
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब सिर्फ रेत के टीलों तक सीमित नहीं रही। चौथे दिन में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है, और इसकी लपटें भारत की अर्थव्यवस्था को चपेट में ले रही हैं। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से कच्चे तेल की कीमतें ब्रेंट क्रूड 77.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो $100 के पार जाने का संकेत दे रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के मुताबिक, यह युद्ध कम से कम चार हफ्ते चल सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल ₹7-9 प्रति लीटर महंगा हो सकता है।
यह जंग सिर्फ पेट्रोल पंपों पर नहीं रुकेगी। भारत अपनी 85% तेल जरूरत आयात करता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक सप्लाई का 20% नियंत्रित करता है। ईरानी मिसाइलों ने सऊदी अरब, कतर और यूएई की रिफाइनरियों को निशाना बनाया है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो गई। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी BMI ने अपनी ‘इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7% पर स्थिर रखी है, लेकिन निवेश प्रभावित होने की चेतावनी दी है। रुपये की कीमत 91.50 तक गिर चुकी है, जो 42 पैसे की तेज गिरावट दर्शाती है।
होम लोन EMI पर सीधा खतरा
तेल महंगाई का चेन रिएक्शन EMI तक पहुंच रहा है। बढ़ती इंपोर्ट लागत से महंगाई (जनवरी 2026 में CPI 2.75%) भड़क सकती है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ऊंची हो जाएंगी। RBI ने फरवरी में रेपो रेट 5.25% पर रखा, लेकिन अगर महंगाई 0.3-0.5% बढ़ी तो ब्याज दरें ऊपर जा सकती हैं। इससे बैंक लोन महंगे होंगे, और होम लोन, कार लोन की EMI में इजाफा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि $10 प्रति बैरल कीमत वृद्धि से करेंट अकाउंट डेफिसिट 40-50 bps चौड़ा हो सकता है।
सरकार के खजाने पर दबाव
भारत का आयात बिल फूला जाएगा, क्योंकि मिडिल ईस्ट से तेल-गैस महंगे पड़ेंगे। रेमिटेंस पर भी संकट मंडरा रहा है- कतर, दुबई, यूएई, सऊदी से आने वाले फंड प्रभावित होंगे। 90 लाख भारतीय कामगारों की नौकरियां खतरे में हैं। निर्यात भी चोट खाएगा; UAE-सऊदी को व्यापार ₹38 अरब का है। चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट रुक सकते हैं।
बासमती चावल निर्यात पर संकट
भारत毎年 60 लाख टन बासमती निर्यात करता है, जिसमें 70% मिडिल ईस्ट जाता है। ईरान को 14 लाख टन का रिकॉर्ड है। युद्ध से शिपिंग बाधित होने से यह बाजार ध्वस्त हो सकता है। सोना-हीरे के आयात पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि दुबई रूट बंद हो रहा है।
| प्रभाव क्षेत्र | अनुमानित नुकसान |
|---|---|
| तेल कीमतें | $100/बैरल तक |
| रुपये | 92/USD |
| महंगाई | +0.3-0.5% |
| EMI | रेपो रेट हाइक |
| निर्यात | बासमती 70% प्रभावित |
| रेमिटेंस | 90 लाख कामगार जोखिम |
एविएशन, केमिकल्स, टायर सेक्टरों में मार्जिन सिकुड़ेंगे। हालांकि, RBI की सतर्क नीति से तत्काल हाइक की संभावना कम है। लेकिन लंबे युद्ध से अर्थव्यवस्था की ‘स्वीट स्पॉट’ खतरे में है। नागरिकों को ईंधन स्टॉकिंग और फाइनेंशियल प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए।









