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लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए बार-बार अप्लाई करना पड़ेगा भारी! सिबिल स्कोर बचाने का ये है सही तरीका

बार-बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करने से हर बार ‘Hard Inquiry’ होती है, जिससे CIBIL स्कोर गिरता और आप बैंक की नजर में ‘Credit Hungry’ दिखते हैं। समझदारी यह है कि एक साथ कई जगह आवेदन न करें, पहले soft inquiry/eligibility check से अपने चांस समझें, रिजेक्शन के बाद 3–6 महीने का गैप रखें और पुरानी क्रेडिट हिस्ट्री व कार्ड एक्टिव बनाए रखें।

By Pinki Negi

लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए बार-बार अप्लाई करना पड़ेगा भारी! सिबिल स्कोर बचाने का ये है सही तरीका

बार-बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करना अब सिर्फ एक साधारण गलती नहीं, आपके वित्तीय भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। डिजिटल लोन ऐप्स और प्री-अप्रूव्ड ऑफर्स के दौर में ज्यादातर लोग यह समझ ही नहीं पाते कि हर क्लिक के साथ उनका CIBIL स्कोर दांव पर लग रहा है। जब भी आप किसी बैंक या NBFC के यहां लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, आपका क्रेडिट प्रोफाइल खंगाला जाता है और यह प्रक्रिया आपके स्कोर पर सीधा असर छोड़ जाती है।

हर अप्लिकेशन पर होता है ‘Hard Inquiry’

बैंक या वित्तीय संस्था जब भी आपका CIBIL Score निकालती है, तो इसे तकनीकी भाषा में ‘Hard Inquiry’ कहा जाता है। यह कोई साधारण बैकग्राउंड चेक नहीं, बल्कि आपकी संपूर्ण क्रेडिट हिस्ट्री पर आधिकारिक नजर है, जो आपकी रिपोर्ट पर दर्ज हो जाती है। हर बार हुए ऐसे हार्ड इन्क्वायरी से आपका स्कोर कुछ पॉइंट्स तक नीचे खिसक सकता है, और अगर यह सिलसिला बार-बार चलता रहे, तो स्कोर में गिरावट साफ दिखाई देने लगती है।

यही नहीं, कम समय में कई हार्ड इन्क्वायरी दिखने पर आप बैंक की नजर में एक ऐसे व्यक्ति बन जाते हैं जिसे तुरंत और ज्यादा कर्ज की जरूरत है। प्रोफेशनल भाषा में ऐसे ग्राहकों को “Credit Hungry” यानी कर्ज के भूखे के रूप में देखा जाता है। यह इमेज आपके लिए दोहरी चोट साबित होती है-एक तरफ स्कोर गिरता है, दूसरी तरफ भविष्य के लोन या क्रेडिट कार्ड की मंजूरी के मौके भी कम हो जाते हैं।

एक महीने में 4-5 जगह अप्लाई करना खतरनाक सिग्नल

कई बार लोग बेहतर ऑफर की तलाश में एक ही महीने में 4-5 अलग-अलग बैंकों या ऐप्स पर आवेदन कर देते हैं। बाहर से यह स्मार्ट तुलना की तरह लगता है, लेकिन क्रेडिट ब्यूरो की नजर में यह हाई-रिस्क बर्ताव माना जाता है। इससे यह संकेत जाता है कि या तो आपकी वित्तीय स्थिति अस्थिर है, या पहले कहीं से लोन नहीं मिला और आप हर जगह दरवाजा खटखटा रहे हैं।

सही तरीका यह है कि आप पहले बाजार की रिसर्च करें, 1-2 उचित विकल्प चुनें और उसी पर फोकस कर के आवेदन करें। जरूरत हो तो समय का अंतराल रखें, ताकि आपकी रिपोर्ट पर एक साथ कई हार्ड इन्क्वायरी की लाइन न खिंच जाए। थोड़े-थोड़े गैप के साथ सोच-समझकर किया गया आवेदन आपके स्कोर को भी बचाए रखता है और प्रोफाइल को भी प्रोफेशनल दिखाता है।

‘Soft Inquiry’: स्कोर बचाने का स्मार्ट रास्ता

अब सवाल उठता है कि अगर हर बार सीधा अप्लाई करना नुकसानदायक है, तो सही रास्ता क्या है? इसका जवाब है ‘Soft Inquiry’। कई बैंक, फिनटेक प्लेटफॉर्म और क्रेडिट तुलना वेबसाइटें आपको “Check Eligibility” या “Know your offer” जैसा विकल्प देती हैं, जहां आपकी बेसिक जानकारी के आधार पर आपको अनुमानित ऑफर दिखाए जाते हैं।

इस तरह की जांच आम तौर पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट को हार्ड तरीके से हिट नहीं करती, बल्कि बैकएंड पर लिमिटेड डेटा या अनुमान के आधार पर रिजल्ट देती है। फायदा यह है कि आप यह जान सकते हैं कि कौन सा लोन या कार्ड आपके लिए ज्यादा उपयुक्त है, और कहां आपके अप्रूवल चांस बेहतर हैं-वो भी बिना CIBIL स्कोर गिराए। यही वजह है कि अब समझदार ग्राहक डायरेक्ट फॉर्म भरने से पहले हमेशा एलिजिबिलिटी चेक को पहली सीढ़ी बनाते हैं।

रिजेक्शन के बाद तुरंत दूसरी जगह अप्लाई न करें

एक और आम गलती यह है कि किसी बैंक से लोन रिजेक्ट होते ही लोग तुरंत दूसरी संस्था के पास भागते हैं। पहली बात तो यह कि रिजेक्शन अपने आप में एक नेगेटिव सिग्नल होता है, जो आपकी रिपोर्ट में दर्ज रहता है। दूसरी बात, हर नए आवेदन के साथ एक नई हार्ड इन्क्वायरी जुड़ जाती है, यानी नुकसान दोगुना।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यही सलाह देते हैं कि अगर आपका आवेदन रिजेक्ट हो गया है, तो घबराहट में दूसरी जगह अप्लाई करने से बेहतर है कि 3 से 6 महीने का गैप रखा जाए। इस बीच आप अपना CIBIL रिपोर्ट ध्यान से पढ़ें, यह समझें कि रिजेक्शन की असली वजह क्या रही- कम स्कोर, ज्यादा EMI, अनस्टेबल जॉब या कोई पुराना डिफॉल्ट। कारण स्पष्ट होने के बाद उस पर काम करें, और जब प्रोफाइल बेहतर दिखने लगे, तभी अगला आवेदन करें।

एलिजिबिलिटी चेक करना क्यों जरूरी है

बैंक लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए केवल स्कोर नहीं देखते, बल्कि सैलरी, उम्र, नौकरी की प्रकृति, शहर, मौजूदा लोन, और पुराने भुगतान रिकॉर्ड जैसे कई पैरामीटर जांचते हैं। अगर आप इन बेसिक शर्तों को ही पूरा नहीं करते, तो रिजेक्शन लगभग तय है। ऐसे में बिना सोचे-समझे फॉर्म भरना सिर्फ एक और हार्ड इन्क्वायरी और एक और रिजेक्शन जोड़ देगा।

पुराने क्रेडिट कार्ड बंद करना भी गलती हो सकती है

बहुत से लोग सोचते हैं कि पुराने क्रेडिट कार्ड बंद करने से कर्ज का बोझ कम दिखेगा और स्कोर बेहतर होगा। हकीकत अक्सर उलट होती है। आपकी क्रेडिट हिस्ट्री जितनी लंबी और स्थिर होगी, आपके स्कोर के लिए उतना ही फायदेमंद माना जाता है। पुराना कार्ड आपकी उम्रदराज क्रेडिट लाइन को दिखाता है, जो भरोसेमंद व्यवहार का संकेत देता है।

अगर आप बिना सोचे-समझे पुराने कार्ड बंद कर देते हैं, तो आपकी औसत क्रेडिट एज कम हो सकती है और कुल उपलब्ध लिमिट घटने से utilisation ratio अचानक बढ़ सकता है। दोनों ही चीजें स्कोर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। बेहतर तरीका यह है कि पुराने कार्ड को एक्टिव रखें, साल में कुछ छोटे ट्रांजैक्शन करें और समय पर पूरा बिल चुका दें। इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत बनी रहती है और बैंक की नजर में आप एक अनुशासित ग्राहक के रूप में दर्ज होते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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