
पूरी दुनिया में जहाँ साल के 12 महीने होते हैं, वहीं इथियोपिया (Ethiopia) एक ऐसा देश है जिसके कैलेंडर में साल के 13 महीने होते हैं। इतना ही नहीं, यह देश तकनीकी रूप से दुनिया के बाकी देशों से करीब 7 से 8 साल पीछे चलता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इथियोपिया आज भी अपने प्राचीन ‘ऑर्थोडॉक्स कैलेंडर’ का पालन करता है, जबकि बाकी दुनिया ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ का इस्तेमाल करती है। यहाँ 12 महीने 30-30 दिनों के होते हैं और आखिरी 13वां महीना (जिसे पागुमे कहा जाता है) केवल 5 या 6 दिनों का होता है।
इथियोपिया का अनोखा कैलेंडर
दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग, इथियोपिया अपना खुद का प्राचीन कैलेंडर इस्तेमाल करता है। जहाँ हम 12 महीनों का साल मानते हैं, वहाँ साल में 13 महीने होते हैं। इस कैलेंडर के पहले 12 महीने पूरे 30-30 दिनों के होते हैं, जबकि आखिरी 13वां महीना (पागुमे) सिर्फ 5 या 6 दिनों का होता है। इसी गणना के कारण इथियोपिया का समय दुनिया के बाकी देशों से लगभग 7-8 साल पीछे चलता है। जब पूरी दुनिया 2026 में है, तो वहाँ का कैलेंडर अभी भी साल 2018-19 के आसपास ही होगा।
दुनिया से अलग अपनी पहचान और अपनी गणना
अफ्रीकी देश इथियोपिया की सबसे बड़ी खासियत उसका अपना ‘इथियोपियाई कैलेंडर’ है। यह देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय अपने प्राचीन कैलेंडर को प्राथमिकता देता है। इसी स्वतंत्र गणना की वजह से वहाँ के साल, महीने और तारीखें बाकी दुनिया से मेल नहीं खातीं। यह कैलेंडर न केवल महीनों की संख्या में अलग है, बल्कि ईसा मसीह के जन्म की गणना को लेकर भी दुनिया के अन्य कैलेंडर्स से भिन्न मत रखता है।
थियोपियाई कैलेंडर का वो खास 13वां महीना
इथियोपिया में समय की गणना का तरीका बेहद दिलचस्प है। यहाँ साल के पहले 12 महीने ठीक 30-30 दिनों के होते हैं। इसके बाद साल के बचे हुए दिनों को जोड़कर एक छोटा 13वां महीना बनाया जाता है, जिसे ‘पगुमे’ (Pagume) कहते हैं। सामान्य वर्षों में इस महीने में केवल 5 दिन होते हैं, जबकि लीप ईयर (Leap Year) के दौरान इसमें 6 दिन होते हैं। इस तरह साल के कुल दिनों की संख्या तो 365 या 366 ही रहती है, बस उन्हें बांटने का तरीका बदल जाता है।
अभी 2026 नहीं, 2018 में जी रहा है यह देश
इथियोपिया दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जो वर्तमान समय से 7-8 साल पीछे चल रहा है। जब पूरी दुनिया साल 2026 का स्वागत कर रही है, तब इथियोपियाई कैलेंडर के अनुसार वहां अभी 2018 चल रहा है। इस अंतर की मुख्य वजह ईसा मसीह के जन्म की तारीख की अलग गणना है। जहां ग्रेगोरियन कैलेंडर में ईसा मसीह का जन्म 1 ईस्वी माना गया, वहीं इथियोपियाई चर्च का मानना है कि उनका जन्म उससे 7-8 साल बाद हुआ था। इसी धार्मिक मान्यता के कारण उनका समय आज भी दुनिया से पीछे है।
क्यों 11 सितंबर को मनाया जाता है इथियोपिया का नया साल?
इथियोपिया आज भी प्राचीन जूलियन कैलेंडर (Julian Calendar) का पालन करता है, जबकि दुनिया के अधिकांश देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना चुके हैं। यही मुख्य कारण है कि वहाँ साल के 13 महीने होते हैं और तारीखों में इतना बड़ा अंतर पाया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ पूरी दुनिया 1 जनवरी को नया साल मनाती है, वहीं इथियोपिया में नया साल आमतौर पर 11 सितंबर (लीप ईयर में 12 सितंबर) के आसपास मनाया जाता है, जिसे वहाँ ‘एनकुतातश’ (Enkutatash) कहा जाता है।









