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हड्डियां जमा देने वाली ठंड! भारत की वो जगह जहाँ -60 डिग्री में भी रहते हैं लोग

उत्तर भारत में शीतलहर का कहर बरपा है। लद्दाख का द्रास, दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी बसी जगह (-60°C तक), जहां 22,000 लोग हिमालय की चोटियों के बीच जीवंत जीवन जीते हैं। पत्थर के घर, 'पो' चाय और अकूत हिम्मत से वे प्रकृति से जंग लड़ते हैं। कारगिल की गौरवगाथा और जोजी ला टनल से नई उम्मीदें।

By Pinki Negi

हड्डियां जमा देने वाली ठंड! भारत की वो जगह जहाँ -60 डिग्री में भी रहते हैं लोग

उत्तर भारत में इन दिनों शीतलहर का प्रकोप चरम पर है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में तापमान शून्य से नीचे लुढ़क गया है, तो वहीं हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी ने सामान्य जीवन ठप कर दिया है। ऐसे में सर्दी के शौकीनों के मन में एक सवाल उठना लाजमी है- भारत का सबसे ठंडा स्थान कौन सा है, जहां इंसानी बस्तियां भी फल-फूल रही हों? जवाब है लद्दाख का द्रास। दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी आबादी वाली जगह, जहां सर्दियों में पारा -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, फिर भी करीब 22,000 लोग हिमालय की गोद में बसे इस गांव में जीवंत जीवन जी रहे हैं।

उत्तर भारत में शीतलहर का प्रकोप

द्रास, कारगिल जिले में जोजी ला दर्रे के निकट समुद्र तल से 3300 मीटर ऊंचाई पर बसा है। इसे ‘लद्दाख का प्रवेश द्वार’ कहा जाता है, क्योंकि यह कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। लेह-कारगिल हाईवे पर स्थित यह गांव हिमालयी चोटियों से घिरा होने के कारण बर्फीली हवाओं का शिकार बनता है। जनवरी 1995 में यहां रिकॉर्ड -60 डिग्री का तापमान दर्ज किया गया था, जो इसे रूस के ओयम्याकोन (दुनिया की सबसे ठंडी बसी जगह) के बाद दूसरे नंबर पर ला खड़ा करता है।

सर्दियां अक्टूबर से अप्रैल तक चलती हैं, जब औसत तापमान -20 से -40 डिग्री के बीच रहता है। बर्फबारी इतनी मोटी होती है कि सड़कें महीनों बंद रहती हैं और सांस लेते हुए फेफड़े जकड़ जाते हैं।​

द्रास का स्थान और ठंड का रिकॉर्ड

द्रास के निवासी मुख्य रूप से शिना भाषी दारदिक समुदाय से हैं। ये लोग प्रकृति की कठोरता से जूझने में माहिर हैं। उनके घर पत्थर की मोटी दीवारों और लकड़ी के बीमों से बने होते हैं, जो ठंड को बाहर रखते हैं। अंदर चूल्हों में सूखी लकड़ी और याक के गोबर से आग जलाकर गर्मी बनाए रखते हैं। ऊनी पश्मीना, भेड़ के बालों से बने कपड़े और पारंपरिक ‘गो’ नामक लबादे उनकी पहली रक्षा रेखा हैं। सर्दी से पहले वे महीनों का राशन- ईंधन जमा कर लेते हैं। गर्मियों में जौ, गेहूं और सब्जियां उगाते हैं, जबकि पशुपालन (याक, भेड़) उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। महिलाएं ऊन कातती हैं, पुरुष पर्यटन और सेना से जुड़े काम करते हैं।

द्रासवासियों की जिंदगी

हालांकि, जीवन आसान नहीं। ठंड से निपटने के लिए वे ‘पो’ नामक चाय पीते हैं, जिसमें याक का दूध, नमक और मक्खन मिला होता है। बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन बर्फीले तूफानों में घरों में कैद हो जाते हैं। स्वास्थ्य समस्याएं आम हैं- फ्रॉस्टबाइट, जोड़ों का दर्द और सांस की बीमारियां। फिर भी, इनकी सहनशक्ति प्रेरणादायक है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “ठंड यहां खून में घुली है। हम इसे सहते हैं, क्योंकि ये हमारी धरती है।” पर्यटन बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। गर्मियों में ट्रेकर्स और साहसिक प्रेमी द्रास आते हैं, जो स्थानीय होटलों और गाइड्स को रोजगार देते हैं।​

चुनौतियां और आशाएं

द्रास को ‘भारत का शीत मरुस्थल’ भी कहा जाता है, क्योंकि गर्मियां छोटी होती हैं और अधिकांश समय बर्फ ही बर्फ नजर आती है। सीमा पर होने से भारतीय सेना की मौजूदगी मजबूत है। जवान यहां -40 डिग्री में भी ड्यूटी निभाते हैं, जो देश की सुरक्षा का प्रतीक है। 1999 के कारगिल युद्ध ने द्रास को अमर कर दिया। सरकार ने सड़कें, बिजली और स्वास्थ्य केंद्र बेहतर किए हैं। बीआरओ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) जोजी ला टनल बना रही है, जो साल भर कनेक्टिविटी देगी।

फिर भी, जलवायु परिवर्तन खतरा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जो पानी की कमी पैदा कर सकता है। कोविड के बाद पर्यटन सुस्त पड़ा, लेकिन अब रिकवरी हो रही है। द्रास साबित करता है कि इंसान प्रकृति की किसी भी मार को झेल सकता है। जब पूरे देश में हीटिंग चालू हो रही है, वहीं द्रास के लोग बिना शिकायत जी रहे हैं। ये उनकी हिम्मत का सलाम है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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