
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाने के लिए मैक्सिको सरकार ने एक शानदार फैसला लिया है। वहां अब हफ्ते में 48 घंटे के बजाय सिर्फ 40 घंटे ही काम करना होगा। यह नया नियम 2027 से धीरे-धीरे लागू होगा और 2030 तक पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि काम के घंटे कम होने पर भी कर्मचारियों की सैलरी या अन्य फायदों में कोई कटौती नहीं की जाएगी, और उन्हें हफ्ते में एक दिन की पेड छुट्टी भी मिलेगी।
अब 40 घंटे का होगा कार्य सप्ताह
मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की सरकार ने श्रमिकों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए कार्य सप्ताह को 48 घंटे से घटाकर 40 घंटे करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव को संसद के दोनों सदनों (सीनेट और चैंबर ऑफ डेप्युटीज) ने भारी बहुमत से पास किया है।
हालांकि व्यापारिक संगठनों के विरोध के कारण इसमें कुछ देरी हुई, लेकिन अब यह तय हो गया है कि कर्मचारियों को हफ्ते में कम काम करना होगा और उन्हें सवैतनिक अवकाश (Paid Leave) की गारंटी भी मिलेगी। यह सुधार धीरे-धीरे लागू किया जाएगा ताकि अर्थव्यवस्था और कामगारों दोनों को इसका सही लाभ मिल सके।
मैक्सिको में कार्य घंटों में बदलाव की समय सीमा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्सिको में काम के घंटों को कम करने की प्रक्रिया 2027 से शुरू होकर 2030 तक पूरी की जाएगी। इस योजना के तहत हर दो साल में काम के घंटों में थोड़ी-थोड़ी कटौती की जाएगी, ताकि अंत में हफ्ते में 48 के बजाय केवल 40 घंटे ही काम करना पड़े। इससे कर्मचारियों को हफ्ते में 5 दिन काम और 2 दिन की छुट्टी मिल सकेगी। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब तक मैक्सिकन श्रमिकों को हफ्ते में 6 दिन काम करने के बाद मिलने वाली छुट्टी के पैसे नहीं मिलते थे, लेकिन अब उन्हें कानूनन साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश (Paid Leave) का लाभ भी मिलेगा।
मैक्सिको में नए श्रम नियम
राष्ट्रपति शीनबाम द्वारा समर्थित इस नए विधेयक के जरिए मैक्सिको के श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब कर्मचारियों को हर छह दिन के काम के बाद सवैतनिक अवकाश (Paid Leave) मिलना अनिवार्य होगा। साथ ही, युवाओं की सुरक्षा के लिए 18 वर्ष से कम उम्र के श्रमिकों से ओवरटाइम कराने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
ओवरटाइम करने वाले अन्य कर्मचारियों के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं; अब एक हफ्ते में अधिकतम 12 घंटे ही ओवरटाइम लिया जा सकेगा। मुआवजे के मामले में भी राहत दी गई है—दोगुने ओवरटाइम के लिए 100% और तिगुने ओवरटाइम के लिए 200% अतिरिक्त वेतन देना नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य होगा।
लैटिन अमेरिका में कार्य संस्कृति का नया बदलाव
मैक्सिको के इस ऐतिहासिक फैसले ने उसे चिली और कोलंबिया जैसे प्रगतिशील लैटिन अमेरिकी देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, जो पहले ही अपने यहाँ काम के घंटों को कम कर चुके हैं। इस क्षेत्र में कामगारों की भलाई के लिए एक बड़ी लहर चल रही है, जिसका असर ब्राजील में भी देखा जा रहा है। वहां के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने भी अपने चुनाव अभियान के दौरान इसी तरह के श्रम सुधारों का समर्थन किया है। यह दिखाता है कि पूरे लैटिन अमेरिका में अब श्रमिकों के ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ और उनके अधिकारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
श्रम सुधारों पर छिड़ी बहस
राष्ट्रपति शीनबाम की सरकार के इस श्रमिक-समर्थक फैसले पर मैक्सिको में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। जहाँ सरकार इसे कर्मचारियों की भलाई के लिए ऐतिहासिक मान रही है, वहीं व्यापारिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया है।
उनका तर्क है कि काम के घंटे कम करने से कंपनियों पर आर्थिक बोझ (Labor Cost) बढ़ेगा और देश की उत्पादकता (Productivity) में कमी आएगी। दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने भी इस सुधार की आलोचना की है, लेकिन उनका रुख अलग है; वे मांग कर रहे हैं कि विधेयक में हर हफ्ते स्पष्ट रूप से दो दिन की छुट्टी का प्रावधान शामिल किया जाना चाहिए ताकि श्रमिकों को और अधिक राहत मिल सके।









