
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर आज रविवार को रवि प्रदोष व्रत का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, खासकर जब सूर्य प्रदोष के संयोग से दुर्लभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, त्रिपुष्कर योग और प्रीति योग की युति से इस व्रत का फल दोगुना हो जाता है, जो भक्तों को सुख-समृद्धि, पाप नाश और आरोग्य प्रदान करता है। आइए, विस्तार से जानें आज के पंचांग की पूरी जानकारी, जिसमें शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि शामिल है।
दिन का महत्व और ग्रह-देवता
रविवार को सूर्यदेव का दिन कहा जाता है, जो यश, आत्मविश्वास और आत्मा के कारक हैं। इस दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर कुंडली में सूर्य को मजबूत किया जा सकता है। साथ ही, मां दुर्गा की पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन आज का मुख्य आकर्षण रवि प्रदोष व्रत है, जो शिव-पार्वती की आराधना का विशेष अवसर है। प्रदोष काल में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से कष्ट निवारण होता है। पुराणों में वर्णित है कि प्रदोष व्रत से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तिथि, नक्षत्र और योग विवरण
आज फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तिथि शाम 7:09 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी आरंभ हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो पुष्य नक्षत्र सुबह 8:34 बजे तक विद्यमान रहेगा, फिर आश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। योग के अंतर्गत शोभन योग दोपहर 2:32 बजे तक बनेगा, उसके बाद अतिगण्ड योग प्रारंभ होगा। करण में कौलव सुबह 7:54 बजे तक, तैतिल रात 7:09 बजे तक, फिर गर और वणिज करण रहेंगे।
सूर्य कुंभ राशि में और चंद्रमा पूरे दिन कर्क राशि में संचरण करेगा। सूर्योदय सुबह 6:52 बजे, सूर्यास्त शाम 6:26 बजे, चंद्रोदय दोपहर 4:32 बजे तथा चंद्रास्त कल सुबह 5:57 बजे होगा। ये समय दिल्ली के अनुसार हैं, अन्य शहरों में मामूली अंतर संभव है।
शुभ मुहूर्त और पूजा समय
रवि प्रदोष व्रत की पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 6:21 से 7:09 बजे तक है, जो लगभग 48 मिनट का दुर्लभ संयोग है। कुछ ज्योतिषियों के अनुसार यह समय 6:21 से रात 8:50 तक विस्तारित हो सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:16 से 1:02 बजे, अमृत काल सुबह 6:17 से 7:50 बजे तथा ब्रह्म मुहूर्त 5:15 से 6:03 बजे तक शुभ रहेगा। प्रदोष काल में शिवलिंग को स्नान कराकर दूध, बेलपत्र, फूल, चंदन और धतूरा चढ़ाएं। संकल्प लें, ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। व्रत फलाहार के साथ शाम तक रखें। इस संयोग से करियर वृद्धि और पारिवारिक सुख की कामना पूर्ण होती है।
राहुकाल और अशुभ समय से सावधान
आज राहुकाल शाम 4:59 से 6:26 बजे तक है, इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। यमगंड दोपहर 12:39 से 2:05 बजे, कुलिक 3:32 से 4:59 बजे तथा दुर्मुहूर्त शाम 4:53 से 5:39 बजे तक अशुभ है। वर्ज्यम रात 8:59 से 10:32 बजे तक रहेगा। इन समयों में पूजा या विवाह जैसे कार्य टालें। ज्योतिषी सलाह देते हैं कि राहुकाल में शिव मंत्र जाप से ही लाभ मिल सकता है।
रवि प्रदोष व्रत की विधि और लाभ
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिव मंदिर जाकर या घर पर शिव-पार्वती की स्थापना करें। प्रदोष काल में 16 प्रकार की पूजा करें, जिसमें रुद्राभिषेक प्रमुख है। कथा सुनें, जिसमें शिव-पार्वती विवाह की कहानी हो। पारण कल सुबह करें। विशेष मंत्र: “ॐ नमः शिवाय सर्वजनों को मोक्ष पथे नय नमः”। रवि प्रदोष से सूर्य दोष निवारण होता है, व्यापार में उन्नति मिलती है। सिंह, मकर आदि राशियों के लिए विशेष फलदायी है।
ज्योतिषीय प्रभाव और सूर्य उपाय
सूर्य कुंभ में होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। सूर्योदय पर जल अर्घ्य दें, गुड़-चने का दान करें। महिलाएं करवा चैथ जैसा व्रत रखकर पति की लंबी आयु चाहें। आधुनिक संदर्भ में, यह व्रत तनाव मुक्ति और मानसिक शांति देता है। देशभर के मंदिरों में भक्त उमड़ पड़े हैं।









