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इज़राइल में हर नागरिक है सिपाही! 18 की उम्र होते ही हाथ में थमा दी जाती है गन; जानें उस देश की ताकत की 5 बड़ी वजहें

दुनिया के सबसे खतरनाक पड़ोसी देशों के बीच घिरा इज़राइल आखिर इतना शक्तिशाली कैसे है? जानें उस देश का सच जहाँ डॉक्टर हो या इंजीनियर, हर नागरिक को फौजी बनना पड़ता है। इज़राइल की अजेय ताकत के उन 5 रहस्यों को समझें जो पूरी दुनिया को हैरान करते हैं।

By Pinki Negi

इज़राइल में हर नागरिक है सिपाही! 18 की उम्र होते ही हाथ में थमा दी जाती है गन; जानें उस देश की ताकत की 5 बड़ी वजहें
इज़राइल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ साल के लंबे अंतराल के बाद दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इजरायल पहुँचे हैं, जहाँ उनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक और रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि पीएम मोदी इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे।

इस यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक साझा करने और हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत की सैन्य शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी। यह देखना दिलचस्प है कि दिल्ली से भी कम आबादी वाला इजरायल अपनी तकनीक और हौसले के दम पर दुनिया का इतना शक्तिशाली देश कैसे बन गया।

इज़राइल की वो ढाल जो दुश्मन के वार से पहले ही उसे खत्म कर देती है

इज़राइल की असली ताकत उसकी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ में छिपी है, जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक और असरदार एजेंसियों में गिना जाता है। मोसाद की सबसे बड़ी खूबी उसकी ‘प्रोएक्टिव’ रणनीति है; यानी वह हमला होने का इंतज़ार नहीं करती, बल्कि इज़राइल की सीमाओं से बाहर जाकर दुश्मनों के मंसूबों को पहले ही भांप लेती है और उन्हें बेअसर कर देती है।

चाहे जासूसी हो, आतंकवाद को रोकना हो या गुप्त सैन्य ऑपरेशन (Black Ops), मोसाद ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत साबित की है। इसी सुरक्षा चक्र की वजह से इज़राइल अपने चारों तरफ दुश्मनों से घिरे होने के बावजूद आज एक बेहद सुरक्षित और ताकतवर देश बना हुआ है।

‘आयरन डोम’ से लेकर खतरनाक ड्रोन्स तक इज़राइल का जलवा

इजरायल की ताकत का दूसरा बड़ा स्तंभ उसकी एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी है। राफेल और एल्बिट सिस्टम्स जैसी इजरायली कंपनियां आज दुनिया के सबसे घातक हथियार, रडार और साइबर सुरक्षा उपकरण बना रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) सिस्टम है, जो दुश्मन के रॉकेटों को शहर में गिरने से पहले ही हवा में नष्ट कर देता है।

इजरायल न सिर्फ इन हथियारों से अपनी सुरक्षा करता है, बल्कि इन्हें पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट (निर्यात) भी करता है। यही कारण है कि तकनीक के दम पर इजरायल की अर्थव्यवस्था और दुनिया भर में उसका दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है।

GDP का 6% रिसर्च पर खर्च कर दुनिया को चौंका रहा इज़राइल

इज़राइल की असली ताकत का राज उसके रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर होने वाला भारी निवेश है। अपनी GDP का लगभग 6% हिस्सा रिसर्च पर खर्च करने वाला यह दुनिया का नंबर-1 देश है। यह निवेश सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रक्षा, साइबर सुरक्षा, आधुनिक खेती और AI जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाता है।

इज़राइल ने एक ऐसा ‘इकोसिस्टम’ तैयार किया है जहाँ यूनिवर्सिटी, प्राइवेट कंपनियाँ और सेना मिलकर काम करती हैं। इससे लैब में होने वाली रिसर्च बहुत तेजी से असल दुनिया की समस्याओं का समाधान बन जाती है। यही कारण है कि तकनीक के मामले में इज़राइल हमेशा अपने विरोधियों से दो कदम आगे रहता है और आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत है।

इजरायल की अनिवार्य सैन्य सेवा का पावरफुल सिस्टम

इजरायल की मजबूती का एक बड़ा कारण वहां का सैन्य कानून है, जिसके तहत 18 साल की उम्र पार करते ही लगभग हर नागरिक के लिए सेना में सेवा देना अनिवार्य है। चाहे पुरुष हों या महिलाएं, सभी को सशस्त्र बलों (IDF) का हिस्सा बनना पड़ता है।

इस व्यवस्था से इजरायल के पास अनुशासित और युद्ध के लिए तैयार नागरिकों की एक बहुत बड़ी फौज तैयार हो जाती है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि युद्ध या आपातकाल की स्थिति में इन ‘रिजर्व सैनिकों’ को कुछ ही घंटों के भीतर मोर्चे पर तैनात किया जा सकता है। यही वजह है कि आबादी कम होने के बावजूद इजरायल सैन्य मोर्चे पर दुनिया के बड़े-बड़े देशों को कड़ी चुनौती देता है।

इज़राइल की रग-रग में बसता है इनोवेशन और रिस्क लेने का जज़्बा?

इज़राइल को पूरी दुनिया में “स्टार्टअप नेशन” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहाँ प्रति व्यक्ति स्टार्टअप्स की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। छोटी आबादी होने के बावजूद, इज़राइल ने साइबर सुरक्षा, फिनटेक और AI जैसे क्षेत्रों में हज़ारों सफल कंपनियाँ खड़ी की हैं। तेल अवीव जैसे शहर आज सिलिकॉन वैली को टक्कर दे रहे हैं।

यहाँ का समाज रिस्क लेने और नई खोज करने को बढ़ावा देता है। एक दिलचस्प बात यह है कि इज़राइल की सेना से निकलने वाले अधिकारी अपने तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल बड़ी टेक कंपनियाँ बनाने में करते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार मिलती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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