ रही। भारत सरकार निगरानी में है, लेकिन आम आदमी की जेब पर असर अनिवार्य लग रहा।









