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Facebook-Instagram यूजर्स सावधान! रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, आपकी नींद के पीछे है ये बड़ी वजह

सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग और ऑनलाइन नकाराता नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। शोधों के अनुसार, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर रात को देर तक बिताने से नींद की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है और तनाव बढ़ता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से पहले स्क्रीन का प्रबंधन और नकारात्मक कमेंट्स से दूरी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

By Pinki Negi

Facebook-Instagram यूजर्स सावधान! रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, आपकी नींद के पीछे है ये बड़ी वजह

फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर समय बिताते हुए आपने कभी महसूस किया है कि रात को नींद नहीं मिल रही या सोने के बाद भी नींद उड़ रही है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। हालिया शोधों और रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक और सही समय पर उपयोग न केवल आपकी नींद को बाधित कर रहा है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन नकाराता (Online Negativity) और निरंतर स्क्रीन एक्सपोज़र आपकी नींद की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं ।

नींद और सोशल मीडिया

वर्तमान में भारत में लगभग 35 करोड़ से अधिक यूजर हैं जो सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं, और इसकी वजह से डिजिटल लत एक गंभीर समस्या बन चुकी est. एक study में पाया गया है कि 19-32 वर्ष के 1,788 लोगों पर किए गए सर्वे में 30% प्रतिभागियों में नींद संबंधित बाधाएं पाई गईं । विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग सप्ताह भर तेजी से सोशल मीडिया की जांच करते रहते हैं, उनमें नींद संबंधी परेशानी होने की संभावना उन लोगों से तीन गुना अधिक होती है ।

ऑनलाइन नकाराता और मानसिक तनाव

सोशल मीडिया पर दूसरों की बहस, कड़वे कमेंट्स या किसी को ट्रोल होते देखकर परेशान होना एक सामान्य प्रतिक्रिया है। हाल ही की एक नई रिसर्च (Lancet Psychiatry और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार) ने इस पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिसर्च के अनुसार, इंटरनेट पर मौजूद नकारात्मकता (Online Negativity) न केवल आपके मूड को खराब करती है, बल्कि यह गंभीर मानसिक तनाव और बेचैनी (Mental Distress) का कारण बन रही है ।

जब हम इंटरनेट पर नकारात्मक पोस्ट या कमेंट्स देखते हैं, तो हमारा दिमाग उसे एक खतरे की तरह लेता है. इससे शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नाम का स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ने लगता है। जब आप बार-बार ऐसी चीजों के संपर्क में आते हैं, तो यह तनाव स्थायी हो जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे यह आपको चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी (घबराहट) और यहां तक कि डिप्रेशन की ओर धकेल सकता है.

AI और नई चुनौतियां

आज का समय AI का है, जिसमें डीपफेक और फेक न्यूज की बाढ़ आ गई है। लोग अक्सर बिना सोच-समझा नकारात्मक चीजों को शेयर कर देते हैं। रsearch में चेतावनी दी गई है कि AI द्वारा फैलाया गया नकारात्मक कंटेंट इंसानी दिमाग के लिए और भी ज्यादा भ्रम पैदा करने वाला और तनावपूर्ण हो सकता है.

बचत के लिए कदम

विशेषज्ञों ने डिजिटल दुनिया में मानसिक शांति बनाए रखने के लिए कुछ खास ‘हेल्थ-हैक’ बताए हैं. उनके अनुसार लोगों को दिन में कम से कम 2 घंटे फोन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। साथ ही, लोगों को उन पेजों को तुरंत अनफॉलो कर देना चाहिए जो केवल नकारात्मकता या नफरत फैलाते हैं। विवादास्पद मुद्दों या कीवर्ड्स को म्यूट कर दें, ताकि वे आपकी फीड में नजर न आएं। हर बहस में हिस्सा लेना जरूरी नहीं है। याद रखें, आपकी मानसिक शांति किसी भी ऑनलाइन बहस से ज्यादा कीमती है.

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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