
हवाई यात्रा के दौरान सामान खो जाना या गलत जगह पहुंच जाना यात्रियों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। हर साल लाखों बैग मिसप्लेस्ड होते हैं, जिससे एयरलाइंस को अरबों का नुकसान होता है और यात्री घंटों अपडेट का इंतजार करते हैं। इस समस्या का समाधान लाया है गूगल ने। अपने फाइंड हब प्लेटफॉर्म में नया ‘शेयर आइटम लोकेशन’ फीचर जोड़कर गूगल ने यात्रियों को सशक्त बना दिया है। अब यात्री खुद अपने खोए बैग की लाइव लोकेशन एयरलाइन के साथ शेयर कर सकते हैं, जिससे रिकवरी प्रक्रिया पलक झपकते ही तेज हो जाती है।
यह फीचर एंड्रॉइड यूजर्स के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है और SITA के वर्ल्डट्रेसर तथा अन्य बैगेज ट्रैकिंग सिस्टम से इंटीग्रेटेड है। गूगल ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस के दौरान इसे अनवील किया, जो एपल के ‘फाइंड माय’ नेटवर्क से प्रेरित है। इससे एयरलाइंस को पारंपरिक RFID स्कैनिंग के अलावा रीयल-टाइम डेटा मिलता है, जिससे बैग ढूंढना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एविएशन इंडस्ट्री में स्मार्ट ट्रैकिंग का नया युग शुरू कर सकता है।
फीचर कैसे काम करता है?
बैग खोने की स्थिति में यात्री को फाइंड हब ऐप (Google Play पर उपलब्ध) में कुछ ही क्लिक्स करने हैं:
- ऐप खोलें और ट्रैकर से जुड़े बैग को सिलेक्ट करें।
- ‘शेयर आइटम लोकेशन’ ऑप्शन पर टैप करें- ऐप तुरंत एक सुरक्षित, यूनिक लिंक जेनरेट करेगा।
- इस लिंक को एयरलाइन के लॉस्ट बैगेज फॉर्म, ऐप या वेबसाइट में पेस्ट करें।
एयरलाइन टीम वर्ल्डट्रेसर डैशबोर्ड पर लोकेशन देख सकेगी, जो लगातार अपडेट होती रहेगी। शेयरिंग कभी भी ऐप से रोक सकते हैं।
इसके लिए जरूरी हैं: एंड्रॉइड फोन पर फाइंड हब ऐप, बैग में Find Hub-संगत ब्लूटूथ ट्रैकर (जैसे Chipolo, Pebblebee या नए सैमसोनाइट सूटकेस में बिल्ट-इन), और सपोर्टेड एयरलाइन। ट्रैकर नेटवर्क कनेक्टेड डिवाइसेस से लोकेशन पिंग करता है, भले ही इंटरनेट ऑफ हो।
किन एयरलाइंस को मिलेगा सपोर्ट?
गूगल ने तुर्किश एयरलाइंस को लॉन्च पार्टनर बनाया है। इसके अलावा एयर इंडिया, एजियन एयरलाइंस, चाइना एयरलाइंस, लुफ्थांसा ग्रुप (लुफ्थांसा, ऑस्ट्रियन, ब्रुसेल्स, स्विस), सऊदी अरब एयरलाइंस, स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस और क्वांटास जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। SITA का वर्ल्डट्रेसर 280+ एयरलाइंस और सैकड़ों एयरपोर्ट्स को कवर करता है, इसलिए जल्द ही IndiGo जैसी भारतीय एयरलाइंस भी शामिल हो सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
प्राइवेसी और सिक्योरिटी
गूगल ने प्राइवेसी को प्राथमिकता दी है। लोकेशन डेटा एन्क्रिप्टेड रहता है, यूजर कंट्रोल में शेयरिंग होती है। लिंक 7 दिनों बाद ऑटो-एक्सपायर हो जाता है, और बैग मिलते ही शेयरिंग बंद। ‘लॉस्ट मोड’ में कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी प्रोटेक्टेड रहते हैं। गूगल के अनुसार, डेटा केवल एयरलाइन के अधिकृत स्टाफ तक सीमित है।
क्यों है यह फीचर गेम-चेंजर?
वैश्विक स्तर पर 2.5 करोड़ बैग सालाना मिसप्लेस्ड होते हैं (SITA रिपोर्ट)। पहले यात्री एयरलाइन अपडेट्स पर निर्भर थे, अब वे प्रोएक्टिव मदद कर सकते हैं। एयरलाइंस के लिए कम्पेंसेशन कॉस्ट घटेगी, जबकि यात्रियों को तनावमुक्त सफर मिलेगा। भारत जैसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में, जहां एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस डिजिटल अपग्रेड कर रही हैं, यह फीचर क्रांतिकारी साबित होगा। भविष्य में iOS इंटीग्रेशन और ज्यादा ट्रैकर्स की उम्मीद है।









