
कई सालों के इंतजार के बाद देश में जनगणना का बिगुल बज चुका है। कोविड महामारी और तकनीकी तैयारियों के कारण विलंबित यह प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल रूप में ढल चुकी है, जो दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल अभियान साबित होगी। गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जनगणना-2027 के डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च करते हुए इसके दो प्रतीक चेहरे ‘प्रगति’ और ‘विकास’ से पर्दा उठाया।
ये शुभंकर न केवल प्रगणकों के प्रतीक हैं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में महिला-पुरुष की समान भागीदारी को रेखांकित करते हैं।
‘प्रगति’ और ‘विकास’: जनगणना के नए चेहरे
‘प्रगति’ एक महिला प्रगणक का कार्टून चित्रण है, जो ऊर्जा और समावेशिता का प्रतीक है। वहीं ‘विकास’ पुरुष प्रगणक के रूप में विकास की गति को दर्शाता है। ये केवल चित्र नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान के केंद्र हैं। जब भी ये दिखें, तो समझें कि जनगणना से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना आ रही है। सरकार का उद्देश्य इनके माध्यम से आमजन को डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ना है। ये शुभंकर सोशल मीडिया, पोस्टर और ऐप्स पर नजर आएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित होगी।
स्व-गणना: घर बैठे डेटा भरने का विकल्प
पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का प्रावधान किया गया है। लोग SE पोर्टल पर 16 भाषाओं में अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। सर्वे से 15 दिन पहले यह सुविधा उपलब्ध होगी, जिसके बाद एक यूनिक SE ID जारी होगी। प्रगणक आने पर इसे दिखाकर डेटा वेरीफाई करवाएं। इससे प्रक्रिया तेज और पेपरलेस बनेगी। लगभग 50% आबादी मोबाइल ऐप से खुद डेटा दर्ज कर सकेगी, जो जन्म-मृत्यु जैसे अपडेट्स को स्वचालित बनाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स: तकनीक का कमाल
सी-डैक द्वारा विकसित ये टूल्स क्रांति लाएंगे। HLBC ऐप सैटेलाइट इमेज से मकानों की GPS टैगिंग करेगा। HLO मोबाइल ऐप ऑफलाइन-ऑनलाइन मोड में डेटा संग्रह करेगा, केवल CMMS रजिस्टर्ड प्रगणक ही उपयोग कर सकेंगे। CMMS पोर्टल केंद्रीकृत डैशबोर्ड देगा, जहां राज्य-जिला स्तर पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। ड्रॉपडाउन मेनू, कोडेड सवाल और ICR तकनीक त्रुटियां रोकेगी। 30 लाख प्रगणक इनका इस्तेमाल करेंगे।
शेड्यूल: दो चरणों में पूरा अभियान
प्रथम चरण (HLO): 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक। आवास स्थिति, सुविधाओं का डेटा एकत्र होगा। अधिसूचना 7 जनवरी 2026 को जारी। द्वितीय चरण (PE): फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना, जिसमें उम्र, शिक्षा, रोजगार, जाति शामिल। बर्फीले क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख) में सितंबर 2026 से। 1931 के बाद पहली पूर्ण जाति गणना नीतियों को नया आकार देगी।
क्यों है यह जनगणना खास?
यह पेपरलेस अभियान डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और ग्रामीण डिजिटल साक्षरता पर फोकस करेगा। बजट 11,718 करोड़ रुपये। रिपोर्ट 9 महीनों में तैयार होगी। आरक्षण, योजनाओं और लोकसभा सीमांकन पर असर पड़ेगा। चुनौतियां जैसे इंटरनेट पहुंच रहेंगी, लेकिन इनोवेशन से समावेशी भारत बनेगा। ‘प्रगति’ और ‘विकास’ के दस्तक से नया दौर शुरू।









