
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 31 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के लिए सोमवार का दिन बेहद अहम है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ ब्याज दर पर अंतिम फैसला होगा। पिछले दो वर्षों से 8.25% पर स्थिर चल रही इस दर को तीसरे साल भी यथावत रखने की प्रबल संभावना है, हालांकि वैश्विक बाजार की उथल-पुथल के बीच मामूली कटौती की आशंका भी जताई जा रही है।
होली का त्योहार नजदीक होने से मीडिया में इसे “होली गिफ्ट” करार दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ब्याज का क्रेडिट अप्रैल-जुलाई के बीच ही अकाउंट्स में आएगा। ईपीएफओ के पास कुल जमा राशि ₹25-28 लाख करोड़ से अधिक है, और 8.25% दर पर औसत सदस्य को ₹40,000 से ₹46,000 तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और रुझान
ईपीएफओ की ब्याज दरें पिछले वर्षों में उतार-चढ़ाव वाली रहीं। वित्त वर्ष 2024-25 में इसे 8.25% पर बढ़ाया गया था, जो 2023-24 के 8.15% और 2022-23 के 8.1% (चार दशक का न्यूनतम) से सुधार था। जुलाई 2025 तक 97% सदस्यों (लगभग 32 करोड़ खातों) के अकाउंट में FY24-25 का ब्याज क्रेडिट हो चुका था। इस बार स्टॉक मार्केट का कमजोर प्रदर्शन और सरकारी बॉन्ड यील्ड में गिरावट चुनौती है, क्योंकि ईपीएफओ का अधिकांश कोष बॉन्ड्स में निवेशित है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हवाले से सीबीटी सदस्य ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता से इक्विटी रिटर्न प्रभावित हुए हैं, जिससे आय में कमी आ सकती है। फिर भी, पिछले वित्त वर्ष का सरप्लस और नई ‘विकसित भारत रोजगार योजना’ से जुड़े लाखों नए सदस्यों के योगदान से कॉर्पस मजबूत है।
बैठक की पूरी प्रक्रिया
सोमवार को पहले इनवेस्टमेंट कमेटी की बैठक होगी, जहां आय-व्यय प्रोफाइल पर चर्चा के बाद ब्याज दर तय की जाएगी। उसके बाद मुख्य सीबीटी बैठक श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में होगी। मंजूरी के बाद वित्त मंत्रालय की स्वीकृति जरूरी है, जो आमतौर पर जल्दी मिल जाती है। अंत में, ब्याज मासिक गणना पर आधारित होकर सालाना क्रेडिट होता है।
आरबीआई की हालिया रेपो रेट कटौती के बावजूद छोटी बचत योजनाओं पर दरें अपरिवर्तित हैं, जो ईपीएफओ के लिए सकारात्मक संकेत है। नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस के अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने मांग की है कि सरप्लस का उपयोग कर दरें कम न की जाएं, ताकि श्रमिकों को लाभ मिले।
सदस्यों पर प्रभाव और सलाह
31 करोड़ सदस्यों के लिए यह दर सीधे तौर पर रिटर्न तय करेगी। ₹5 लाख बैलेंस पर 8.25% से ₹41,250 ब्याज बनेगा। ईपीएफओ 3.0 के तहत पोर्टल अपग्रेड, तेज क्लेम सेटलमेंट और ATM/UPI निकासी जैसी सुविधाएं भी चर्चा में हैं। सदस्य UMANG ऐप या EPFO पोर्टल पर UAN से पासबुक चेक करें, KYC अपडेट रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिरीकरण कोष बनाने से भविष्य में उतार-चढ़ाव कम होंगे। बैठक का फैसला मंगलवार तक स्पष्ट हो जाएगा, जो करोड़ों परिवारों की बचत को प्रभावित करेगा।









