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स्मार्टफोन चलाने से कमजोर हो रही हैं आंखें? आजमाएं ये 5 जादुई ‘हैक’, चश्मा लगाने की नौबत नहीं आएगी

स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से डिजिटल आई स्ट्रेन तेजी से बढ़ रहा है। आंखों में जलन, सूखापन और सिरदर्द से बचने के लिए नाइट मोड, डार्क थीम और 20-20-20 नियम अपनाएं। स्क्रीन को 16-18 इंच दूर रखें, ऐप लिमिट सेट करें और पर्याप्त ब्रेक लें। ये 5 आसान सेटिंग्स आपकी नजर को बचा सकती हैं और चश्मे की जरूरत से दूर रख सकती हैं।

By Pinki Negi

स्मार्टफोन चलाने से कमजोर हो रही हैं आंखें? आजमाएं ये 5 जादुई 'हैक', चश्मा लगाने की नौबत नहीं आएगी

आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक कई लोग घंटों मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं। लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है । हालांकि अगर फोन का इस्तेमाल थोड़ा समझदारी से किया जाए और कुछ आसान सेटिंग्स बदल ली जाएं, तो आंखों पर पड़ने वाला यह प्रेशर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिजिटल आई स्ट्रेन: एक गंभीर समस्या

नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग आंखों के लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है । जब हम लगातार स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं, जिससे आंखें सूखने लगती हैं और उनमें जलन होती है। ब्लू लाइट का सीधा प्रभाव आंखों की रेटिना पर पड़ता है, जिससे लंबे समय में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं । इकोनॉमिक सर्वे 2026 में भी भारत के युवाओं में डिजिटल लत के खतरे को रेखांकित किया गया है, जिससे नींद की कमी, ध्यान भटकना और फोकस घटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं ।

डिजिटल आई स्ट्रेन के प्रमुख लक्षणों में आंखों में परेशानी, धुंधली दृष्टि, सूखी आंखें, सिरदर्द, गर्दन और कंधे में दर्द शामिल हैं । कई लोगों को रात में नींद न आने की समस्या भी होती है क्योंकि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन में कमी लाती है ।

नाइट मोड: आंखों का पहला सुरक्षा कवच

ज्यादातर स्मार्टफोन में नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का ऑप्शन दिया जाता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली तेज ब्लू लाइट आंखों को जल्दी थका देती है और देर रात तक फोन चलाने पर नींद भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नाइट मोड ऑन करने से स्क्रीन की रोशनी थोड़ी हल्की और पीले रंग में बदल जाती है, जिससे आंखों को काफी आराम मिलता है ।

सेटिंग कैसे करें:

  • एंड्रॉयड: Settings > Display > Night Light पर जाएं
  • iPhone: Settings > Display & Brightness में जाकर Night Shift चुनें

ब्लू लाइट फिल्टर चश्मे भी डिजिटल आई सिंड्रोम के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें पहनना उचित नहीं है ।

डार्क मोड: आंखों का बेस्ट फ्रेंड

चमकदार सफेद स्क्रीन सीधे आपकी आंखों के रेटिना पर असर डालती है। ऐसे में डार्क मोड इसे बदलकर काला या गहरा ग्रे कर देता है। यह फीचर न सिर्फ आंखों के लिए अच्छा है, बल्कि फोन की बैटरी भी बचाता है। वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और जीमेल जैसे ऐप्स पर यह अपने आप ऑन हो जाता है जब आप फोन की सेटिंग में ‘Dark Theme’ या ‘Dark Mode’ को ऑन कर देते हैं।

ऐप लिमिट से लें नियमित ब्रेक

आंखों को आराम देने का सबसे आसान तरीका है कि आप फोन का कम इस्तेमाल करें। एंड्रॉयड फोन में ‘Digital Wellbeing’ और iPhone में ‘Screen Time’ का फीचर आपको यह बताता है कि आप किस ऐप को कितनी देर चलाना चाहते हैं। जैसे ही आपका तय समय खत्म होगा, ऐप अपने आप लॉक हो जाएगा। यह ब्रेक आपकी आंखों को रिकवर होने का मौका देता है और डिजिटल लत से भी बचाता है ।

स्क्रीन डिस्टेंस का रखें विशेष ध्यान

अगर आपके पास iPhone है, तो उसमें आपको एक कमाल का फीचर मिलता है। यह सेंसर की मदद से नजर रखता है कि आप फोन को आंखों से कितनी दूरी पर रख रहे हैं। अगर आप फोन को 12 इंच (30 सेमी) से ज्यादा करीब लाते हैं, तो स्क्रीन पर अलर्ट आ जाएगा। पास से फोन देखने से मायोपिया का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बच्चों और युवाओं में ।

20-20-20 का फॉर्मूला

आंखों के डॉक्टर सबसे ज्यादा इसी नियम की सलाह देते हैं। इसमें हर 20 मिनट के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को कम से कम 20 सेकंड तक देखें। इससे आपकी आंखों की मांसपेशियों का तनाव तुरंत कम हो जाता है । अगर आप मोबाइल इस्तेमाल करते समय थोड़ी सावधानी रखते हैं, तो लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बावजूद आंखों की सेहत को काफी आराम मिल सकता है।

विशेषज्ञ की राय

नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल आई स्ट्रेन आम तौर पर आराम और उचित नेत्र देखभाल प्रथाओं से दूर हो जाता है । स्क्रीन से ब्रेक लेना, उचित रोशनी का उपयोग करना और अच्छे एर्गोनॉमिक्स का अभ्यास करना लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, अगर इन सुझावों का पालन करने के बाद भी आपको आंखों की समस्या हो रही है, तो किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है ।

याद रखें, तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन अपनी सेहत की कीमत पर नहीं। इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप अपनी आंखों की सेहत को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं और चश्मे की नौबत आने से बच सकते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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