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Indian Developers को बड़ा झटका! अचानक क्यों ब्लॉक हुआ Supabase? जानें असली वजह

भारत में ओपन‑सोर्स डेवलपर प्लेटफॉर्म Supabase पर सरकार ने 24 फरवरी को IT Act की धारा 69A के तहत आंशिक ब्लॉक लगा दिया, जिससे Jio, Airtel और अन्य नेटवर्क्स पर ऐप्स लाग‑बाग हो गए। सरकार ने अभी तक कारण साफ नहीं किया, जिससे डेवलपर्स में अनिश्चितता और घबराहट बढ़ गई है।

By Pinki Negi

Indian Developers को बड़ा झटका! अचानक क्यों ब्लॉक हुआ Supabase? जानें असली वजह

अगर आप भारत में रहते हुए web या mobile ऐप बनाते हैं, तो पिछले 48–72 घंटों में आपको एक अजीब‑सी जगह पर भी तकनीकी दिक्कत आ गई होगी: Supabase का लोड नहीं होना, API टाइम‑आउट, लॉगिन‑फेल और डेटाबेस‑कनेक्शन टूटना। इसका कारण यह नहीं कि कोई बड़ी ग्लोबल downtime हुई है, बल्कि भारत सरकार के एक आदेश के बाद देश के कई प्रमुख इंटरनेट नेटवर्क्स पर यह ओपन‑सोर्स डेवलपर प्लेटफॉर्म आंशिक रूप से ब्लॉक हो गया है।

Supabase क्या है और भारत में इतना अहम क्यों?

2020 में शुरू किया गया Supabase एक open‑source backend प्लेटफॉर्म है, जो Google Firebase के लिए “सबसे बड़ा विकल्प” माना जाता है। यह PostgreSQL डेटाबेस पर चलता है और developers को authentication, real‑time updates, storage और server‑side functions जैसी सुविधाएँ एक ही रूफ के नीचे देता है। आजकल AI‑बेस्ड ऐप्स, ‘vibe‑coding’ के ट्रेंड और low‑code tools के बढ़ते ज़माने में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है।

इसका वैल्यूएशन अब लगभग 5 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है और इसकी user‑बेस में भारत एक प्रमुख बाजार के रूप में उभरा है। यही कारण है कि जब भारत में इसका ऐक्सेस बाधित होता है, तो सीधे तौर पर स्टार्टअप्स, indie डेवलपर्स और प्रोडक्शन ऐप्स के लाखों यूजर्स प्रभावित हो जाते हैं।

24 फरवरी का आदेश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 फरवरी 2026 को भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत Supabase की वेबसाइट और core डोमेन्स पर public access रोकने का आदेश जारी किया। यह वही कानूनी ढांचा है जिससे पहले भी देश में टिकटॉक, PUBG, वीचैट जैसे ऐप्स या कई अन्य वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाया गया था। आदेश के बाद Reliance Jio, Bharti Airtel और ACT Fibernet जैसे बड़े internet service providers ने Supabase की official वेबसाइट supabase.co और उससे जुड़े DNS रिकॉर्ड्स पर ब्लॉक लगा दिया, जिससे उन नेटवर्क्स पर इसकी services लोड नहीं हो पा रहीं।

हालाँकि, यह बिल्कुल “full‑country, full‑platform” बैन नहीं लगता। उदाहरण के लिए, नई दिल्ली में कई Jio और Airtel यूजर्स को अब भी 404 या connection‑failed गलतियाँ आ रही हैं, जबकि बंगलूरू या अन्य शहरों के कुछ नेटवर्क्स पर Supabase अभी भी खुल रहा है। यानी ब्लॉकिंग अलग‑अलग ISPs और शहरों में असमान तरीके से लागू हुई है, जिससे यूजर्स को खुद‑से भी यह समझ पाना मुश्किल हो गया है कि यह “सर्वर‑डाउन” है या “नेटवर्क‑ब्लॉक”।

सरकार की तरफ से अभी तक ‘साफ’ वजह नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस प्लेटफॉर्म को रोकने की वजह क्या है? सरकार ने अभी तक इस कदम का कोई सार्वजनिक आधार नहीं बताया है। ना ही यह स्पष्ट किया गया है कि यह कदम साइबर सुरक्षा के खतरे, कॉपीराइट उल्लंघन, या किसी तीसरे‑पक्ष कंटेंट‑आधारित शिकायत के चलते उठाया गया है। इसी अनिश्चितता के कारण टेक कम्युनिटी में गुस्सा, घबराहट और चर्चा दोनों ही बढ़ रही है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि Section 69A आमतौर पर “consumer‑फेसिंग” ऐप्स या वेबसाइट्स पर लागू किया जाता था, लेकिन Supabase एक backend infrastructure layer है, जिस पर सैकड़ों–हज़ारों भारतीय स्टार्टअप्स और सरकारी‑संबंधित प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इस तथ्य को देखते हुए इस तरह के ब्लॉक को अनिवार्य रूप से “over‑broad” और अनप्रेडिक्टेबल माना जा रहा है।

डेवलपर्स और स्टार्टअप्स पर ‘क्रिटिकल इम्पैक्ट’

इस आंशिक रोक ने भारतीय टेक और स्टार्टअप ईकोसिस्टम को बड़ा झटका दिया है। कई early‑stage और mid‑stage स्टार्टअप्स Supabase को अपना मुख्य डेटाबेस और authentication layer बनाए हुए थे। ब्लॉक के बाद ऐप्स में लॉगिन फेल हो गए, नए यूजर साइन‑अप बंद हो गए और कई कंपनियों का कामकाज लगभग ठप पड़ गया। कुछ डेवलपर्स ने बताया कि उन्हें अचानक production‑सर्वर की जगह development‑सर्वर पर रोल‑बैक करना पड़ा, जिससे लाइव डेटा और रियल‑टाइम सर्विसेज दोनों ही डिग्रेड हुईं।

Supabase ने अपने user फोरम और सोशल मीडिया पर इस समस्या को स्वीकार किया और भारतीय यूजर्स को तात्कालिक तौर पर DNS बदलने, VPN या third‑party टनल‑सेविस का उपयोग करने जैसे विकल्प सुझाए। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये उपाय रियल‑टाइम ऐप्स या बड़े स्केल‑अवेयर सिस्टम के लिए व्यावहारिक नहीं हैं; ये ज्यादातर temporary workarounds हैं, स्थायी solution नहीं।

डेवलपर्स के बीच जोखिम और विश्वास की चिंता

इस घटना का एक बड़ा असर यह भी है कि भारतीय डेवलपर्स अब अपने कोर इंफ्रास्ट्रक्चर डिपेंडेंसी को लेकर ज्यादा संदेहवादी हो रहे हैं। इससे पहले भी 2014 और 2023 में GitHub जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर भारत में अस्थाई रोक लग चुकी है, जिससे डेवलपर्स को यह याद है कि एक राष्ट्रीय नीति जिस तरह से बदल सकती है, वह किसी भी विदेशी‑होस्टेड टेक प्लेटफॉर्म के लिए जोखिम लेकर आ सकती है।

इसीलिए अब कई टीमें ज़्यादा ध्यान दे रही हैं multi‑cloud architecture, self‑hosted PostgreSQL‑based backends और on‑premise या भारतीय डेटा‑सेंटर‑बेस्ड hosting की तरफ, ताकि एक single ब्लॉकिंग आदेश से पूरा ecosystem न बह जाए।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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