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फेंके जाने वाले आंवले के बीज से पतंजलि ने बनाया ‘सोना’, दुनिया ने माना आयुर्वेद का लोहा

पतंजलि ने आंवले के फेंके जाने वाले बीजों को सोने में बदल दिया! रिसर्च से साबित हुआ कि ये फल से भी पोषक हैं। 70,000+ किसानों को नई कमाई, जीरो-वेस्ट खेती को बल। हृदय, त्वचा, इम्यूनिटी के लिए उत्पाद बने, वैश्विक निर्यात बढ़ा। आयुर्वेद की ताकत ने दुनिया को माना लोहा।

By Pinki Negi

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पीढ़ियों से भारतीय घरों में आंवला को अमृत तुल्य माना जाता रहा है। इम्यूनिटी बूस्टर से लेकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने तक, इस फल की तासीर हर कोई गाता है। लेकिन फल के गूदे की चमक में एक हिस्सा हमेशा उपेक्षित रहा – आंवले का बीज। इसे कचरा समझकर फेंक दिया जाता था। अब यह पुरानी धारणा टूट चुकी है। पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट ने आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में इस ‘बेकार’ बीज को सोने में बदल दिया है।

आधुनिक वैज्ञानिक विधियों से की गई स्टडी ने साबित कर दिया कि बीज फल से भी ज्यादा पोषक है। नतीजा? 70,000 से अधिक किसानों को नई कमाई का जरिया मिला, जीरो-वेस्ट हर्बल खेती को बल और आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता।

रिसर्च ने उलटी की पुरानी सोच

पतंजलि के हरिद्वार स्थित रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिकों ने आंवले के बीज पर गहन अध्ययन किया। आमतौर पर आंवला प्रोसेसिंग के बाद बीज कचरे के ढेर में चले जाते थे। लेकिन स्टडी से खुलासा हुआ कि ये छोटे-छोटे बीज एंटीऑक्सीडेंट्स, क्वेरसेटिन, एलाजिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स, ओमेगा-3 फैटी एसिड, टैनिन, लिनोलिक एसिड, कैटेचिन, गैलिक एसिड और सैपोनिन्स से भरपूर हैं। फल के गूदे से कहीं ज्यादा न्यूट्रिएंट्स वाले ये बीज हृदय स्वास्थ्य, त्वचा पोषण, हार्मोन संतुलन, इम्यूनिटी बूस्टिंग और यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। आसान शब्दों में, ये एक पावरहाउस हैं जो प्रोटीन युक्त तेल प्रदान करते हैं।

इस खोज ने पतंजलि को कई आयुर्वेदिक उत्पाद विकसित करने का मौका दिया। आंवला सीड ऑयल कैप्सूल हृदय रोगियों के लिए, फाइटोन्यूट्रिएंट ऑयल स्किन-हेयर केयर के लिए, हर्बल टैबलेट्स तनाव व सूजन घटाने के लिए और स्पेशल सप्लीमेंट्स डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए लॉन्च किए गए। ये उत्पाद न सिर्फ भारत में हिट हैं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और साउथ-ईस्ट एशिया में निर्यात हो रहे हैं।

किसानों की किस्मत बदलने वाला ‘बीज क्रांति’

सबसे बड़ा असर ग्रामीण भारत पर पड़ा है। पहले किसान आंवले की फसल काटकर गूदा बेचते, बीज फेंकते। अब पतंजलि सीधे बीज खरीद रही है। उत्तराखंड, हिमाचल, राजस्थान समेत कई राज्यों में 75,000 से ज्यादा किसान परिवार इससे जुड़ चुके हैं। एक किसान ने बताया, “पहले बीज कचरा था, अब हर किलो के 20-30 रुपये मिल जाते हैं। सालाना लाखों का फायदा हो रहा।” इससे गांवों में आर्थिक उछाल आया, महिलाओं को घरेलू आय का स्रोत मिला।

यह मॉडल जीरो-वेस्ट हर्बल खेती को प्रोत्साहित कर रहा है। फल का कोई हिस्सा बर्बाद नहीं होता – गूदा जूस में, बीज उत्पादों में। नतीजा? ऑर्गेनिक कचरा कम, पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी का मजबूत उदाहरण। पतंजलि ने ऑर्गनाइज्ड सप्लाई चेन बनाई, जिससे किसानों को समय पर भुगतान और तकनीकी सहायता मिल रही।

राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी यह कामयाबी

पतंजलि की यह रिसर्च तीन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं – आर्थिक विकास, पर्यावरण स्थिरता और वैज्ञानिक नवाचार – को पूरा करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में यह इंजेक्शन है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूत बनाता है। पर्यावरणीय दृष्टि से, हर्बल सोर्सिंग सस्टेनेबल हो गई। साइंस के मोर्चे पर, 2024 में आंवला सीड एक्सट्रैक्ट फॉर्मूलेशन पर कई पेटेंट फाइल हुए। रिसर्च पेपर AYUSH, इंडियन जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट्स और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हर्बल रिसर्च में प्रकाशित हो चुके।

आयुष मंत्रालय, CSIR और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं ने इसे मान्यता दी। एक्सपर्ट्स कहते हैं, “यह आयुर्वेद को मॉडर्न वैलिडेशन देकर ग्लोबल लीडर बनाता है।” बाबा रामदेव की अगुवाई में पतंजलि ने साबित किया कि देसी ज्ञान, जब साइंस से जुड़े, तो विश्व स्तरीय हेल्थ सॉल्यूशन दे सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

अब पतंजलि आंवला बीज को फंक्शनल फूड्स और कॉस्मेटिक्स में विस्तार दे रही। निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा कमाई हो रही। किसानों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहे, जिससे उत्पादन दोगुना हो सकता है। लेकिन चुनौतियां भी हैं- बड़े पैमाने पर क्वालिटी कंट्रोल और फेक प्रोडक्ट्स से सावधानी।

कुल मिलाकर, आंवला बीज की यह कहानी वेस्ट-टू-वेल्थ का जीता-जागता उदाहरण है। पतंजलि ने न सिर्फ आयुर्वेद का लोहा मनवाया, बल्कि लाखों जिंदगियों को छुआ। यह साबित करता है कि छोटी सी खोज बड़े बदलाव ला सकती है। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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