
डिजिटल भुगतानों के जमाने में ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आमजन के लिए राहत का एक बड़ा फ़ैसला लिया है। अब यदि आपके बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे कटे हैं, तो आप ₹25,000 तक का मुआवजा पा सकते हैं। बस शर्त यह है कि आपको धोखाधड़ी का पता चलते ही 5 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी।
RBI का नया मुआवजा योजना क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है जिसके तहत छोटे-मोटे डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा दिया जाएगा। इस नए प्रस्ताव के तहत, यदि किसी व्यक्ति के साथ इलेलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में धोखाधड़ी होती है और उसका कुल नुकसान ₹50,000 तक है, तो उसे मुआवजे का हकदार माना जाएगा।
इस योजना के तहत, पीड़ित व्यक्ति को कुल नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) दिए जाएंगे। हालांकि, यह सुविधा एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक ही बार मिलेगी। बार-बार धोखाधड़ी का शिकार होने पर इस योजना का लाभ नहीं उठाया जा सकता।
5 दिन का समय सीमा और शिकायत प्रक्रिया
इस मुआवजे को पाने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। धोखाधड़ी का पता लगते ही तत्काल एक्शन लेना होगा। नियमों के तहत, पीड़ित को धोखाधड़ी के 5 दिनों के भीतर अपने बैंक को सूचना देनी होगी। साथ ही, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर भी शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य है। शिकायत मिलने के बाद, बैंक को केवल 5 कैलेंडर दिनों के भीतर ही ग्राहक को मुआवजे की राशि का भुगतान करना होगा।
मुआवजे की राशि का गणित समझें
इस योजना में मुआवजे की राशि का वितरण इस प्रकार है:
- नुकसान ₹29,412 से कम होने पर: इसमें 65% हिस्सा सीधे RBI देगा, 10% ग्राहक के बैंक और 10% beneficiary बैंक को देना होगा।
- नुकसान ₹29,412 से ₹50,000 के बीच होने पर: अधिकतम मुआवजा ₹25,000 ही रहेगा। इस स्थिति में ₹19,118 RBI वहन करेगा, जबकि ₹2,941-2,941 दोनों संबंधित बैंकों को देने होंent.
कब से लागू होगा यह नियम?
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करते वक्त इस बदलाव के संकेत दिए थे। इसके बाद 6 मार्च को डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क का यह ड्राफ़्ट पेश किया गया। फिलहाल, केंद्रीय बैंक ने इस पर आम जनता से राय मांगी है, जिसके लिए 6 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 1 जुलाई 2026 या उसके बाद होने वाले सभी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर यह नया नियम लागू हो जाएगा।









