
अगर आपका भी कोई पुराना पीएफ अकाउंट है जिसे आपने कम बैलेंस होने के कारण छोड़ दिया था, तो केंद्र सरकार आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी लाई है। ईपीएफओ (EPFO) अब उन लाखों खातों का पैसा वापस करने की तैयारी कर रहा है जो सालों से बंद या निष्क्रिय पड़े हैं। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है कि छोटे बैलेंस वाले खातों की राशि सीधे उनके सही मालिकों तक पहुँचाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों की मेहनत की कमाई उन तक सुरक्षित रूप से पहुँच सके।
लावारिस पीएफ फंड की वापसी
ईपीएफओ (EPFO) के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान में लगभग 31.86 लाख खातों में ₹10,903 करोड़ की ‘लावारिस’ राशि जमा है। सरकार ने इस भारी-भरकम राशि को उसके असली हकदारों तक पहुँचाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। पहले चरण में उन 7.11 लाख खातों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें ₹1,000 तक की छोटी राशि जमा है। इन खातों में कुल ₹30.52 करोड़ फंसे हुए हैं। यह पैसा सीधे उन खाताधारकों को मिलेगा जिनके पीएफ खाते आधार (Aadhaar) से लिंक हैं और जिनकी बैंक डिटेल्स ईपीएफओ के पास पहले से अपडेटेड हैं।
आखिर क्यों लावारिस पड़े हैं करोड़ों रुपये?
पीएफ नियमों के अनुसार, यदि किसी खाते में लगातार 36 महीनों (3 साल) तक कर्मचारी या कंपनी की तरफ से कोई अंशदान जमा नहीं किया जाता, तो उसे ‘इनऑपरेटिव’ या बंद मान लिया जाता है। ईपीएफओ के पास ऐसे कई खाते हैं जो 20 साल से भी अधिक पुराने हैं। अक्सर कर्मचारी कम बैलेंस होने की स्थिति में कागजी कार्रवाई और भागदौड़ से बचने के लिए पैसा नहीं निकालते, जिससे धीरे-धीरे यह लावारिस फंड हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आसान बनाकर लोगों का पैसा उन तक पहुँचाने की कोशिश कर रही है।
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— ET NOW (@ETNOWlive) February 23, 2026
सरकार देगी ₹25,000 की मेरिट स्कॉलरशिप
श्रम मंत्रालय ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। अब होनहार छात्रों को उनकी पढ़ाई के लिए ₹25,000 तक की मेरिट स्कॉलरशिप दी जाएगी। सरकार ने नियमों को और भी आसान बना दिया है, जिससे अब छात्र इस स्कॉलरशिप के साथ-साथ राज्य या केंद्र की अन्य छात्रवृत्तियों का फायदा भी एक साथ उठा सकेंगे। इस साल अब तक लगभग 1.6 लाख छात्रों के खातों में ₹77.9 करोड़ की सहायता भेजी जा चुकी है। यह कदम न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि गरीब परिवारों का भविष्य भी संवारेगा।









