
इनकम टैक्स के नए नियमों (Income Tax Act, 2025) के तहत अब घर भाड़ा भत्ता यानी HRA क्लेम करना पहले जैसा नहीं रहेगा। सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए केवल किराए की रसीद देना काफी नहीं होगा। अब आपको नए ‘फॉर्म 124’ में स्पष्ट रूप से यह जानकारी देनी होगी कि आपका मकान मालिक के साथ क्या संबंध या रिश्ता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और किराए के नाम पर होने वाले फर्जी दावों पर लगाम लगाना है, जिससे टैक्स प्रणाली में और अधिक पारदर्शिता आएगी।
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार का नया कदम
अब तक कर्मचारी अपने रिश्तेदारों को मकान मालिक दिखाकर और केवल किराए की रसीदें जमा करके आसानी से HRA पर टैक्स छूट ले लेते थे। लेकिन सरकार ने पाया कि कई मामलों में बिना वास्तव में किराया दिए, सिर्फ टैक्स बचाने के लिए फर्जी दावे किए जा रहे हैं।
इसी टैक्स चोरी को रोकने के लिए अब नियमों को कड़ा कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत, अब कर्मचारी को अनिवार्य रूप से यह बताना होगा कि उसका मकान मालिक के साथ क्या रिश्ता है। इस पारदर्शिता से सरकार असली और फर्जी किराएदारों के बीच फर्क कर सकेगी।
HRA क्लेम के लिए अब देनी होगी ये 4 जरूरी जानकारियां
नए नियमों के तहत, अब टैक्स छूट पाने के लिए आपको फॉर्म 124 में निम्नलिखित विवरण स्पष्ट रूप से भरने होंगे:
- मकान मालिक का नाम: आपको उस व्यक्ति का पूरा नाम लिखना होगा जिसे आप किराया दे रहे हैं।
- मकान मालिक का पता: किराए पर लिए गए घर का पूरा और सटीक पता देना अनिवार्य है।
- मकान मालिक का PAN: यदि आप तय सीमा से अधिक किराया देते हैं, तो मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर देना जरूरी होगा।
- मकान मालिक से रिश्ता: आपको यह स्पष्ट करना होगा कि मकान मालिक आपका क्या लगता है (जैसे- पिता, माता, पति/पत्नी, भाई/बहन, या कोई अन्य रिश्तेदार)। यदि कोई रिश्ता नहीं है, तो ‘कोई नहीं’ का विकल्प चुनना होगा।
HRA के नए नियम
सरकार ने इनकम टैक्स के इन नए नियमों का मसौदा (Draft) सार्वजनिक कर दिया है और इन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में ये नियम अभी ‘ड्राफ्ट’ स्टेज पर हैं, जिसका अर्थ है कि सरकार अभी इन पर विचार कर रही है। अगले महीने तक इन नियमों को अंतिम रूप देकर आधिकारिक तौर पर अधिसूचित (Notify) किया जा सकता है। अंतिम अधिसूचना में कुछ छोटे-मोटे बदलावों की संभावना भी बनी हुई है, इसलिए टैक्सपेयर्स को आने वाले सरकारी आदेशों पर नजर रखनी चाहिए।
HRA के नए नियमों से किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
सरकार के इस फैसले का सीधा प्रभाव उन सभी नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा जो अपनी सैलरी में HRA (घर भाड़ा भत्ता) का लाभ लेते हैं। विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों को अधिक ध्यान देने की जरूरत होगी:
- सैलरी वाले कर्मचारी: वे सभी कर्मचारी जो किराए के मकान में रहते हैं और टैक्स बचाने के लिए HRA क्लेम करते हैं, उन्हें अब अधिक जानकारी साझा करनी होगी।
- रिश्तेदारों को किराया देने वाले: यह बदलाव सबसे ज्यादा उन लोगों को प्रभावित करेगा जो अपने माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदारों के नाम पर रसीदें बनवाकर टैक्स छूट लेते हैं।
- अनिवार्य खुलासा: अब तक कर्मचारी को मकान मालिक के साथ अपने संबंध बताने की जरूरत नहीं होती थी, लेकिन अब रिश्ता बताना अनिवार्य होगा, जिससे विभाग के लिए जांच करना आसान हो जाएगा।
- फर्जी क्लेम करने वाले: जो लोग वास्तव में किराया नहीं देते लेकिन केवल टैक्स बचाने के लिए फर्जी रसीदों का सहारा लेते हैं, उनके लिए अब मुश्किल बढ़ सकती है।
HRA के कड़े नियमों के पीछे क्या है सरकार की सोच?
सरकार द्वारा इन नए नियमों को लागू करने के पीछे के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- फर्जी दावों पर लगाम: कई लोग बिना किराया चुकाए केवल टैक्स बचाने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल करते हैं, जिसे रोकना सरकार की प्राथमिकता है।
- पारदर्शिता में सुधार: टैक्स सिस्टम को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाना ताकि हर क्लेम का सही हिसाब हो सके।
- सटीक जांच: मकान मालिक के साथ रिश्ता उजागर होने से आयकर विभाग के लिए यह सत्यापित करना आसान हो जाएगा कि लेनदेन वास्तविक है या नहीं।
- टैक्स चोरी की पहचान: विभाग अब यह आसानी से ट्रैक कर पाएगा कि किराए के रूप में दी गई राशि क्या मकान मालिक की इनकम में दिखाई गई है, जिससे टैक्स चोरी पकड़ना सरल होगा।
अब बरतनी होगी ये सावधानियां
अगर आप टैक्स बचाने के लिए HRA क्लेम करते हैं, तो 1 अप्रैल 2026 से इन बातों का ध्यान रखें:
- रिश्ते का खुलासा: मकान मालिक के साथ अपना संबंध बताना अब अनिवार्य होगा।
- बैंक ट्रांसफर: किराए का भुगतान बैंक के जरिए करें ताकि आपके पास पक्का सबूत रहे।
- डेटा मिलान: आपका किराया और मकान मालिक द्वारा दिखाई गई ‘रेंट इनकम’ एक समान होनी चाहिए।
- दस्तावेज: रेंट एग्रीमेंट और पैन (PAN) की जानकारी सही-सही भरें।
- जुर्माने से बचाव: गलत जानकारी देने पर आयकर विभाग का नोटिस या भारी जुर्माना मिल सकता है।









