
गरीबों को मुफ्त अनाज देने वाली प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) में अब चावल सादा मिलेगा। केंद्र सरकार ने योजना के तहत वितरित चावल में पोषक तत्व मिलाने (फोर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह फैसला आईआईटी खड़गपुर की एक वैज्ञानिक रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें लंबे भंडारण से पोषक तत्वों के नष्ट होने की बात सामने आई।
सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया है, ताकि चावल की गुणवत्ता बनी रहे। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान के अनुसार, गोदामों में दो-तीन साल तक रखे चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे तत्वों की मात्रा घट जाती है। इससे न केवल पोषण का उद्देश्य विफल हो रहा था, बल्कि अनाज की शेल्फ लाइफ भी प्रभावित हो रही थी।
PMGKAY योजना का महत्व
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई थी। इसके तहत देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को हर महीने 5 किलो मुफ्त गेहूं या चावल और 1 किलो दाल दी जाती है। योजना का लक्ष्य कुपोषण दूर करना था, इसलिए 2021 से चावल में फोर्टिफिकेशन शुरू किया गया। लेकिन अब यह सुविधा रुक गई है। अन्य योजनाओं जैसे मिड-डे मील, आंगनवाड़ी और राज्य स्तर की राशन वितरण प्रणाली भी प्रभावित हुई हैं।
राशन कार्ड धारक अब सादा चावल पाएंगे, लेकिन मात्रा में कोई कटौती नहीं होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि अनाज की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में सरकारी भंडारों में 674 लाख टन चावल मौजूद है, जबकि सालाना जरूरत 372 लाख टन है।
IIT खड़गपुर रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
आईआईटी खड़गपुर को विभिन्न मौसमों और गोदाम स्थितियों में फोर्टिफाइड चावल की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। रिपोर्ट में पाया गया कि तापमान, नमी, पैकिंग और परिवहन के कारण पोषक तत्व 20-30% तक कम हो जाते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लंबे भंडारण से चावल जल्दी खराब हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
उदाहरण के लिए, उमस भरी जलवायु वाले क्षेत्रों में विटामिन तेजी से नष्ट होते हैं। रिपोर्ट ने सिफारिश की कि फोर्टिफिकेशन तभी जारी रखा जाए, जब मजबूत वितरण चेन तैयार हो। यह अध्ययन न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के हवाले से सामने आया, जो सरकारी स्रोतों पर आधारित है।
भंडारण की चुनौतियां
भारत में राशन अनाज का अधिकांश स्टॉक FCI (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के गोदामों में रखा जाता है। खरीफ फसल के बाद चावल 2-3 साल तक पड़ा रहता है, क्योंकि वितरण धीमा होता है। फोर्टिफाइड चावल की कीट-नाशक संवेदनशीलता भी समस्या बढ़ाती है। सरकार ने 2024-25 में 50% अनाज फोर्टिफाइड करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन गुणवत्ता चिंताओं ने इसे रोका।
खाद्य मंत्रालय की प्रतिक्रिया
मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “यह अस्थायी रोक है। नई तकनीक विकसित होने तक जारी रहेगी।” भविष्य में बेहतर पैकेजिंग या विकेंद्रीकृत फोर्टिफिकेशन पर काम होगा। राशन दुकानों, स्कूल भोज और आंगनवाड़ी पर वितरण सामान्य रहेगा। लाभार्थी घबराएं नहीं।
अन्य राशन कार्ड अपडेट्स
इस बीच, 1 मार्च 2026 से BPL और अंत्योदय राशन कार्ड पर e-KYC अनिवार्य हो गया है। आधार लिंकिंग न करने पर नाम कट सकता है। देहरादून जैसे शहरों में जागरूकता अभियान चल रहे हैं। फर्जी लाभार्थियों को हटाने से वास्तविक जरूरतमंदों को फायदा होगा।
भविष्य की संभावनाएं
सरकार अब वैकल्पिक पोषण वितरण पर फोकस कर रही है, जैसे विटामिन सप्लीमेंट या नई तकनीक। पोषण अभियान को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में प्रावधान हो सकता है। यह फैसला कल्याणकारी योजनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। गरीब परिवारों के लिए चावल का सादा होना निराशाजनक है, लेकिन गुणवत्ता सुनिश्चित करना सराहनीय है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में यह सही कदम साबित होगा।









