
मिडिल ईस्ट में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की शुरुआत और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर ने वैश्विक बाजारों में भूचाल ला दिया है। जब दुनिया में युद्ध का साया मंडराता है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित हेवन में भागते हैं। परिणामस्वरूप, सोने के दामों में रिकॉर्ड तेजी आई, जबकि चांदी रिकॉर्ड हाई से करीब ₹20,000 की भारी गिरावट के साथ धड़ाम से लुढ़क गई। रात 11 बजे के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि आपकी जेब पर इसका सीधा असर पड़ा है।
सोने की ‘गोल्डन’ रैली
सोना आज निवेशकों का सबसे पसंदीदा दांव साबित हुआ। पिछले बंद भाव ₹1,62,104 के मुकाबले यह ₹1,66,254 पर बंद हुआ, यानी ₹4,150 या 2.5% की शानदार छलांग। दिन भर में इंट्राडे हाई ₹1,69,880 तक पहुंचा, जबकि लो ₹1,65,100 रहा- करीब ₹4,780 का उतार-चढ़ाव। यह तेजी युद्ध की अनिश्चितता से उपजी सुरक्षित निवेश की भारी मांग का नतीजा है। जनवरी 2026 की बजट के बाद की गिरावट को भुलााते हुए सोना फिर से राजा बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोना और चमक सकता है।
चांदी के हाई से क्रैश तक का सफर
चांदी के बाजार ने आज ट्रेडर्स को हैरान कर दिया। सुबह ₹2,88,441 के रिकॉर्ड हाई छूने के बाद यह रात 11 बजे ₹2,69,000 पर सिमट गई-₹5,998 की गिरावट और कुल ₹19,441 का नुकसान। इंट्राडे लो ₹2,67,684 रहा, यानी पूरे दिन ₹20,757 का रोलरकोस्टर। जनवरी में ट्रंप की फेड चेयर नियुक्ति से डॉलर मजबूत होने और प्रॉफिट बुकिंग के बाद अब युद्ध का डर चांदी पर भारी पड़ा।
औद्योगिक धातु होने से डॉलर की मजबूती इसे दबाती है, जबकि सोना सुरक्षित रहता है। जो सुबह ऊंचाई पर खरीदे, वे ₹20,000/किलो के घाटे में डूब गए।
बाजार डेटा: एक नजर में तुलना
| मेटल | पिछला बंद (₹) | आज का हाई (₹) | आज का लो (₹) | करंट प्राइस (₹) | बदलाव (₹) |
|---|---|---|---|---|---|
| सोना | 1,62,104 | 1,69,880 | 1,65,100 | 1,66,254 | +4,150 |
| चांदी | 2,74,998 | 2,88,441 | 2,67,684 | 2,69,000 | -5,998 |
हलचल के पीछे तीन बड़े कारण
- युद्ध का भय: अमेरिका-इजरायल का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और खामेनेई की मौत ने अनिश्चितता बढ़ाई। निवेशक सोने में पार्किंग कर रहे हैं, जिससे इसकी मांग 2.5% उछली।
- प्रॉफिट बुकिंग का तांडव: चांदी के ₹2.88 लाख हाई पर बड़े खिलाड़ी मुनाफा काटने लगे। जनवरी की ओवरबॉट स्थिति (RSI 80+) फिर दोहरी हो गई।
- डॉलर की ताकत: युद्ध के समय डॉलर इंडेक्स ऊंचा चढ़ा, जो चांदी जैसी इंडस्ट्रियल मेटल को नीचा दिखाता है। फेड की सख्त नीतियां भी असर डाल रही हैं।
निवेशकों के लिए सबक और भविष्य
यह बाजार पूरी तरह भू-राजनीति से संचालित दिखा। सोना लॉन्ग-टर्म में मजबूत, लेकिन चांदी की अस्थिरता (सोलर, AI डिमांड के बावजूद) चिंता का विषय। दिल्ली-NCR में ज्वैलर्स रिपोर्ट करते हैं कि खरीदारी बढ़ी, लेकिन ट्रेडर्स सतर्क। सलाह: बड़े निवेश से पहले MCX ट्रेंड चेक करें, डिप्स पर सोना लें, चांदी में इंतजार। वैश्विक तनाव बढ़ा तो सोना ₹1.70 लाख पार कर सकता है, पर चांदी ₹2.50 लाख तक लुढ़क भी सकती है। सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है।









